एचडब्ल्यूसी परफॉरमेंस में पिछड़ा मुंगेर, लखीसराय व खगड़िया टॉप 2 में शामिल

Updated at : 05 Jun 2024 10:58 PM (IST)
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लखीसराय व खगड़िया टॉप 2 में शामिल

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मुंगेर. सरकार सुदूर गार्मीण क्षेत्रों तक सुलभ स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए न केवल सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में डेवलप कर रही है, बल्कि उसके संचालन और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिये करोड़ों रुपये भी खर्च कर रही है, लेकिन इसके बावजूद पांच जिलों का प्रमंडलीय जिला मुंगेर अपने ही प्रमंडल के जिलों से एचडब्ल्यूसी परफॉरमेंस में पिछड़ गया है. मार्च माह के स्टेट रैंकिंग में जहां मुंगेर तीसरे स्थान पर है. वहीं मुंगेर प्रमंडल का लखीसराय जिला पहले और खगड़िया जिला दूसरे स्थान पर है.

जिले में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कुल 179 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं. इसमें केवल 73 एचडब्ल्यूसी पर ही स्थायी सीएचओ नियुक्त हैं. जबकि 21 एचडब्ल्यूसी पर जीएनएम को ही सीएचओ का प्रभार दिया गया है. इतना नहीं शेष 158 एचडब्ल्यूसी पर 73 स्थायी सीएचओ को ही प्रभार दे दिया गया है. इनकी ड्यूटी सप्ताह में दो अलग-अलग एचडब्ल्यूसी पर लगायी जा रही है. जबकि शेष दिन स्थायी सीएचओ के एचडब्ल्यूसी का संचालन वहां नियुक्त एएनएम के भरोसे ही हो रहा है. अब ऐसे में मुंगेर जिला स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित एचडब्ल्यूसी पर मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत को खुद ही समझा जा सकता है.

19 इंडिकेटरों के परफॉरमेंस पर मिलती है रैंकिंग:

बता दें कि एचडब्ल्यूसी परफॉरमेंस में स्टेट रैंकिंग 19 इंडिकेटरों के आधार पर मिलती है. जिसमें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, जांच, दवाओं की उपलब्धता आदि शामिल है. इसके अतिरिक्त इन्क्वास रैंकिंग भी इसी 19 इंडिकेटरों के एसिसमेंट पर मिलती है. ऐसे में जहां पहले से ही मुंगेर जिले के 158 से अधिक एचडब्ल्यूसी प्रभार में चल रहे हैं. उसमें 19 इंडिकेटरों का पालन करना खुद स्वास्थ्य विभाग के लिए मुश्किल भरा है. इतना ही नहीं जिले के 17 एचडब्ल्यूसी पर अब स्वास्थ्य विभाग इन्क्वास की तैयारी शुरू करने जा रहा है. जो खुद स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी.

पिछले दिनों कई एचडब्ल्यूसी पर हुई है कार्रवाई:

मुंगेर स्वास्थ्य विभाग भले ही एचडब्ल्यूसी परफॉरमेंस के स्टेट रैंकिंग में तीसरा स्थान प्राप्त कर अपनी उपलब्धि साबित कर रहा हो, लेकिन बीते दिनों खुद स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण के दौरान जिले के कई एचडब्ल्यूसी न केवल बंद मिले थे, बल्कि कई एचडब्ल्यूसी पर सीएचओ व स्वास्थ्यकर्मी तक मौजूद नहीं थे. इसे लेकर कई एचडब्ल्यूसी पर कार्रवाई भी की गयी थी. अब ऐसे में स्टेट रैंकिंग की सच्चाई खुद ही समझी जा सकती है.

कहते हैं सिविल सर्जन:

सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि एचडब्ल्यूसी परफॉरमेंस में मुंगेर जिला का मार्च माह में एक स्थान का फायदा हुआ है. जनवरी के रैंकिंग में मुंगेर को चौथा स्थान मिला था. जबकि मार्च में तीसरा स्थान मिला है. उन्होंने बताया कि कुछ एचडब्ल्यूसी से शिकायतें मिल रही थी. जिसे लेकर समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचडब्ल्यूसी का निरीक्षण किया जा रहा है.

17 एचडब्ल्यूसी पर शुरू हुई है इन्क्वास की तैयारी

मुंगेर. बता दें कि जिन 17 एचडब्ल्यूसी पर इन्क्वास को लेकर तैयारी शुरू की गयी है. उसमें असरगंज प्रखंड का एचडब्ल्यूसी मासूमगंज, एचडब्ल्यूसी मकवा, बरियारपुर प्रखंड का एचडब्ल्यूसी कल्याणपुर नीरपुर, एचडब्ल्यूसी बरियारपुर बस्ती, धरहरा प्रखंड का एचडब्ल्यूसी शिवकुंड, एचडब्ल्यूसी महगामा, हवेली खड़गपुर का एचडब्ल्यूसी गालीमपुर, एचडब्ल्यूसी मंझगाय, एचडब्ल्यूसी हथिया, जमालपुर प्रखंड का एचडब्ल्यूसी इंद्ररूख पश्चिमी, एचडब्ल्यूसी इंद्ररूख पूर्वी, सदर प्रखंड का एचडब्ल्यूसी चरौन, एचडब्ल्यूसी हसनगंज, संग्रामपुर का एचडब्ल्यूसी सुपौर जमुआ, एचडब्ल्यूसी नवगांय, तारापुर का एचडब्ल्यूसी बिहमा तथा टेटियाबंबर प्रखंड का एचडब्ल्यूसी बनौली शामिल हैं.

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