मुजफ्फरपुर : दिनकर ने सृजित की नयी परंपरा: मदन कश्यप
Updated at : 23 Sep 2018 10:21 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : दिनकर परंपरा का अनुकरण नहीं करते, बल्कि अपनी एक नयी परंपरा सृजित करते हैं. आज के संदर्भ में उनकी सबसे बड़ी विरासत मानवीय शक्ति की नहीं, विवेक की है. यह बातें प्रख्यात कवि व चिंतक मदन कश्यप ने कहीं. वे शनिवार को रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग की ओर से राष्ट्रकवि […]
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मुजफ्फरपुर : दिनकर परंपरा का अनुकरण नहीं करते, बल्कि अपनी एक नयी परंपरा सृजित करते हैं. आज के संदर्भ में उनकी सबसे बड़ी विरासत मानवीय शक्ति की नहीं, विवेक की है. यह बातें प्रख्यात कवि व चिंतक मदन कश्यप ने कहीं.
वे शनिवार को रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग की ओर से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘कवि दिनकर की विरासत’ विषयक एकदिवसीय संगोष्ठी में अतिथि वक्ता के रूप में बोल रहे थे.
कश्यप ने आज के संदर्भ में कालजयी कवि दिनकर की प्रासंगिकता व महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के विशिष्ट ‘राष्ट्रवाद’ के हो-हल्ला के दौर में दिनकर की ‘संस्कृति के चार अध्याय’ कृति और उसका समावेशी राष्ट्रवाद बार-बार याद आता है. उनका राष्ट्रवाद कोई एक भाषा, नस्ल, संप्रदाय व संस्कृति का राष्ट्रवाद नहीं है. उसमें सभी भाषा, नस्ल, समुदाय, संप्रदाय व संस्कृति के लिए जगह है.
आज दिनकर का समावेशी व विवेकी राष्ट्रवाद ही हमारे देश व समाज को अंधी व अज्ञानी लड़ाई के दौर में जाने व टूटने से बचा सकता है. अंत में श्रोताओं के अनुरोध पर उन्होंने अपनी ‘चाहतें’ शीर्षक कविता का पाठ भी किया.कार्यक्रम के शुरू में दिनकर की तस्वीर पर माल्यार्पण के बाद अतिथि वक्ता का पुष्पमाला व शाॅल से स्वागत प्राचार्य डॉ संजय ने किया. विभागाध्यक्ष साहित्यकार डॉ रमेश गुप्ता ने अतिथियों के साथ ही प्राचार्य व विभिन्न विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाओं का स्वागत किया. विषय-प्रस्तावना की कड़ी में दिनकर की विरासत को संक्षेप में बताते हुए उन्हें मानवीय-प्रेमिल समाज बनाने की दृष्टि से आज के संदर्भ में सबसे प्रासंगिक कवि बताया. अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ संजय ने महाभारत के आख्यान के संदर्भ में आज के धृतराष्ट्रों की अकर्मण्यता व संजयों की विवशता की ओर इशारा किया. कृष्ण की जरूरत पर भी बल दिया और सबको अपने भीतर के कृष्ण को जगाने की बात कही.
धन्यवाद ज्ञापन डॉ नीलिमा झा ने किया. संगोष्ठी में डॉ रामचंद्र सिंह, डॉ श्याम किशोर सिंह, डाॅ इंदिरा कुमारी, डॉ नीलम, डॉ संजय सुमन, डॉ सीएस राय, डॉ प्रदीप चौधरी, डॉ आलोक प्रताप सिंह, डॉ राम कुमार, डॉ जफर इमाम, डॉ प्रमोद कुमार, डॉ एमएन रजवी, डॉ मकबूल हुसैन, डॉ सुमनलता, प्रो श्रुति, प्रो राजेश चौधरी, डॉ ममता, डॉ कौशल मिश्रा आदि प्रमुख रहे.
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