25 हजार उपभोक्ता परेशान

Updated at : 26 Dec 2015 2:17 AM (IST)
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25 हजार उपभोक्ता परेशान

मनमानी. पहले कनेक्शन में परेशानी, अब िबजली बिल में लापरवाही जिले में दो लाख तीन हजार बिजली के उपभोक्ता हैं. इन उपभोक्ताओं में से करीब 25 हजार उपभोक्ताओं के बिजली बिल में प्रति माह गड़बड़ी आ जा रही है. गड़बड़ बिजली बिल को ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं द्वारा कार्यालयों का चक्कर लगाने के अलावा […]

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मनमानी. पहले कनेक्शन में परेशानी, अब िबजली बिल में लापरवाही
जिले में दो लाख तीन हजार बिजली के उपभोक्ता हैं. इन उपभोक्ताओं में से करीब 25 हजार उपभोक्ताओं के बिजली बिल में प्रति माह गड़बड़ी आ जा रही है. गड़बड़ बिजली बिल को ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं द्वारा कार्यालयों का चक्कर लगाने के अलावा उनकी चापलूसी करने में मशगूल रहते हैं. फिर भी बिजली बिल ठीक होने का नाम नहीं ले रहा है. अधिकारियों की मनमानी से आक्रोश बढ़ रहा है.
बिहारशरीफ : बिजली उपभोक्ताओं की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है. पहले लोग बिजली का कनेक्शन लेने के लिए विभाग के कार्यालयों का चक्कर लगाने के साथ ही अधिकारियों की चापलूसी करते फिरते थे. इससे अब लोगों को छुटकारा मिल गया है. कनेक्शन लेने के बाद लोग बिजली आने का दिन सप्ताह तक इंतजार करते रहते थे. अब इससे भी छुटकारा मिल गया है.
मगर बिजली उपभोक्ताओं के समक्ष बिजली बिल में गड़बड़ी की नयी परेशानी से जूझना पड़ रहा है. जिले में बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं. जिनकी शिकायत बिजली बिल में गड़बड़ी की है और वे बिजली बिल की गड़बड़ी को दूर करवाने के लिए जूनियर इंजीनियर से लेकर असिस्टेंट इंजीनियर तथा वरीय अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर महीनों से लगा रहे हैं.
विभागीय अफसरों द्वारा कई महीनों से यह कह कर उपभोक्ताओं को टरका दिया जाता है कि अगली बार जब बिजली बिल आयेगी तो सुधर कर आयेगी. मगर फिर वहीं गड़बड़ बिजली बिल उपभोक्ताओं को मिल जाती है.
25 हजार उपभोक्ताओं को गड़बड़ बिजली बिल’
जिले में दो लाख तीन हजार बिजली के उपभोक्ता हैं. इनमें से करीब 25 हजार उपभोक्ताओं का प्रत्येक माह बिजली बिल में कुछ न कुछ गड़बड़ी रहती है. बिजली बिल की इन गड़बडि़यों में से कुछ गड़बड़ियों को तो हाथों हाथ ठीक कर दिया जाता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में हर महीने नहीं बिजली बिल:बिजली बिल शहरी क्षेत्रों में कमोबेश मिल ही जाती है.
मगर ग्रामीण क्षेत्रों खास कर सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कई महीने पर बिजली बिल मिलती है. ग्रामीणों को कई महीने बाद एक बार बड़ी राशि का बिजली बिल मिल जाने से उपभोक्ता इसे जमा करने में असमर्थ हो जाते हैं. मीटर रीडिंग व बिजली बिल बांटने का काम एजेंसी को सुपूर्द किये जाने के बाद भी स्थिति दयनीय है.
ग्यारह सौ गांवों को पूर्ण रूप से बिजली पहुंचाने का लक्ष्य अब भी बाकी:ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत दिसंबर 2015 तक जिले के नौ सौ राजस्व गांवों में पूर्ण रूप से बिजली पहुंचायी जानी थी.
एक राजस्व गांव के अधीन कम से कम तीन गांवों को शामिल किया गया है. इस लिहाज से जिले के 27 सौ गांवों मेंे बिजली पहुंचायी जानी थी. मगर अब तक छह सौ गांवों में ही बिजली पहुंचायी जा सकी है. करीब 21 सौ गांव अब भी पूर्ण रूप से बिजली की पहुंच से दूर है.
उपभोक्ता फोरम में शिकायत के अलावा कोई चारा नहीं
स्थानीय पटेल नगर मोहल्ले धीरेन्द्र ब्रह्मदेव जिनका खाता संख्या 100193230 हैं. बताते हैं कि बिजली बिल की गड़बड़ी की शिकायत कई महीने अधिकारियों से की थी. उन्होंने बार-बार बिल ठीक हो जाने का आश्वासन दिया. मगर अब तक बिल की गड़बड़ी दूर नहीं हुई है.
उन्होंने बताया कि उनका बिजली बिल नवंबर माह का 31 हजार 509 रुपये का है, जो घरेलू कनेक्शन पर आया है. इसी प्रकार शिवपुरी मोहल्ले के बीरेन्द्र कुमार बताते हैं कि उनका कंज्यूमर आईडी बीएसएफ/आरसीपी-5009 है.
इनका जून माह में बिजली बिल 28 हजार से ज्यादा का आ गया. इसकी लिखित शिकायत विभाग से की इनका नवंबर माह का बिजली बिल 54331 रुपये का है. गड़बड़ बिजली बिल को ठीक कराने के लिए अधिकारियों से आग्रह करते-करते थक चुके हैं. अब वे इस मामले को उपभोक्ता फोरम में ले जाने का मन बना चुके हैं.
” बिजली कनेक्शन देने के लिए विभाग द्वारा अक्सर कैंप लगाये जाते हैं. इन कैंपों में ऑन द स्पॉट कनेकशन देने का कार्य किया जाता है. बिजली बिल में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही है. बिजली बिल की पेडिंग शिकायतों को एक सप्ताह के अंदर निबटा दिया जायेगा. भविष्य में बिजली बिल की गड़बड़ी को कम से कम हो. इसकी व्यवस्था की जा रही है.”
रिजवान अहमद, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, बिहारशरीफ
खपत 55 मेगावाट, आपूर्ति 80 मेगावाट
बड़ी पहाड़ी ग्रिड से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान समय में 80 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हो रही है. जबकि खपत केवल 55-56 मेगावाट की है. 55 मेगावाट से ज्यादा बिजली पावर सब स्टेशन ले पा रहे हैं. इसके कारण करीब 25 मेगावाट बिजली सरेंडर हो जा रही है. ग्रिड के कर्मी बताते हैं कि सर्दी का मौसम होने के कारण बिजली की खपत कम है.
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