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लापरवाही: 4782 चापानल हैं खराब, कैसे बुङोगी प्यास

मुंगेर: बढ़ती गरमी के साथ ही जिले में पेयजल समस्या गहरा गया है. प्यास बुझाने के लिए शहर से लेकर गांव तक चापाकल व प्याऊ लगाये गये हैं. लेकिन वह भी लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है. क्योंकि आधे से अधिक प्याऊ व चापाकल जहां खराब पड़े हैं. वहीं कइयों पर दबंगों का […]

मुंगेर: बढ़ती गरमी के साथ ही जिले में पेयजल समस्या गहरा गया है. प्यास बुझाने के लिए शहर से लेकर गांव तक चापाकल व प्याऊ लगाये गये हैं. लेकिन वह भी लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है. क्योंकि आधे से अधिक प्याऊ व चापाकल जहां खराब पड़े हैं. वहीं कइयों पर दबंगों का कब्जा है.
जिले में खराब पड़े है 4782 चापाकल
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की माने तो विभिन्न मदों से जिले में 14 हजार 400 चापाकल लगे हुए हैं. जिसमें 4 हजार 782 चापाकल खराब पड़े हुए है. विभाग का कहना है कि खराब पड़े चापाकल ऐसे है. जिसने अपना आयु पूरा कर लिया है. अब उसकी रिपयेरिंग नहीं हो सकती है. बल्कि उसके स्थान पर दूसरा चापाकल लगाना ही एक मात्र विकल्प है. जिले में लगभग 9 हजार चापाकल चालू है. लेकिन उसमें भी 5 से 10 प्रतिशत चापाकल स्पेयर पार्टस के अभाव में बंद पड़े है. जिसे शिकायत मिलने पर विभागीय मिस्त्री द्वारा ठीक कराया जा रहा है.
क्या हैं लेयर की स्थिति
पीएचइडी विभाग की माने तो मुंगेर में अभी तक पानी का लेयर भागने की समस्या उत्पन्न नहीं हुई है. जिले में मात्र एक तारापुर प्रखंड का गाजीपुर पंचायत है. जहां लेयर की समस्या उत्पन्न हुई है. विभागीय अधिकारियों ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 60 से 70 फिट पर लेयर है. जबकि अन्य क्षेत्रों में 30 फिट पर ही लेयर है. विभाग द्वारा लेयर से अधिक चापाकल गाड़े जाते है. ताकि वह फेल नहीं हो सके.
वित्तीय वर्ष की स्थिति
वित्तीय वर्ष 2012-13 में विधायक कोटे से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 730 चापाकल लगाये जाने थे. जिसमें 722 चापाकल विभाग द्वारा लगा दिया गया. इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 505 एवं शहरी क्षेत्र में 217 चापाकल लगाये गये है. यही हाल वित्तीय वर्ष 2013-14 का भी रहा. लेकिन इस वित्तीय वर्ष में 392 उन्नत किस्म के चापाकल ग्रामीण क्षेत्रों में लगाये गये. जबकि विधान पार्षद कोटे से 19 चापाकल लगाये गये हैं. वित्तीय वर्ष 2014-15 में विधायक कोटे से 430 चापाकल एवं 404 उन्नत किस्म के चापाकल लगाये जाने हैं, जिसके टेंडर की प्रक्रिया चल रही है.
कहती हैं जनता
बरियारपुर के गोविंद मंडल, सदर प्रखंड के मो. इमरान, राहुल कुमार, असरगंज के सूरज सिंह सहित अन्य ने बताया कि सरकारी चापाकल गरमी में दम तोड़ देती है. रखरखाव का घोर अभाव है. विभाग अगर समय पर ध्यान दे तो इस समस्या से निजात मिल सकती है. इतना ही नहीं सैकड़ों चापाकल ऐसे जगह लगे है जिसका उपायोग व्यक्तिगत तौर पर किया जाता है. आम जनता को उससे कोई लेना देना नहीं रहता है. योजना बनाने से पहले विभाग को स्थल निरीक्षण कर ही चापाकल गाड़ना चाहिए.
कहते हैं अधिकारी
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता देवेंद्र प्रसाद ने बताया कि जिले में विभिन्न मदों से 14,400 चापाकल लगाये गये हैं. जिसमें कुछ चापाकल की आयु सीमा समाप्त हो चुकी है. स्पेयर पार्टस के अभाव में जो भी चापाकल बंद है उसे दुरुस्त कराया जा रहा है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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