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मन से भी सूक्ष्म आत्मा होती है, जो जीवन का अधार है : स्वामी निरंजनानंद

Updated at : 09 Jul 2025 7:04 PM (IST)
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मन से भी सूक्ष्म आत्मा होती है, जो जीवन का अधार है : स्वामी निरंजनानंद

संन्यास पीठ पादुका दर्शन में चल रहे गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम के चौथे दिन बुधवार को सद्गुरु गायत्री मंत्र पर अपनी व्याख्यान दे रहे थे

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मुंगेर योग विद्यालय के परमाचार्य स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि इस वर्ष की गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है. क्योंकि इसका प्रसाद है सद्गुरु गायत्री जो कि एक सिद्ध मंत्र है. यह गायत्री हमारे गुरु स्वामी सत्यानंद सरस्वती की योगभूमि, उनकी कर्मभूमि का विशेष प्रसाद है. वे बुधवार को संन्यास पीठ पादुका दर्शन में चल रहे गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम के चौथे दिन बुधवार को सद्गुरु गायत्री मंत्र पर अपनी व्याख्यान दे रहे थे. स्वामी निरंजनानंद ने कहा कि इस गायत्री का जो तीसरा भाग है तन्नो सद्गुरु प्रचोदयात्. जिसका अर्थ है कि सदगुरु हमें यह आशिर्वाद प्रदान करें कि हम आत्मशक्ति द्वारा शिवत्व को प्राप्त करे और सत्य का अरुसंधान करें. उन्होंने बताया कि मन का अनुभव हमारे अंदर बसे काम, क्रोध, मद आदि भावनाओं द्वारा होता है. परंतु मन से भी सूक्ष्म आत्मा होती है. वह आत्मा जो जीवन का आधार है. वह आत्मा जो दिव्य शक्ति है. जो हमें जीवन का अनुभव कराती है. स्वामी निरंजनानंद ने 11 जुलाई से प्रारंभ होने वाले चातुर्मास कार्यक्रम के बारे में संक्षेप में जानकारी दी. आश्रम के संन्यासियों द्वारा किये गये पाठ और मंत्रोच्चारण से पूरा परिसर गुंजायमान रहा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर-नारी मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIRENDRA KUMAR SING

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