लावारिस शवों का अंतिम क्रिया करता है शाश्वत

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1 मार्च 2013 को हुई थी स्थापना अबतक 243 लावारिस लाशों का किया अंतिम संस्कार गंगा सफाई अभियान का भी दे रहा संदेश मुंगेर : लगातार पिछले तीन वर्षों से लावारिस लाशों को अंतिम संस्कार कर रहा मुंगेर का शाश्वत संस्कार. 1 मार्च 2013 को स्थापित इस संस्था ने अबतक 243 लावारिस लाशों का अंतिम […]

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1 मार्च 2013 को हुई थी स्थापना

अबतक 243 लावारिस लाशों का किया अंतिम संस्कार
गंगा सफाई अभियान का भी दे रहा संदेश
मुंगेर : लगातार पिछले तीन वर्षों से लावारिस लाशों को अंतिम संस्कार कर रहा मुंगेर का शाश्वत संस्कार. 1 मार्च 2013 को स्थापित इस संस्था ने अबतक 243 लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया है और सात मामलों में लावारिस शवों की पहचान कर परिजनों को बताया है.
कैसे हआ संस्थान का गठन
अस्पतालों में आये दिन लावारिस लाशों का आना लगा रहता था. जिसका अंतिम संस्कार तो नहीं होता था. उल्टे उसे गंगा में फेंक दिया जाता था. कोतवाली थाना में पदस्थापित एएसआइ चंद्रिका प्रसाद उस समय अस्पताल की ओडी ड्यूटी के लिए तैनात था. फरवरी 2013 में दुर्घटना में मृत एक लावारिस शव पहुंचा. जब पोस्टमार्टम के बाद शव को ठिकाने लगाने की बात आयी तो कोई संस्था सामने नहीं आया. चंद्रिका प्रसाद ने अपनी व्यथा दवा दुकान संचालक सह समाजसेवी अमरनाथ प्रसाद ललन एवं समाज सेवी राकेश मंडल के समक्ष रखी. इन लोगों ने तत्काल ही शव के दाह संस्कार पर खर्च होने वाले राशि मुहैया कराया. तीनों ने कुछ लोगों के साथ मिल कर उस शव का अंतिम संस्कार किया.
कुछ दिनों बाद शाश्वत संस्कार संस्था का गठन किया.
243 शवों का किया अंतिम संस्कार : अस्पताल में आने वाले लावारिस लाशों के दाह संस्कार का सिलसिला जो प्रारंभ हुआ. वह आज तक चलता आ रहा है. कल जिन लाशों को गंगा में फेंक दिया जाता था. पोस्टमार्टम हाउस के पीछे खाई में फेंक दिया जाता है. आज वैसे लाशों को यह संस्थान सम्मान देने का काम कर रही है. अब तक 243 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर संस्था ने उसे सम्मान दिया.
गंगा सफाई अभियान का दे रहा संदेश : अमरनाथ प्रसाद ललन, राकेश मंडल ने बताया कि गंगा में लाशों को फेंकने से गंगा गंदी हो रही थी. संस्थान सिर्फ लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करना ही नहीं बल्कि गंगा सफाई पर भी ध्यान देना है. हमलोगों ने घाट प्रहरी बनाया है जो गंगा में बहने वाले शवों पर नजर रखती है और उसे बाहर निकाल कर उसका भी दाह संस्कार करती है. ताकि आम लोगों में गंगा सफाई के प्रति ध्यान आकर्षित किया जा सके.
अब तो मिलने लगी सरकारी सहायता : वर्ष 2015 से कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत 1500 रुपये दिया जाने लगा. एक शव के दाह संस्कार पर लगभग 3000 रुपये खर्च होता है. बांकी के रुपये संस्था के लोग लगाते थे. इधर इस योजना के तहत निगम द्वारा 3000 रुपया उपलब्ध कराया जाता है. जिससे काफी राहत मिली है.
तीसरा स्थापना दिवस आज : उत्तर वाहिनी गंगा तट कष्टहरणी घाट पर शाश्वत संस्कार संस्थान का तीसरा स्थापना दिवस 1 मार्च मंगलवार को मनाया जा रहा है. सुबह में जहां गंगा घाट पर प्रार्थना सभा व लावारिस मृत आत्मा की शांति के लिए हवन कार्यक्रम आयोजित की जायेगी. साथ ही प्रसाद का वितरण किया जायेगा.
जबकि गंगा की सुरक्षा विषय पर एक सेमिनार आयोजित की जायेगी. संस्थान द्वारा शाश्वत प्रहरी सम्मान, घाट प्रहरी सम्मान, मृत आत्मा मुक्ति सम्मान एवं विशेष योगदान के लिए सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी चंद्रिका प्रसाद को सम्मानित किया जायेगा.
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