तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल : यहां रोगियों को थमायी जाती है रेफर की परची

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तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल : यहां रोगियों को थमायी जाती है रेफर की परची फोटो संख्या : 22फोटो कैप्सन : मालवाहक वाहन पर मरीज को लादते परिजन प्रतिनिधि : तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल तारापुर में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहाल है. यहां न तो चिकित्सक समय पर पहुंचते हैं और न ही कर्मचारी. यहां सिर्फ प्राथमिक उपचार […]

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तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल : यहां रोगियों को थमायी जाती है रेफर की परची फोटो संख्या : 22फोटो कैप्सन : मालवाहक वाहन पर मरीज को लादते परिजन प्रतिनिधि : तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल तारापुर में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहाल है. यहां न तो चिकित्सक समय पर पहुंचते हैं और न ही कर्मचारी. यहां सिर्फ प्राथमिक उपचार किया जाता है. अधिकांश रोगियों को रेफर का परचा थमा कर चिकित्सक अपने कर्तव्य का इतिश्री कर लेते. शनिवार को भी जब लहुलुहान कंचन देवी को अस्पताल लाया गया तो उसे भी इलाज के बदले सिर्फ रेफर का परचा थमा दिया गया. जबकि उसे अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था. फलत: भागलपुर के रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी. शनिवार को पड़भारा गांव निवासी संजय सिंह अपनी पत्नी कंचन देवी को कुदाल से प्रहार कर घायल कर दिया. जिसे इलाज के लिए पुलिस रेफरल अस्पताल तारापुर लाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने महिला के साथ आये पुलिसकर्मी को रेफर की परची थामा कर पल्ला झाड़ लिया. परिजन यहीं अस्पताल में इलाज के लिए गुहार लगाते रहे पर चिकित्सक के कान पर जू तक नहीं रेंगा. भागलपुर ले जाने के लिए निकले. लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी. परिजनों ने लगाया आरोप परिजनों ने आरोप लगाया कि तारापुर अस्पताल के चिकित्सक अगर अपना फर्ज निभाते हुए इलाज करते तो शायद महिला की जान बच जाती. परिजनों ने बताया कि कुदाल के प्रहार से महिला बुरी तरह जख्मी हो गयी थी. जिसके कारण अत्यधिक रक्तश्राव हो रहा था. लेकिन उसे रोकने का प्रयास नहीं किया और रेफर टू भागलपुर का परचा थमा दिया. प्रसिद्ध चिकित्सक हैं यहां तैनात तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल में कई ऐसे चिकित्सक हैं जिनकी क्लिनिक खूब चलती है. ये अस्पताल कब आते और जाते हैं इसे देखने वाला कोई नहीं है. लेकिन यह अस्पताल में रोगियों का इलाज नहीं करते. अस्पताल प्रबंधन का भी इस पर नियंत्रण नहीं है. एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं शनिवार को कंचन देवी जिंदगी और मौत से जूझ रही थी. चिकित्सक के कहने पर कर्मी ने बैंडेज कर दिया और स्लाइन लगा कर छोड़ दिया. रेफर होने पर जब अस्पताल के प्रभारी से एंबुलेंस के लिए मिला गया तो उन्होंने कहा कि दूसरे मरीज को लेकर एंबुलेंस गया हुआ है. लगभग सावा घंटा तक खून रिसता रहा और महिला यू ही पड़ी रही. मामला था कि आखिर कौन इलाज का खर्च उठायेगा. ऐसी स्थिति से निबटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक अस्पताल उपाधीक्षक डॉ आरपी भगत ने कहा कि अस्पताल में जो सुविधा है उसका तुरंत उपयोग किया गया. इससे ज्यादा यहां संभव नहीं है.

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