उदासीनता : गंदगी के बीच बेकार पड़ा है रैन बसेरा

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उदासीनता : गंदगी के बीच बेकार पड़ा है रैन बसेरा फुटपाथ पर इस ठंड में रहते हैं महादलित, बंद पड़ा है रैन बसेरा फोटो संख्या : 1,2फोटो कैप्सन : गंदगी के बीच बंद पड़ा रैन बसेरा व झुग्गी बना कर रहने वाले महादलित परिवार प्रतिनिधि, मुंगेर फुटपाथ पर रहने वाले दलित-महादलित परिवारों के लिए लाखों […]

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उदासीनता : गंदगी के बीच बेकार पड़ा है रैन बसेरा फुटपाथ पर इस ठंड में रहते हैं महादलित, बंद पड़ा है रैन बसेरा फोटो संख्या : 1,2फोटो कैप्सन : गंदगी के बीच बंद पड़ा रैन बसेरा व झुग्गी बना कर रहने वाले महादलित परिवार प्रतिनिधि, मुंगेर फुटपाथ पर रहने वाले दलित-महादलित परिवारों के लिए लाखों खर्च कर शहर में रैन बसेरा बनाये गये और शौचालय, पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी. लेकिन इसकी बदहाली यह है कि आज खुले आसमान के नीचे, झुग्गी-झोपड़ी व प्लास्टिक लगा इस ठंड के मौसम में जीवन जी रहे परिवार को रैन बसेरा उपलब्ध नहीं हो रहा.क्या है रैन बसेरा शहरी क्षेत्र में रहने वाले गरीब दलित-महादलित परिवार जिनके पास रहने को जगह नहीं है उनके लिए रैन बसेरा का निर्माण कराया गया. जहां लोगों को पेयजल, शौचालय की व्यवस्था की जानी है. साथ ही ठंड में वहां रहने वालों को कंबल एवं अलाव की व्यवस्था दी जानी है. कंबल शाम होते ही दिया जाना है और सुबह उसे पुन: वापस लेने का नियम है. लेकिन मुंगेर शहर में दो स्थानों पर बना रैन बसेरा पूरी तरह सुविधाविहीन है और हाल यह है कि इसकी बदहाली के कारण फुटपाथ पर जिंदगी बिताने वाले लोग भी नहीं रहते. रैन बसेरा की खस्ता हालत शहर में दो स्थानों पर रैन बसेरा है. एक रैन बसेरा लाल दरवाजा मछली तालाब के समीप है तो दूसरा बस स्टैंड में बना हुआ है. दोनों रैन बसेरा की हालत खस्ता है. मछली तालाब के समीप बने रैन बसेरा में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है. जिसके कारण महादलित वहां नहीं रहते हैं. इतना ही नहीं यह रैन बसेरा शराबियों, जुआरियों और अपराधियों का अड्डा बन गया है. जबकि दबंगों ने अपने पशु के लिए उसे तबेला का रूप दे दिया है. नगर निगम प्रशासन ने टैक्सी स्टैंड में भी एक रैन बसेरा बनाया है. लेकिन रखरखाव के अभाव में यह भूत बंगला हो गया. यहां शौचालय एवं समरसेबल लगाया. प्याऊ का भी निर्माण कराया लेकिन शौचालय में ताला लगा हुआ है. जबकि प्याऊ बंद पड़ा हुआ है. रैन बसेरा के समीप लोग शौच करने लगे हैं. जिसके कारण वह रहने लायक नहीं रह गया है. कहते हैं महादलित रैन बसेरा के समीप जग्गू मल्लिक, कैलाश मल्लिक, मनोहर मल्ल्कि, बिक्की मल्लिक, रामजाने मल्लिक, मोहन मल्लिक, विदेशी मल्लिक, राम मल्लिक, महेंद्र मल्लिक, दुलारी देवी, रतनी देवी सहित अन्य ने बताया कि जब से रैन बसेरा बना है तब से बंद है. न तो समरसेबल से पानी ही निकलता है और नही शौचालय का दरवाजा खुला है. रैन बसेरा में ताला लटका है. जिसके कारण हमलोग खुले में शौच जाने को विवश हैं. यहां 30 परिवार रहते हैं जिसके लिए मात्र एक चापाकल ही सहारा है. कहते हैं अधिकारीनगर आयुक्त प्रभात कुमार सिन्हा ने कहा कि रैन बसेरा की साफ-सफाई की जायेगी. निगम के पास कंबल भी उपलब्ध है. जरूरतमंदों का इसका लाभ दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि मछली तालाब के समीप बने रैन बसेरा को भी अतिक्रमण मुक्त कराया जायेगा.

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