बोलती आखों ने जिसे बनाया अपने दौर की सर्वश्रेष्ठ हीरोइन

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बोलती आखों ने जिसे बनाया अपने दौर की सर्वश्रेष्ठ हीरोइन अभिनेत्री साधना के निधन पर शोक सभा प्रतिनिधि. मुंगेर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के निधन पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया. जिसे साहित्यकार, फिल्म समीक्षकों ने दो मिनट का मौन रख कर मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की. फिल्म […]

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बोलती आखों ने जिसे बनाया अपने दौर की सर्वश्रेष्ठ हीरोइन अभिनेत्री साधना के निधन पर शोक सभा प्रतिनिधि. मुंगेर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के निधन पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया. जिसे साहित्यकार, फिल्म समीक्षकों ने दो मिनट का मौन रख कर मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की. फिल्म समीक्षक सह साहित्यकार मधुसूदन आत्मीय ने कहा कि वैजयंती माला, वहीदा रहमान, नूतन जैसे सशक्त नायिकाओं के स्थापित रहने की स्थिति में साधना ने अपनी पहचान बनायी. एक मुसाफिर एक हसीना, हम दोनों और दुल्हा-दुल्हन फिल्मों में अपने अपूर्व बोल्ड, शर्म ओ हया एवं रुमानियत वाले अभिनय से दर्शकों को चमत्कृत कर साधना ने समकालीन अभिनेत्रियों को चुनाक्ती दी. उसकी बोलती आंखों की जादू, वह कौन थी, मेरे महबूब, आरजू, अनिता, मेरा साया, राजकुमार जैसे फिल्मों के माध्यम से नंबर के आसन पर बैठा दिया. उसकी बेजोड़ अभिनय कला ने साधना युग प्रतिष्ठापित किया. मौके पर अलख निरंजन कुशवाहा, अजय किशोर सिन्हा, सोनाली, रवीना, आकृति राय, जेबा व रूखसार परवीन, खुशबू , साक्षी सिन्हा ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये.

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