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मुजफ्फरपुर : किसी गठबंधन ने नहीं खोले पत्ते, चुनावी मैदान तैयार, अब लड़ाकों का इंतजार

Updated at : 12 Mar 2019 6:53 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : किसी गठबंधन ने नहीं खोले पत्ते, चुनावी मैदान तैयार, अब लड़ाकों का इंतजार

मुजफ्फरपुर : रहुत, मिथिला व चंपारण के इलाके में लोकसभा का 11 सीटें आती हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में इनमें से सभी सीटें एनडीए की झोली में गयी थी. अकेले आठ सीटों पर भाजपा का कब्जा हुआ और सीतामढ़ी में सहयोगी रालोसपा तथा समस्तीपुर सुरक्षित व वैशाली में लोजपा के उम्मीदवार चुनाव जीते. कांग्रेस […]

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मुजफ्फरपुर : रहुत, मिथिला व चंपारण के इलाके में लोकसभा का 11 सीटें आती हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में इनमें से सभी सीटें एनडीए की झोली में गयी थी. अकेले आठ सीटों पर भाजपा का कब्जा हुआ और सीतामढ़ी में सहयोगी रालोसपा तथा समस्तीपुर सुरक्षित व वैशाली में लोजपा के उम्मीदवार चुनाव जीते.

कांग्रेस व राजद को इन जगहों में एक भी सीटें नहीं मिली. इस बार के चुनाव में एनडीए जदयू के आने से और भी अपने को मजबूत मान रही है. वहीं, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी के साथ कांग्रेस के एक गठबंधन में आने से महागठबंधन भी अपने को ताकतवर समझ रहा है.

मिथिला, तिरहुत और चंपारण के इलाकों में कुछ लोकसभा सीटों पर सवर्ण मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं. कुछ पर यादव व अतिपिछड़ी जातियों के वोटर फैसला करेंगे. मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट पर 2009 में जेडीयू के कैप्टन जयनारायण प्रसाद निषाद सांसद थे. 2014 में उनके पुत्र अजय निषाद भाजपा से सांसद बने.

उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह को पराजित किया. महागठबंधन में यह सीट किसके खाते में जायेगी, यह अभी तक तय नहीं है. वैशाली में लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा आते हैं. इस बार भी किसी महिला उम्मीदवार के होने की संभावना जतायी जा रही है. समस्तीपुर से पिछले चुनाव में विजयी लोजपा के रामचंद्र पासवान फिर अपना दावा ठोक रहे हैं. वहीं, कांग्रेस के डाॅ अशोक कुमार भी अपनी दावेदारी पेश करने में लगे हैं. कुशवाहा बहुल उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में यादव वोटरों का रुख काफी मायने रखता है़

इसी समीकरण को भांपकर वर्ष 2014 में एनडीए के प्रत्याशी भाजपा के तत्कालीन हाजीपुर से विधायक रहे नित्यानंद राय ने बाजी मार ली थी़ यहां अब तक न यूपीए और न एनडीए ने अपने पत्ते खोले हैं. सीतामढ़ी की सीट पर महागठबंधन में राजद व कांग्रेस भी दावा कर रही है. वाल्मीकिनगर सीट पर सभी दल सक्रिय हैं. यह सीट भाजपा के कब्जे में है. सतीश चंद्र दूबे यहां से सांसद हैं. हालांकि, इस बार यह सीट जदयू के कोटे में जाने की चर्चा है. वहीं, महागठबंधन से स्थिति अभी साफ नहीं हुई है. पश्चिम चंपारण की इस सीट पर भाजपा का कब्जा है.

डॉ संजय जायसवाल यहां से सांसद हैं. यह सीट भाजपा के कोटे में ही रहने की चर्चा है. वहीं, महागठबंधन से यह सीट राजद के खाते में जाने की संभावना है. जबकि, कांग्रेसी नेता भी अपना दावा बनाये हुए हैं. झंझारपुर सीट पर 2014 में भाजपा के वीरेंद्र कुमार चौधरी विजयी हुए थे. इस बार उहापोह की स्थिति बनी हुई है. भाजपा से जहां निवर्तमान सांसद वीरेंद्र कुमार चौधरी व डीएन मंडल का नाम सामने आ रहा है. वहीं महागठबंधन में सपा के देवेंद्र यादव है. मधुबनी लोकसभा सीट पर भाजपा के हुकुमदेव नारायण यादव सांसद है.

इस बार हुक्मदेव नारायण यादव के पुत्र अशोक यादव व पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा को उम्मीदवार बनाये जाने के कयास लगाये जा रहे हैं. महागठबंधन से राजद के अली अशरफ फातमी का नाम सबसे आगे है. कांग्रेस के डाॅ शकील अहमद भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं. दरभंगा की सीट पर कीर्ति आजाद सांसद हैं. कीर्ति आजाद इस समय कांग्रेस में शामिल हो गये हैं.

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