30 प्रकार की बीमारियों का होगा समुचित इलाज

Updated at : 27 Jun 2015 3:10 AM (IST)
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30 प्रकार की बीमारियों का होगा समुचित इलाज

बिहारशरीफ : बच्चों की सेहत का अब स्वास्थ्य विभाग खास ध्यान रखेगा. जाड़ा- बुखार जैसे सामान्य बीमारियों से लेकर बच्चों की जन्मजात विकृतियों को दूर करने में विभाग कोई कोर- कसर नहीं छोड़ेगा. सूबे के 19 जिलों में चल रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके)से नालंदा जिला भी जल्द लाभांवित होगा. बहरहाल, अभी इसमें कुछ […]

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बिहारशरीफ : बच्चों की सेहत का अब स्वास्थ्य विभाग खास ध्यान रखेगा. जाड़ा- बुखार जैसे सामान्य बीमारियों से लेकर बच्चों की जन्मजात विकृतियों को दूर करने में विभाग कोई कोर- कसर नहीं छोड़ेगा. सूबे के 19 जिलों में चल रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके)से नालंदा जिला भी जल्द लाभांवित होगा. बहरहाल, अभी इसमें कुछ अड़चने तो है लेकिन विभागीय स्तर पर इसका समाधान निकाला जा रहा है. फिलहाल केंद्र प्रायोजित इस कार्यक्रम के लिए चिकित्सकों सहित पारा मेडिकल स्टाफ को पांच दिनी प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

* 30 प्रकार की बीमारियों की होगी जांच :आरबीएसके के तहत बच्चों के 30 तरह की बीमारियों की जांच कर उसका समुचित इलाज किया जायेगा. इन सभी बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटकर इसे 4 डी का नाम दिया गया है. जिन तीस बीमारियों का इलाज किया जायेगा, उसमें जाड़ा- बुखार, सर्दी- खांसी, गैस्ट्रिक,पेट दर्द, कान दर्द, दस्त,दांत सड़ना, हकलापन, बहरापन, किसी अंग में सून्नापन, गूंगापन, चर्म रोग, नाक रोग आदि शामिल हैं.
* 4 डी श्रेणी में होगी सभी बीमारियां :
बच्चों की सभी तीस प्रकार की बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटा गया है. इन श्रेणियों को 4 डी का नाम दिया गया है. इस 4 डी में पहला डिफिसिएंसीज यानी पोषाहार में कमी की वजह से होने वाली बीमारियां ,दूसरा डिजीज यानी बच्चों की सामान्य बीमारियां,तीसरा डिफेक्ट यानी जन्मजात विकृतियों से उत्पन्न रोग एवं चौथा डेवलपमेंटल डिलेज यानी विकास में कमी से उत्पन्न रोग शामिल है.
* शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों का इलाज : आरबीएसके में शून्य से अठारह वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जायेगा. शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी जबकि छह से अठारह साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग उनके स्कूलों में जाकर की जायेगी,ताकि चिह्नित बीमारियों के समुचित इलाज में देरी न हो. आंगनबाड़ी केंद्रों पर साल में दो बार यानी प्रति छह महीने पर जबकि स्कूलों में साल में सिर्फ एक बार बच्चों के इलाज के लिए स्क्रीनिंग की जायेगी. स्क्रीनिंग करते वक्त बच्चों को हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध कराये जायेंगे.
* बच्चों का ऐसे होगा इलाज :
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम की सफलता के लिए गठित मोबाइल मेडिकल टीम जिले के हर आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में पहुंचेंगी. तब टीम में शामिल आयुष चिकित्सक बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगे. ऐसे में जब सर्दी- खांसी व जाड़ा – बुखार जैसी सामान्य होगी, तब तुरंत बच्चों को दवा देंगे, लेकिन बीमारी गंभीर होगी तब उसे आवश्यक जांच एवं समुचित इलाज के लिए निकटतम पीएचसी में भेजेंगे. टीम में शामिल एएनएम बच्चों का वजन, उनकी हाइट, सिर की परिधि, बांह की मोटाई की नापतौल करेगी. फार्मासिस्ट रजिस्टर में स्क्रीनिंग किये गये बच्चों से संबंधित बातों को ऑन द स्पॉट क्रमवार अंकित करेंगे.
* मोबाइल मेडिकल टीम में यह होंगे शामिल :
एक मोबाइल टीम में चार सदस्य होंगे. इस हिसाब से एक टीम में दो आयुष चिकित्सक,एक एएनएम एवं एक फार्मासिस्ट सह डाटा असिस्टेंट शामिल होंगे. हरेक पीएचसी में दो टीम कार्य के लिए तैयार होगी. जिलेभर में कुल 30 टीम आरबीएसके में कार्य करेगी. एक टीम प्रतिदिन 125 बच्चों की स्क्रीनिंग कर उनका समुचित इलाज करेगी.
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