चिंताजनक : दो माह में सात फीट नीचे खिसका भूजल स्तर, कई पंचायतों में बढ़ा जल संकट
Published by : RANA GAURI SHAN Updated At : 26 May 2026 5:36 PM
पीएचइडी की रिपोर्ट के अनुसार सदर प्रखंड के श्रीमतपुर और मय पंचायत की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है.
– सदर प्रखंड का श्रीमतपुर मय पंचायत की स्थिति सबसे खराब, गर्मी बढ़ने के साथ गहराया पानी का संकट वीरेंद्र कुमार, मुंगेरजिले में लगातार गिरते भूजल स्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पीएचइडी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई माह में जिले का अधिकतम भूजल स्तर 59.04 फीट दर्ज किया गया है, जबकि न्यूनतम स्तर 10.04 फीट रहा. रिपोर्ट बताती है कि बीते दो माह में यहां भूजल स्तर लगभग सात फीट नीचे चली गयी है, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर होने की आशंका है.
7 फीट नीचे खिसका भूजल स्तर, दो पंचायत की स्थिति खराब
विभागीय आंकड़ा पर नजर डालें तो अप्रैल 2025 में जिले का अधिकतम भूजल स्तर 50 फीट दर्ज किया गया था. वहीं मार्च 2026 में यह बढ़कर 52 फीट पहुंचा और अब मई 2026 में 59.04 फीट तक पहुंच गया है. भूजल स्तर में लगातार गिरावट यह संकेत दे रही है कि जमीन के अंदर पानी तेजी से नीचे जा रहा है. पीएचइडी की रिपोर्ट के अनुसार सदर प्रखंड के श्रीमतपुर और मय पंचायत की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है. वर्तमान में श्रीमतपुर पंचायत का भूजल स्तर 59.4 फीट तक पहुंच गया है, जबकि मय पंचायत में यह 51.6 फीट दर्ज किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से भूजल स्तर गिरता रहा तो आने वाले समय में चापाकल और निजी बोरिंग से पानी निकालना भी मुश्किल हो सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर हैंडपंपों का पानी कमजोर पड़ने लगा है.
भीषण गर्मी, भूजल दोहन और कम वर्षा बनी वजह
जानकारों के अनुसार लगातार बढ़ती गर्मी, कम वर्षा, अंधाधुंध भूजल दोहन और जल संरक्षण की कमी भूजल स्तर गिरने का मुख्य कारण है. जिले में बड़ी संख्या में निजी बोरिंग और मोटर पंप के उपयोग से भूमिगत जल तेजी से खींचा जा रहा है. दूसरी ओर वर्षा जल संचयन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से जमीन के अंदर पानी का पुनर्भरण नहीं हो पा रहा है.
जल संरक्षण को लेकर प्रशासन पर बढ़ी जिम्मेदारी
भूजल स्तर में लगातार गिरावट के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा जल संचयन, तालाबों का संरक्षण, जलस्रोतों की सफाई और पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाने जैसे उपायों को गंभीरता से लागू करने की जरूरत है.यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले महीनों में जिले के कई इलाकों में पेयजल संकट और गहरा सकता है.
कहते हैं कार्यपालक अभियंता
पीएचइडी विभाग के कार्यपालक अभियंता अभिषेक रंजन ने बताया कि जलस्तर जरूर नीचे खिसक रहा है. लेकिन जिले में अभी जल संकट की समस्या उत्पन्न नहीं हुई है. अगर जल संकट उत्पन्न होती है, तो उसके लिए पीएचईडी विभाग ने तैयारी कर रखी है.
———————————————मुंगेर जिले का वर्तमान भूजल स्तर (पीएचईडी रिपोर्ट)प्रखंड औसत भूजल स्तर (फीट)
असरगंज 20.06बरियारपुर 23.21धरहरा 21.39जमालपुर 24.36
खड़गपुर 16.77मुंगेर सदर 28.81संग्रामपुर 20.84तारापुर 20.72
टेटिया बंबर 26.86——————————————-जिले की स्थिति
अधिकतम भूजल स्तर – 59.04 फीटन्यूनतम भूजल स्तर- 10.04 फीटऔसत भूजल स्तर – 22.13 फीटप्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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