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वाह रे सिस्टम : 23 भिक्षुक पर 20 कर्मचारी, सड़कों पर भीख मांगने भटक रहे भिखमंगे

सेवा कुटीर पहुंचाने से लेकर उसे निःशुल्क भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा सुविधा, परामर्श, मनोरंजन और योग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना है.

मुंगेर

मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत जिला मुख्यालय में सेवा कुटीर ( पुरुष भिक्षुक पुनर्वास गृह) खोला गया है. ताकि भिक्षुकों को भीख मांगने की प्रवृत्ति से निकालकर आश्रय, भोजन, चिकित्सा, शिक्षा और स्वरोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके. लेकिन मुंगेर शहर में आज भी बेघर और असहाय भिखारी सड़क पर भीख मांगने के लिए भटक रहे और सेवा कुटिर में कर्मचारी आराम फरमा रहे.

23 भिक्षुकों पर 20 कर्मचारी, नहीं मिल रही सुविधा

कासिम बाजार थाना क्षेत्र के निर्दोष काली मंदिर कॉलोनी में सेवा कुटीर पुरुष भिक्षुक पुनर्वास गृह वर्षों से जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग की देख-रेख में संचालित हो रहा है. 50 बेड वाले इस सेवा कुटीर में भिक्षुकों की देख-भाल के लिए एचआर एजेंसी द्वारा मानवबल आपूर्ति किया गया. जिसकी जिम्मेदारी शहर में घूम-घूम कर भिक्षुकों को खोजना और उनकी सहमति पर उन्हें सेवा कुटीर पहुंचाने से लेकर उसे निःशुल्क भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा सुविधा, परामर्श, मनोरंजन और योग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना है. शिक्षा, स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जाना है. लेकिन मुंगेर में यह योजना अपने उद्देश्य से भटक गयी है. जबकि सिस्टम संचालित करने के लिए यहां अधीक्षक सहित कुल 20 कर्मचारियों पर लाखों रूपये मानदेय पर खर्च किया जा रहा है. जबकि भिक्षुकों के सेवा सत्कार पर भी प्रतिवर्ष लाखों खर्च किये जा रहे. लेकिन आज भी मुंगेर के कष्टहरणी घाट, बबुआ घाट, सोझी घाट, किला के अंदर, किला के मुख्य द्वार के समाने पुल पर सहित शहर की सड़कों पर भिक्षुक भीख मांगने के लिए भटक रहे हैं. जिसमें कई विकलांग है तो कोई को आवासन की कोई व्यवस्था नहीं है. जो दिन भर भीख मांगते है और रात में फुटपाथ, सरकारी कार्यालय, मंदिर, मस्जिद के बरामदे पर रात गुजारते हैं. लेकिन सेवा कुटीर के संचालक को ऐसे भिखारी दिखायी नहीं देते. संचालकों की माने तो यहां वर्तमान समय में 23 भिक्षुक है, जिसकी सेवा में 20 कर्मचारी तैनात है. यहीं है सिस्टम.

बना रखा है प्रतिबंधित क्षेत्र

लगातार शिकायत मिल रही थी कि सेवा कुटीर के नाम पर यहां बड़ा खेल हो रहा है. एक बड़ी राशि की गड़बड़ी हो रही है. लेकिन आम लोग इसकी जानकारी नहीं ले सकते, क्योंकि स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार यह प्रतिबंधित क्षेत्र है. इस संदर्भ में जब सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक से बात किया गया, तो उन्होंने कहा कि कुछ भी जानकारी चाहिए तो पहले कार्यालय आए. जब प्रभात खबर की टीम कार्यालय पहुंची तो वहां अधिकारी खुद ही नदारत थे. अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंदर और कागज पर क्या खेल हो रहा है.

कहते हैं अधिकारी

जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक राजीव रंजन ने बताया कि वहां जाने से पहले आपको कार्यालय में आकर आदेश लेना है. जब जरूरत महसूस होगी तभी आपको अंदर जाने दिया जायेगा. क्योंकि यह प्रतिबंधित क्षेत्र है.

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स्वरोजगार का प्रशिक्षण तो दूर, पुनर्वास की बात बेकार

मुंगेर : बिहार सरकार ने भिक्षावृत्ति के उन्मूलन और भिक्षुकों को सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत अब भिक्षुक केवल आश्रय और भोजन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की योजना संचालित कर रही है. जिसके तहत भिक्षुक को स्वरोजगार के लिए अगरबत्ती, जूते-चप्पल, दीया-बाती, नारियल झाड़ू सहित अन्य तरह का प्रशिक्षण दिया जाना है. विदित हो कि इन पुनर्वास गृहों में वृद्ध, दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम भिक्षुकों के साथ ही, बिछुड़े हुए भिक्षुकों को उनके परिवार से जोड़ने का भी प्रयास करना है. लेकिन सेवा कुटीर में कार्यरत कर्मी और सामाजिक सुरक्षा कोषांग की ओर से कोई जानकारी साझा नहीं की गयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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