मेड़ों को दुरुस्त कर खेत में धान का बिचड़ा गिराने की तैयारी

Updated at : 28 Jun 2015 8:22 AM (IST)
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मेड़ों को दुरुस्त कर खेत में धान का बिचड़ा गिराने की तैयारी

बिहारशरीफ : काफी दिनों से किसान बारिश की आस लगाये हाथ पर हाथ धरे बैठे थे. शनिवार की सुबह किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आयी. मॉनसून की पहली बारिश ने किसानों को राहत दी है. सुबह से ही रूक-रूक हो रही बारिश किसानों के उदास चेहरे पर रौनक लौटाने में कामयाब रही. बारिश के साथ […]

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बिहारशरीफ : काफी दिनों से किसान बारिश की आस लगाये हाथ पर हाथ धरे बैठे थे. शनिवार की सुबह किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आयी. मॉनसून की पहली बारिश ने किसानों को राहत दी है.
सुबह से ही रूक-रूक हो रही बारिश किसानों के उदास चेहरे पर रौनक लौटाने में कामयाब रही. बारिश के साथ ही किसान अपने खेत की मेड़ को ठीक करने के लिए घर से बाहर निकल पड़े. शाम होते-होते कई खेतों में हल-बैल, ट्रैक्टर व पावर टिलर चलने लगे. खेतों में धान के बिचड़े बोने का रूका पड़ा कार्य शुरू हो गया है.
घर के बिचड़े को दे रहे तवज्जो:
बिचड़े बोने में किसान घर के बिचड़ों को तव्वजो दे रहे हैं. किसान बाजार से वैसे ही उन्नत बीज को खरीद रहे हैं, जिन पर उनका भरोसा है और जिसे वे पूर्व में इस्तेमाल कर चुके हैं. बिचड़े बोने के कार्य में किसान एक दूसरे की राय ले रहे हैं. मध्यम अवधी व अल्प अवधी वाले धान के किस्म का प्रयोग कर रहे हैं.
पांच दिन ही गुजरा है आद्रा नक्षत्र:
ऐसे तो धान का बिचड़ा गिराने के लिए रोहिणी नक्षत्र उपयुक्त सीजन माना जाता है. लेकिन व गुजर चुका है. इसके बाद आद्रा नक्षत्र भी धान के बिचड़े बोने के लिए बढ़िया समय है.आद्रा नक्षत्र अभी पांच दिन ही गुजरे हैं. यह नक्षत्र अभी दस दिन बाकी है. ऐसे में किसानों की बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है. इस बात को ध्यान में रखते हुए किसान भी धान के बिचड़े बोने में तल्लीन हैं.
12 दिन विलंब से आया मॉनसून:
मॉनसून आने का उपयुक्त समय 15 जून माना जाताहै. मॉनसून आया है 27 जून को. ऐसे में मॉनसून के आने में ज्यादा विलंब नहीं हुआ है. किसान भी इस बात को किसान भी ध्यान में रख कर जी जान से बिचड़े बोने में जुटे हैं. नगरनौसा के किसान वीरेंद्र कुमार,चंडी के सरयुग महतो,नूरसराय के कवींद्र कुमार आदि ने बताया कि जिस बारिश का इंतजार किसानों को था,वो बारिश हो रही है. इससे उनमें खुशी है. किसान बिचड़े बोने में जी-जान से लगे हुए हैं.
धान के बिचड़े गिराने का बढ़ेगा प्रतिशत:
पिछले दिनों तक जिले में धान के बिचड़े गिराने का प्रतिशत काफी कम था. बारिश न होने के कारण यह स्थिति थी. जिसके कारण किसानों के साथ कृषि विभाग परेशान था. जिले में एक लाख 28 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी का एवं 12 हजार 800 हेक्टेयर में धान के बिचड़े बोने का लक्ष्य है. मॉनसून की इस पहली बारिश में धान के बिचड़े बोने के कार्य में तेजी आने की संभावना है.
बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए मॉनसून की यह बारिश काफी फायदेमंद है. इससे रूके पड़े धान के बिचड़े डालने के कार्य में तेजी आयेगी. कृषि विभाग को उम्मीद है कि अगले एक सप्ताह धान के बिचड़े डालने का लक्ष्य पूरा हो जायेगा.
बैद्यनाथ रजक, जिला कृषि पदाधिकारी, नालंदा
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