'संसार जिसे ठुकराता है, भगवान उसे अपनाते हैं', विष्णु महायज्ञ में बोले स्वामी कूरेशाचार्य

Updated at :12 May 2026 12:30 PM
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'संसार जिसे ठुकराता है, भगवान उसे अपनाते हैं', विष्णु महायज्ञ में बोले स्वामी कूरेशाचार्य

श्रीमद भागवत कथा में ध्रुव प्रसंग

मुंगेर के हवेली खड़गपुर में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान स्वामी कूरेशाचार्य जी महाराज ने ध्रुव प्रसंग से भक्तों को भावविभोर कर दिया. उन्होंने संदेश दिया कि सांसारिक मोह त्यागकर ईश्वर की शरण में जाने वाला जीव ही वास्तविक सुख और शांति प्राप्त करता है.

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हवेली खड़गपुर मुंगेर से रतन झा की रिपोर्ट: नगर के डीएवी पब्लिक स्कूल के पीछे नया टोला में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ में इन दिनों आस्था का जनसैलाब उमड़ रहा है. महायज्ञ को लेकर पूरा क्षेत्र वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान है. इस अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां विद्वान कथावाचक भक्ति और ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं.

जगत की ठोकर ही जगदीश की ओर ले जाती है

महोत्सव के दौरान अवध धाम से पधारे श्रीमज्जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी कूरेशाचार्य जी महाराज ने ध्रुव प्रसंग की विस्तृत व्याख्या की. उन्होंने भावपूर्ण संबोधन में कहा कि जब इंसान को संसार से तिरस्कार मिलता है, तभी वह ईश्वर की वास्तविक शरण में जाता है. महाराज जी ने कहा, “भगवान उसी को अपनाते हैं जिसे संसार ठुकरा देता है. मनुष्य जब तक अहंकार और सांसारिक मोह में उलझा रहता है, वह ईश्वर से दूर रहता है, लेकिन जगत की ठोकर ही जीव को जगदीश की ओर ले जाती है.” उन्होंने इसे भगवान की विशेष कृपा का संकेत बताया.

सांख्य शास्त्र और भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण

स्वामी जी ने कपिलोपाख्यान के माध्यम से सांख्य शास्त्र के गूढ़ उपदेशों को अत्यंत सरल और प्रेरणादायी ढंग से श्रद्धालुओं के समक्ष रखा. कथा के बीच-बीच में आयोजन के संयोजक और प्रसिद्ध लोक-भजन गायक अमर ज्योति अनुज ने अपने सुरीले भजनों से समां बांध दिया. उनके भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा वातावरण दिव्य अनुभूति से भर गया.

वैदिक विधान से संपन्न हो रहा अनुष्ठान

श्री विष्णु महायज्ञ का कर्मकांड काशी के यज्ञाचार्य अमित शास्त्री जी महाराज और व्यवस्थापक समित शास्त्री जी महाराज के सानिध्य में पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया जा रहा है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु यज्ञशाला की परिक्रमा कर पुण्य के भागी बन रहे हैं. आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय समिति के सदस्य और श्रद्धालु दिन-रात सक्रिय योगदान दे रहे हैं.

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