Indigo Crisis : इंडिगो के महासंकट का विलेन कौन, क्या नए नियमों में ढील से होगा समाधान?

Edited by Rajneesh Anand
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इंडिगो का संकट

Indigo Crisis : एविशन कंपनी इंडिगो के महासंकट के लिए क्या DGCA का नया नियम जिम्मेदार है? यह सवाल पूरा देश पूछ रहा है. वजह यह है कि इस नियमावली के सख्ती से लागू होने के बाद से ही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट्‌स रद्द हो रही है और एयरपोर्ट पर हंगामा मचा हुआ है. इस संकट ने एविशन इंडस्ट्री की कई खामियों को भीे उजागर कर दिया है, जिनमें पायलट और क्रू मेंबर्स की कमी प्रमुख है.

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Indigo Crisis : इंडिगो का संकट लगातार 5वें दिन भी जारी है. शनिवार को भी कंपनी ने कई बड़े एयरपोर्ट से लगभग 400 विमानों को रद्द किया है. अभी भी हजारों यात्री इस अव्यवस्था के कुचक्र में फंसे हुए हैं, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही यह अव्यवस्था समाप्त हो जाएगी.

क्या DGCA द्वारा अव्यवस्था को समाप्त करने के लिए  नई नियमावली FDTL पर फिलहाल रोक लगाना सही है?

फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन ( FDTL) 1 नवंबर से सख्ती से प्रभावी हुआ, जिसकी वजह से इंडिगो के पास पायलट और क्रूर मेंबर्स की भारी कमी हो गई थी, चूंकि नए नियमों के अनुसार पायलट को जरूरी आराम और अवकाश देना अनिवार्य हो गया था, इसलिए एक के बाद एक विमान पहले तो डिले हुए और उसके बाद उन्हें कैंसिल करना पड़ा. इस वजह से विमानन सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई, क्योंकि एक दिन में 500–1000 फ्लाइट्‌स कैंसिल हो रहे थे. इस अव्यवस्था की वजह से सरकार पर भारी दबाव था और अंतत: दबाव में सरकार ने नई नियमावली को अभी वापस ले लिया है. स्थिति सामान्य होने के बाद ही उसे लागू करने पर विचार किया जाएगा. दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर काम करने वाले एक अधिकारी ने नाम ना छापने के अनुरोध पर प्रभात खबर से बात की और बताया कि नई नियमावली को फिलहाल स्थगित करने का फैसला बहुत सही है. इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा और कंपनी को कुछ समय भी मिल जाएगा. इस समय में कंपनी नई नियुक्ति भी कर लेगी और शिड्‌यूलिंग भी आसानी से हो जाएगा. अधिकारी ने बताया कि इसकी मांग सेबी रजिस्टरर्ड एनालिस्ट संदीप सबरवाल ने भी की थी.

क्या इंडिगो ने इरादतन अव्यवस्था फैलाई है?

इंडिगो

इंडिगो का क्राइसिस जबसे से शुरू हुआ है, खासकर सोशल मीडिया में इस तरह की चर्चा चल रही है कि इंडिगो ने जानबूझकर यह अव्यवस्था फैलाई ताकि उसे डीजीसीए के नियमों का पालन करने से छूट मिल जाए. इंडिगो कंपनी पर जो आरोप लगे हैं, उसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता है, क्योंकि इस अव्यवस्था से कंपनी को भारी नुकसान हुआ है. उसे यात्रियों के पैसे वापस करने पड़े हैं, उनके लिए अतिरिक्त व्यवस्था करवानी पड़ी है, इसलिए इंडिगो पर लगाया गया आरोप गलत और निरर्थक प्रतीत होता है. इंडिगो का शेयर प्राइस भी काफी गिर गया है.

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अव्यवस्था के पीछे का सच क्या है?

इंडिगो में जारी अव्यवस्था के पीछे FDTL  सबसे बड़ा कारण दिखता है. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारी ने बताया कि सबसे बड़ी वजह तो FDTL ही है. साथ ही ए320 विमानों में साॅफ्टवेयर और हार्डवेयर अपडेट का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है, इसकी वजह से एयरलाइंस को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि आज 6 दिसंबर को स्थिति काफी नियंत्रण में दिख रही और उम्मीद है कि इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने जैसा कहा है उसके अनुसार 10–15 दिसंबर तक स्थिति बिलकुल सामान्य हो जाएगी. इंडिगो ने स्थिति सुधारने के लिए नई नियुक्ति शुरू कर दी है और दूसरे एयरलाइंस से कुछ पायलट डेपुटेशन पर अपने यहां नियुक्त भी किए है, ताकि स्थिति में जल्दी से जल्दी सुधार किया जा सके.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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