भारतीय संविधान की कलाकृति आचार्य नंदलाल बसु की देन

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भारतीय संविधान की कलाकृति आचार्य नंदलाल बसु की देन नंदलाल बसु के जन्मदिन पर विशेष फोटो संख्या : 4 फोटो कैप्सन : आचार्य नंदलाल बसु आनंद कौशिक, हवेली खड़गपुर ———————–चित्रकला जगत के ख्याति प्राप्त आचार्य नंदलाल बसु कला जगत के महान हस्ताक्षरों में एक है. देश और दुनिया में अपनी उत्कृष्ट पहचान बनाने वाले आचार्य […]

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भारतीय संविधान की कलाकृति आचार्य नंदलाल बसु की देन नंदलाल बसु के जन्मदिन पर विशेष फोटो संख्या : 4 फोटो कैप्सन : आचार्य नंदलाल बसु आनंद कौशिक, हवेली खड़गपुर ———————–चित्रकला जगत के ख्याति प्राप्त आचार्य नंदलाल बसु कला जगत के महान हस्ताक्षरों में एक है. देश और दुनिया में अपनी उत्कृष्ट पहचान बनाने वाले आचार्य बसु का जन्म 3 दिसंबर 1882 ई में एक बंगाली परिवार में हुआ था. वे जहां शांति निकेतन के कला गुरु रहे वहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से भी जुड़े रहे. उनके कला की उत्कृष्टता की सबसे बड़ी पहचान यह है कि भारतीय संविधान के मूल दस्तावेज की कलाकृति उन्होंने ही की थी. मां की प्रेरणा ने जगायी कला आचार्य नंदलाल के पिता पूर्णचंद बोस दरभंगा तहसील के व्यवस्थापक थे. जबकि मां क्षेत्रमणि देवी धार्मिक संस्कारों से युक्त महिला थी. बसु मां की प्रेरणा से प्रेरित होकर बचपन से ही कला में अपने आपको समर्पित कर दिया. वे आठ वर्ष के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया. मां की मृत्यु से आहत बसु अपने खालीपन को प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य से पाटने की कोशिश में जुट गये और प्रकृति के सुरम्य स्थल खड़गपुर झील, मणी नदी, धान के लहलहाते खेत, पशु-पक्षी, झरना ने उनकी कलात्मक रुचि ने उनके जीवन को नया मोड़ दिया. पढ़ाई में रुचि कम, कला में ज्यादा उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में हुई थी. लेकिन पढ़ाई में कम कला में ज्यादा रुचि रखते थे. वे कला की दुनिया में ही अपना जीवन बिताना शुरू कर दिये. 15 वर्ष की अवस्था में उच्च शिक्षा के लिए उन्हें कोलकाता भेज दिया गया. लेकिन वे कोलकाता से पढ़ाई छोड़ कर खड़गपुर चले आये. कौन-कौन सी कला कृतियां थी खास बसु के चित्रों में भारतीय इतिहास एवं संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है़ उनके बनाये चित्रों में सिद्धार्थ प्रकाश, कृष्णा, शिव, भीष्म पितामह, दुर्गा को विशेष ख्याति मिली. सती उनकी सवोत्कृष्ट कलाकृति में प्रमुख थी. जिन्होंने देश-विदेश में काफी ख्याति अर्जित की. इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरियेंटल आर्ट द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में बसु की कला को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया. वे चीन, जापान, वर्मा, श्रीलंका, मलाया सहित विभिन्न देशों की भी यात्रा की. इस दौरान उन्होंने भारतीय चित्रकला एवं विदेशी चित्रकला में निहित तत्वों का बारीकी से अध्ययन किया़गांधी जी के मित्र थे बसु आचार्य बसु गांधीजी के आत्मीय मित्र थे़ गांधी आश्रम की दीवार पर बुद्घ और घायल मेमने की कलाकृति आज भी सुरक्षित है़ 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में मंडपों को कलात्मक रूप से सजाने के उपरांत गांधी जी ने बसु की काफी तारी भी की थी और गांधी जी के साथ उनके जीवन प्रसंग भी जुड़े हैं.

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