मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर की हत्या के बाद उसी एके-47 से मुचकुंद करने वाला था कुख्यात पिंटू की हत्या
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Dec 2018 6:36 AM
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विजय सिंह पटना : एसटीएफ से मुठभेड़ में अगर मुचकुंद नहीं मारा गया होता, तो राजधानी में बहुत जल्द एक गैंगवार सामने आता. दरअसल मुचकुंद कुख्यात पिंटू सिंह की हत्या की स्क्रिप्ट लिख रहा था. जिस एके 47 से मुजफ्फरपुर में पूर्व मेयर समीर कुमार की हत्या हुई थी, उसी हथियार से अब पटना के […]
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विजय सिंह
पटना : एसटीएफ से मुठभेड़ में अगर मुचकुंद नहीं मारा गया होता, तो राजधानी में बहुत जल्द एक गैंगवार सामने आता. दरअसल मुचकुंद कुख्यात पिंटू सिंह की हत्या की स्क्रिप्ट लिख रहा था. जिस एके 47 से मुजफ्फरपुर में पूर्व मेयर समीर कुमार की हत्या हुई थी, उसी हथियार से अब पटना के कुख्यात पिंटू सिंह को निबटाने की तैयारी थी.
पिंटू के हत्या के लिए साजिश रचने की दो वजहें थीं. पहला मुचकुंद पिटू सिंह को निबटा कर पटना में अपना वर्चस्व कायम करना चाहता था. मुचकुंद जिस बिरादरी से आता है, उस बिरादरी के अपराधियों ने भी मुचकुंद का साथ देने का वाद किया था. दूसरी वजह शराब सप्लाई के पैसे को लेकर मुचकुंद और पिंटू में हुआ विवाद भी मुख्य वजह था.
दरअसल जब से शराबबंदी हुई है, तब से पेशेवर क्रिमिनलों ने शराब की बड़े पैमाने पर सप्लाई को अपनी आय का स्रोत बना रखा है. पिंटू सिंह पटना का पुराना रंगदार व कुख्यात अपराधी है. वह अभी फरार है, पुलिस उसकी तलाश में है. इस फरारी के दौरान पश्चिम बंगाल और झारखंड से शराब की बड़ी खेप पटना में लाना और उसे सप्लाई कराना पिंटू सिंह का मुख्य धंधा बन गया है.
इसके जरिये उसने काफी पैसा बनाया है. इसी शराब सप्लाई में पिंटू सिंह के साथ मुचकुंद गैंग ने भी पैसा लगाया है. कुछ समय तक दोनों ने मिल कर खूब सप्लाई करायी और पैसा बनाया. सूत्रों कि मानें, तो बाद में पिंटू के मन में बेईमानी आ गयी. शराब सप्लाई के लाखों रुपये पिंटू सिंह ने दबा लिये, जिसमें मुचकुंद और उसका गैंग हिस्सेदार था. इस बकाये ने दोनों के गैंग में दूरियां बढ़ा दीं. मुचकुंद अभी कम उम्र का था, जबकि पिंटू सिंह करीब 45 वर्ष का है.
हार्डिंग पार्क बस स्टैंड से शुरू हुई थी पिंटू की रंगदारी
पटना के पुराने हार्डिंग पार्क बस स्टैंड से कुख्यात पिंटू सिंह का उभार हुआ था. यहां बस वालों से रंगदारी वसूलने और उनके बस को सही सलामत चलवाने का ठेका पिंटू सिंह लेता था. यह काम शिव गोप, कुंदन सिंह, विनोद सिंह भी करते थे. चारों अपराधियों का वर्चस्व था.
बिरादरी के हिसाब से रंगदारी का ठेका इन अपराधियों के पास था. हालांकि बाद में कुंदन सिंह और विनोद सिंह के बीच ठन गयी थी. दोनों में गैंगवार हुआ था और विनोद सिंह की हत्या हो गयी थी. कुंदन सिंह का भगिना भी मारा गया था. जक्कनपुर थाना क्षेत्र में मीठापुर बी-एरिया का रहने वाला कुख्यात पिंटू सिंह और शिव गोप के बीच अदावत है. शिव गोप जमानत पर बाहर है, तो पिंटू सिंह फरार है. 11 जनवरी, 2018 को कुख्यात अपराधी पिंटू सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह की संपत्ति पर कानून का हथौड़ा चल चुका है.
कुख्यात पिंटू का रांची है ठिकाना : जक्कनपुर थाने में पिंटू सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. कई मामलों में ये जेल की हवा भी खा चुका है. लंबे समय से ये फरार है. पुलिस सोर्स की मानें तो रांची को इसने अपना ठिकाना बना रखा है. वहीं छिप कर रह रहा है. रांची में बैठ कर शराब का धंधा चला रहा है. वहीं से शराब की खेप को पटना भेज रहा है. शराब के धंधे में इसने अपना एक सिंडिकेट बना रखा है. पुलिस की मानें तो इस धंधे में रौशन नाम का उसका एकसाथी भी है.
ये रहे हैं पटना के चर्चित रंगदार
बिहार पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड के मुताबिक कुख्यात बिंदु सिंह, सुल्तान मियां, दुर्गेश शर्मा, गुड्डू शर्मा, धन्नु साह, शिव गोप, राजू गोप, पिंकू चौधरी, अजय वर्मा, पिंटू सिंह, चांद मियां और रिंटू सिंह जाने-माने रंगदार रहे हैं.
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