एनएच पर तेज हो जाती हैं दिलों की धड़कनें

Updated at : 22 Sep 2017 5:43 AM (IST)
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एनएच पर तेज हो जाती हैं दिलों की धड़कनें

रजौली से दिबौर तक गड्ढे में तब्दील हुई सड़क रजौली : रजौली से दिबौर 14 किमी झारखंड राज्य की ओर अंतरराज्यीय सीमा पर सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं. बावजूद प्रशाासनिक अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है. अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है कि वर्षों से इन बड़े-बड़े गड्ढों […]

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रजौली से दिबौर तक गड्ढे में तब्दील हुई सड़क

रजौली : रजौली से दिबौर 14 किमी झारखंड राज्य की ओर अंतरराज्यीय सीमा पर सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं. बावजूद प्रशाासनिक अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है. अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है कि वर्षों से इन बड़े-बड़े गड्ढों को भरने में किसी ने गंभीरता नहीं दिखायी. मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति करने की वजह से एक माह में ही सड़क फिर से गड्डे में बदल गयी. बिहार की सीमा से महज 500 मीटर की दूरी पर झारखंड की चकाचक सड़क है.
प्रतिदिन इस सड़क से हजारों की संख्या में ट्रक, पिकअप वैन, बसें व छोटी गाड़ियां गुजरती हैं .इन गाड़ियों पर सवार होकर हजारों लोग गुजरते हैं. लेकिन, जैसे ही गाड़ियां इन गड्ढों को पार करती हैं, तो दिल धड़क जाता है. कई बसें व मिनी बसें ऐसी भी होती हैं, जिसकी छतों पर लोग सवार रहते हैं. जब गाड़ियां हिचकोले खाती हैं
, तो लोगों को मौत सामने नजर आती है. सड़कों के रख-रखाव व मरम्मत के लिए रजौली में एनएच-31 अवर प्रमंडल का कार्यालय है, लेकिन यहां पदस्थापित अधिकारी कार्यालय के भवन को जर्जर बता कर नवादा में बैठते हैं. पूरे साल में केवल दो बार 26 जनवरी व 15 अगस्त को ही यह कार्यालय खुलता है.
क्या कहते हैं वाहन मालिक व बुद्धिजीवी
माल लेकर जानेवाले ट्रकों पर गड्ढों का जबर्दस्त असर पड़ता है. कई बार संतुलन खो देने के कारण गाड़ियां पलट जाती हैं. इससे वाहन मालिकों को हजारों रुपयों का नुकसान झेलना पड़ता है. खाली गाड़ियों पर इसका नाम मात्र का असर पड़ता है.
पल्लू सिंह,रजौली
गड्ढे से होकर ट्रकों के गुजरने से बसों व ट्रकों के टायरों व लोहे की प्लेटों पर जबर्दस्त असर पड़ता है. कम समय में ही वाहन के पार्ट-पुर्जे ढीले पड़ जाते हैं. आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचता है.
विनोद कुमार,पिकअप मालिक,रजौली
एनएच की सड़क बनवाने की जगह विभागीय अधिकारी इसकी मरम्मत कराते हैं. मरम्मत के दौरान कम कीमत की छर्री व मोरम डाल कर काम चला दिया जाता है.
दीपक सिंह,बस मालिक,रजौली
घटिया निर्माण सामग्री का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चार माह पूर्व सड़क की मरम्मत करायी गयी है. लेकिन, एक माह में सड़क का नक्शा बिगड़ गया है. चालक जान जोखिम में डाल कर वाहनों को गड्ढे से पार करते हैं.
मुन्ना सिंह,हरदिया
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