पुलिस को अपनी जान बचाने के लिए लाठीचार्ज करनी पड़ी. हालात यह था कि लाठी और आंसू गैस की धमकी का भी उन पर कोई असर नहीं हुआ.
लेकिन पुलिस उनकी मांगों को नजरअंदाज करते हुए शव को उठा पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहती थी. पुलिस के इस प्रयास का खामियाजा भी भुगतना पड़ा. लोगों ने पथराव शुरू कर दिया. दो जवान घायल हुए तो पुलिस को बचाव में लाठी चार्ज करनी पड़ी. भीड़ तितर-बितर जरूर हुई. लेकिन फिर गोलबंद होकर विरोध करना शुरू कर दिया. देर शाम तक पुलिस व स्थानीय लोगों के बीच तकरार चलता रहा. कई बार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा. पुलिस लाठी और आंसू गैस के गोले का भय दिखाती रही. लेकिन अपने मांग के साथ वहां डटे लोग पुलिस के सारे पैंतरा का जवाब एकजुटता से देते रहें. अंत में पुलिस को पीछे हटना पड़ा. पूरी रात पुलिस वहां वेट और वाच की स्थिति में रही. लोग भी अपने संत जी के शव की सुरक्षा में डटे रहे. हालांकि देर रात पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

