फैशन के साथ कदमताल कर रहे खादी के कपड़े

Updated at : 14 Sep 2017 10:12 AM (IST)
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फैशन के साथ कदमताल कर रहे खादी के कपड़े

त्योहारों को ध्यान में रखते हुए खादी के कपड़ों पर 20 प्रतिशत की छूट सूत कात कर महिलाएं संवार रहीं जिंदगी नवादा नगर : खादी के कपड़ों पर संत विनोबा भावे की जयंती पर 11 सितंबर से 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है़ आम लोगों तक खादी की पहुंच बनाने के लिए हर […]

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त्योहारों को ध्यान में रखते हुए खादी के कपड़ों पर 20 प्रतिशत की छूट
सूत कात कर महिलाएं संवार रहीं जिंदगी
नवादा नगर : खादी के कपड़ों पर संत विनोबा भावे की जयंती पर 11 सितंबर से 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है़ आम लोगों तक खादी की पहुंच बनाने के लिए हर स्तर पर इसे बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है़ खादी के सभी उत्पादों पर मिलने वाली छूट का लाभ जितना अधिक आमलोगों तक पहुंचेगा उतना ही अधिक फायदा सूत कातनेवाली महिलाओं को होगा.
खादी ग्रामोद्योग समिति, ग्राम निर्माण मंडल के द्वारा चरखा से सूत कातनेवाली महिलाओं तक कच्चा माल पहुंचाने के साथ तैयार सूत की खरीदारी की जाती है. त्योहार के पहले ऑफर शुरू किये जाने से खादी के कपड़ों की बिक्री बढ़ेगी़ इसका सीधा फायदा सूत कातनेवाली महिलाओं को मिलेगा.
स्पेशल कपड़ों पर भी हो रहा काम
जिले में खादी के प्रोडक्ट के उत्पादन व बिक्री का काम संचालित हो रहे उत्पादन केंद्रों पर किया जाता है. नवादा जिला मुख्यालय के बिक्री केंद्र के साथ हिसुआ, नारदीगंज, रजौली, पकरीबरावां, कौआकोल, सेखोदेवरा आश्रम, वारिसलीगंज, लाल बिगहा, काशीचक में बिक्री सह उत्पादन केंद्र बने हुए हैं. खादी के कपड़ों पर उन्हीं दुकानों पर छूट का लाभ मिलेगा.
त्योहारों को ध्यान में रखते हुए नये डिजाइन के कुर्ते, कलर फूल बंडी, हाफ शर्ट, धारीदार साड़ियां, खादी के रंगीन कपड़े आदि लोगों को आकर्षित करनेवाले प्रोडक्ट उपलब्ध हैं. खादी के सूती कपड़ों के साथ ही मटका, कटिया, पोली कटिया, तसर आदि कपड़े भी जिले में तैयार किये जाते हैं. वारिसलीगंज में चादर बनाने के लिए मोटी सूत बनायी जाती है. खादी की बिक्री बढ़ने का मतलब है कि इससे जुड़े लोगों के जीवन में भी नयी रोशनी आयेगी.
एक किलो सूत कातने के मिलते हैं 200 रुपये
खादी ग्रामोद्योग समिति के द्वारा जिले के रतोई, सिंघना, सेखोदवरा, झिलार आदि गांवों की महिलाओं को जोड़ कर चरखे से सूत कातने का काम किया जा रहा है. सिंघना गांव की उर्मिला देवी ने कहा कि वह 30-35 सालों से चरखा चला रही हैं. सप्ताह से महीना दिन में तैयार सूत की बिक्री होती है. समय के अनुसार आधे से एक किलो धागा प्रतिदिन तैयार हो जाता है. खादी मंडल के द्वारा एक किलो धागा बनाने के बदले 200 रुपये मजदूरी मिलती है. घर में रह कर चरखा चला कर आज महिलाएं भी घर के आर्थिक हालात को सुधारने के लिए काम कर रही हैं.
खादी के कपड़ों पर छूट के बाद बिक्री बढ़ी है. 20 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है़ फैशन के अनुसार खादी के प्रति लोगों का नजरिया बदला है. आज युवाओं में भी खादी खरीदने का उत्साह दिखता है.
जयनारायण जायसवाल, संचालक, खादी बिक्री सह उत्पादन केंद्र
खादी से सैकड़ों महिलाएं जुड़ कर धागा बना रही हैं. बिक्री बढ़ने से सबकी आमदनी बढ़ती है. इसके लिए विशेष रूप से काम करने की जरूरत है.
अशोक कुमार, जिला मंत्री खादी ग्रामोद्योग समिति
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