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बदहाली : करोड़ों की संपत्ति, लाखों की आमदनी, फिर भी गौशाला में गौ वंश भूख व बीमारी से त्रस्त

करोड़ों की संपत्ति एवं लाखों की आमदनी वाली इस गौशाला कि वर्तमान ऐसा है कि न तो यहां गाय को रखने व चारा की समुचित व्यवस्था है

निगम का अभियान : आवारा पशुओं को जब्त कर रखा जायेगा गौशाला में

गौशाला प्रबंधन समिति : पहले पशुओं के रखने, देखभाल और पशु चारा की करें व्यवस्था

मुंगेर

नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर के आवारा पशुओं को पकड़ कर एवं जब्त कर पूरबसराय स्थित गौशाला में रखने की घोषणा के बाद एक बार फिर यह गौशाला चर्चा आ गया है. जो खुद वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहा है. करोड़ों की संपत्ति एवं लाखों की आमदनी वाली इस गौशाला कि वर्तमान ऐसा है कि न तो यहां गाय को रखने व चारा की समुचित व्यवस्था है और न ही इसकी देखरेख की सुदृढ़ व्यवस्था है. जो भी गाय अथवा बैल यहां आता है, भुख व प्यास के कारण बीमार होकर मौत के शिकार हो जाते हैं.

जर्जर है गौशाला का भवन, बूढे कंधे पर व्यवस्था की बागडोर

पूरबसराय गौशाला का इतिहास जितना समृद्ध है, उसका वर्तमान स्थिति काफी दयनीय है. जानकारी के अनुसार छह माह पूर्व यहां आधे दर्जन से अधिक गाय व बैल थी. लेकिन कई गाय की मौत के बाद यहां मात्र 2 गाय और 2 बैल रह गये थे. जबकि हाल ही में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने 4 बछड़ा और एक गाय कहीं से पकड़ कर यहां छोड़ गया. यानी यहां कुल पशुओं की संख्या 9 है. इन पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी बूढे कंधे पर है. विदित हो कि यहां वर्षों से केयरटेकर के रूप में मोती सिंह नामक व्यक्ति है, जो अब बूढे हो चले हैं. इनके कंधे पर ही यहां आने वाले पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी है. मोती सिंह बताते है कि गौशाला में सूखा चारा मात्र उपलब्ध है. हरा चारा की कोई व्यवस्था नहीं है. गौशाला में पशुओं को खुला रखा जाता है. जो पशु रखने के लिए शेड हैं वह भी काफी खंडहर में तब्दील हो चुका है. कुल मिलाकर कहा जाय तो यहां न तो पशुओं की सेवा सही से हो पाती और न ही खाना व उसके देख-भाल व रखरखाव की समुचित व्यवस्था है. जिसके कारण पशु बीमार है अथवा बीमार पड़ने के कारण दम तोड़ दे रही है.

करोड़ों की संपत्ति, लाखों की आमदनी, फिर भी स्थिति बदहाल

मुंगेर के पूरबसराय में आठ दशक पूर्व गौशाला की स्थापना की गयी थी. इसका इतिहास काफी समृद्ध रहा है और यह गौ वंश संरक्षण के क्षेत्र में सुर्खियों में रहा. लेकिन इसका वर्तमान काफी बदहाल है. जिससे इसका अस्तित्व खत्म हो रहा. ऐसा नहीं है कि गौशाला के पास संपत्ति की कमी है. जानकारों की माने तो रेलवे गुमटी नंबर-5 स्थित संत कबीर चौक एवं बांक मुख्य पथ के दक्षिण 2 एकड़ से अधिक की उपजाऊ जमीन है. इतना ही नहीं लक्ष्मीपुर मुंगेर वन क्षेत्र में 300 एकड़ जमीन है. पूरबसराय स्थित गौशाला पांच एकड़ में फैला हुआ है. आधी जमीन पर आज आलीशान डीएवी पब्लिक स्कूल का भवन बना हुआ है. जबकि गौशाला के मुख्य गेट के पास 19 दुकानें हैं. स्कूल और दुकान से प्रतिमाह लगभग एक लाख से अधिक भाड़ा गौशाला प्रबंध समिति को आती है. बावजूद स्थिति बदहाल है.

जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही तदर्थ समिति

जुलाई 2023 मेंं तत्कालीन पदेन अध्यक्ष सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार शहर के समाजसेवियों एवं बुद्धिजीवियों की बैठक बुलाई थी. जिसमें 12 सदस्यीय तदर्थ समिति के नाम का प्रस्ताव बुद्धिजीवियों द्वारा दिया गया, जिस पर सर्वसम्मति बनीं. गौशाला की नई तदर्थ समिति में पदेन अध्यक्ष एसडीओ, पदेन सदस्य जिला पशुपालन पदाधिकारी होते हैं. जबकि प्रभू दयाल सागर को सचिव, सौरभ निधि उपाध्यक्ष, प्रीतम सिंह सह सचिव, कृष्णा अग्रवाल कोषाध्यक्ष को बनाया गया. सदस्य के रूप शहर के कई बडे व्यवसायी, नेता व दिग्ग्जों को शामिल किया गया. लेकिन हालात यह रहा कि चुनाव कराना तो आज तक इसके व्यवस्थित संचालन को लेकर ठोस पहल नहीं की गयी.

कहती है मेयर

मेयर कुमकुम देवी ने कहा कि अभियान से पहले माईकिंग करा कर वैसे लोगों को जानकारी दी जा रही है जो अपने पशुओं को बाजार में आवारा घुमने के लिए छोड़ देते हैं. शहर में घुम रहे आवारा पशुओं को जब्त कर गौशाला में रखा जायेगा. जो लोग इन पशुओं को छुड़ाने आयेंगे उनसे जुर्माना वसूल किया जायेगा.

कहते हैं सचिव

गौशाला प्रबंध समिति के सचिव प्रभु दयाल सागर ने कहा कि यहां जब भी गाय मरती है, तब नगर निगम प्रशासन को 500 रुपया देकर जेसीबी मंगा कर गाय को इसी परिसर में दफनाया जाता है. अगर नगर निगम प्रशासन शहर में घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़ कर यहां रखती है तो निगम प्रशासन यहां पहले पशुओं के रखने के लिए शेड, पशु चारा, पशुओं की देखरेख के लिए केयर टेकर, पशुओं के चिकित्सकीय सुविधा की व्यवस्था करे.

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