गंगा में गाद की समस्या का होगा निदान : उमा भारती

Published at :02 Jun 2017 1:58 AM (IST)
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गंगा में गाद की समस्या का होगा निदान : उमा भारती

मुंगेर : केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा है कि गंगा में गाद की समस्या का केंद्र सरकार अध्ययन कर रही है और इसका निदान निकाला जायेगा. साथ ही फरक्का के मामले में विशेषज्ञ टीम यह जांच करेगी कि गाद के लिए फरक्का बराज कितना जिम्मेदार है. वे गुरुवार को मुंगेर के उत्तरवाहिनी […]

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मुंगेर : केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा है कि गंगा में गाद की समस्या का केंद्र सरकार अध्ययन कर रही है और इसका निदान निकाला जायेगा. साथ ही फरक्का के मामले में विशेषज्ञ टीम यह जांच करेगी कि गाद के लिए फरक्का बराज कितना जिम्मेदार है. वे गुरुवार को मुंगेर के उत्तरवाहिनी गंगा तट सोझीघाट में आयोजित गंगा चौपाल कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि गंगा में गाद की समस्या है. खास कर यूपी, बिहार और झारखंड इस गाद के कारण हर वर्ष आनेवाली बाढ़ से प्रभावित हो रही है. इसके निदान के लिए केंद्र सरकार काम कर रही है.

सिर्फ बातों से नहीं लिया जा सकता निर्णय : फरक्का बराज की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियर इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि गंगा में गाद के लिए फरक्का बराज कितना जिम्मेदार है. पूरे मामले के अध्ययन के बाद ही केंद्र सरकार इस पर निर्णय लेगी. सिर्फ बातें कहने से निर्णय नहीं लिया जा सकता. उन्होंने एक खोटी चवन्नी की कहानी सुनाते हुए परोक्ष रूप से फरक्का बराज पर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा उठाये जा रहे सवाल को थोथी दलील बताया.
गंगा के जमीन का होगा सर्वे : उमा भारती ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गंगा के जमीन का सर्वे कराया जायेगा.
गंगा में गाद…
क्योंकि बड़ी संख्या में गंगा के जमीन पर बसावट हुई है. वैसे लोगों को बताया जायेगा कि आप गंगा के जमीन पर कब्जा जमाये हुए हैं. अब और गंगा के जमीन का अतिक्रमण नहीं करें. अब गंगा अपनी जमीन का अधिकार प्राप्त करेगी.
60 साल में गंगा हो गयी बरबाद
हजारों साल से गंगा स्वच्छ और निर्मल थी. लेकिन पिछले 60 सालों में गंगा के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गयी. इसके कारण गंगा बरबाद हो गयी. पिछली सरकार द्वारा किये गये गलत कार्यों का हम गंगा नमामि योजना चला कर प्रायश्चित कर रहे हैं. सरकार और उसके तंत्र तो गंगा को पुन: निर्मल और स्वच्छ बनाने का काम कर रही है. लेकिन इसमें जनता की भागीदारी जरूरी है. गंगा को जनता ही बचा सकती है. गंगा का भूत, वर्तमान और भविष्य जनता पर ही निर्भर करती है.
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