लकड़ी और फर्नीचर से करोड़ों का कारोबार, मुजफ्फरपुर के कारीगरों को सरकारी मदद का इंतजार

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Muzaffarpur News

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में लकड़ी और फर्नीचर का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जहां रोजाना एक करोड़ रुपये का व्यापार होता है. शहर में 40 आरा मशीनों और 170 से अधिक फर्नीचर दुकानों के जरिए खिड़की-दरवाजे से लेकर बेड-दिवान तक की डिमांड पूरी की जाती है. बावजूद इसके, ग्रामीण कारीगरों की स्थिति चिंताजनक है.

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Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में शहर में लकड़ी और फर्नीचर का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है. भवन निर्माण और शादियों के मौसम में लकड़ी की मांग बनी रहती है. शहर के 40 आरा मशीनों और 170 से अधिक फर्नीचर दुकानों से प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है. शिक्षण संस्थानों, घरों की सजावट, और खिड़की-दरवाजों के लिए भी लकड़ी की मांग लगातार बढ़ रही है.

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शहर में 300 कारीगर सक्रिय, लेकिन ग्रामीण कारीगर परेशान

मुजफ्फरपुर में लगभग 300 कारीगर फर्नीचर निर्माण से जुड़े हैं. इनमें 200 कारीगर दुकानों में काम करते हैं, जबकि 100 लोग साइट पर फर्नीचर तैयार करते हैं. रेडीमेड फर्नीचर और स्टील दरवाजों की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद लकड़ी का व्यवसाय प्रभावित नहीं हुआ है. हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों के 3,000 से अधिक कारीगरों की स्थिति चिंताजनक है, जिन्हें काम के लिए शहर का रुख करना पड़ता है.

बढ़ई समाज की स्थिति सुधारने की मांग

बढ़ई समाज से जुड़े प्रतिनिधियों ने सरकार से मदद की अपील की है. उनका कहना है कि विश्वकर्मा योजना के तहत उचित वित्तीय सहायता नहीं मिल पा रही है, जिससे कारीगरों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने में दिक्कतें हो रही हैं.

प्रमुख मांगें

  • छोटे आरा मशीनों को लाइसेंस से मुक्त करना।
  • विश्वकर्मा कला बोर्ड का गठन।
  • कारीगरों के लिए फैक्ट्री खोलने के लिए सरकारी अनुदान।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कारीगर कार्ड बनाना।

कारीगरों का संघर्ष और उम्मीद

कारीगर संजीत शर्मा का कहना है कि रेडीमेड फर्नीचर के बावजूद लकड़ी के फर्नीचर की मांग बनी हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं.

प्रभाकर शर्मा जो बढ़ई विश्वकर्मा संघ के ट्रस्टी ने बताया कि सरकार को कारीगरों की कला को पहचानते हुए योजनाएं शुरू करनी चाहिए. इससे न केवल कारीगरों की स्थिति सुधरेगी, बल्कि यह परंपरागत कला भी जीवित रहेगी. लकड़ी के इस बढ़ते कारोबार से मुजफ्फरपुर शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है. लेकिन ग्रामीण कारीगरों की समस्याओं का समाधान कर सरकार इस क्षेत्र को और ऊंचाई पर ले जा सकती है.

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