संतों के संगत से मिलती है शांति
Updated at : 14 Jan 2020 8:42 AM (IST)
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बरियारपुर : ऋषिकुंड में मुंगेर जिला संतमत सत्संग का दो दिवसीय 47वां वार्षिक अधिवेशन सोमवार को संपन्न हो गया. इस मौके पर बड़ी संख्या में आचार्य स्वामी चतुरानंद जी महाराज का प्रवचन सुनने सत्संगी पहुंचे और शाम तक भक्त भक्तिरस में गोता लगाते रहे. आचार्य स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने कहा कि जैसा संगत करेंगे […]
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बरियारपुर : ऋषिकुंड में मुंगेर जिला संतमत सत्संग का दो दिवसीय 47वां वार्षिक अधिवेशन सोमवार को संपन्न हो गया. इस मौके पर बड़ी संख्या में आचार्य स्वामी चतुरानंद जी महाराज का प्रवचन सुनने सत्संगी पहुंचे और शाम तक भक्त भक्तिरस में गोता लगाते रहे. आचार्य स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने कहा कि जैसा संगत करेंगे वैसा ही गुण आप में बास करने लगेगा.
इसलिए संतों का संगत करें. संतों का संगत करेंगे तो सुख शांति मिलेगी एवं आपके विचारों में अच्छाई व सत्यता आयेगी और आप असत्यता को पहचान लेंगे. संतों का संगत एवं सत्संग में जाने से आप व्यवहार कुशल बनेंगे और आपका किसी के साथ लड़ाई झगड़ा नहीं होगा. ऋषिकुंड स्थल रामायण काल से जुड़ी है.
जहां पर बड़े-बड़े ऋषि-मुनि संत जैसे श्रृंगी ऋषि, विभांडक ऋषि जैसे महान तपस्वी ने अपनी तप साधना किया. इसलिए सभी श्रद्धालु इस बात को समझते हुए ऋषिकुंड में मांस-मछली व मदिरा का सेवन न करें. इस स्थल की गरिमा को बनाए रखें. स्वामी प्रेमानंद जी महाराज, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, स्वामी रतन बाबा ने भी अपने विचार रखे. प्रवचन के उपरांत भजन एवं आरती किया गया.
अधिवेशन को सफल बनाने में पूर्व मुखिया अशोक मंडल, ऋषिकुंड विकास मंच के अध्यक्ष चंद्र दिवाकर कुमार, संयोजक मनोज सिंह, रजनीश कुमार चौधरी, जदयू नेता प्रीतम सिंह का योगदान काफी सराहनीय रहा. श्रद्धालुओं के लिए महाभंडारा का आयोजन एवं उनके रहने के लिए आवास की व्यवस्था भी की गयी थी.
महाराज परीक्षित व भरत के प्रसंग पर भावविभोर हुए श्रोता
जमालपुर. रामपुर बस्ती में जारी सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को भक्त श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. वृंदावन से पधारे कथावाचक हरि भक्त श्री अनुराग कृष्ण महाराज ने महाराज परीक्षित और भरत का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया.
उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ज्ञानी, धार्मिक और न्याय प्रिय शासक थे. परंतु उन्हीं के कालखंड में कलयुग का भी प्रवेश हो चुका था. स्वयं कलयुग राजा परीक्षित के मुकुट में विराजमान हो गए थे. एक दिन आखेट के क्रम में वे ऋषि शमीक के आश्रम के निकट भूखे-प्यासे पहुंच गए.
उस समय ऋषि भगवान की साधना में ब्रह्मलीन थे. राजा परीक्षित ने उनसे जल की मांग की. किंतु ध्यान मग्न होने के कारण शमीक ऋषि ने कोई उत्तर नहीं दिया. फिर स्वर्ण मुकुट में सवार कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित ने इसे ऋषि का ढोंग माना और एक मृत सर्प को अपने धनुष की नोक से उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया और अपने नगर वापस लौट गए.
जिसके बाद शमीक ऋषि के पुत्र ऋंगी ऋषि ने उन्हें शाप दे दिया था. इसके बाद के घटनाक्रम को उन्होंने बड़े ही मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया और महाराज परीक्षित के श्राप मुक्त होने की कथा सुनाई. इस बीच सुमधुर भजनों की प्रस्तुति पर श्रोता झूमते रहे.
कार्यक्रम के बीच में कलाकारों द्वारा भगवान भोलेनाथ की भव्य झांकी निकाली गई, जो दूसरे दिन के आकर्षण का केंद्र रहा. इस मौके पर पारस, उत्तम सिन्हा, चितरंजन मंडल, भरत पोद्दार, सत्येंद्र सिन्हा, सदानंद और पूनम देवी, मुन्नी सिन्हा, शिवानी, अन्नपूर्णा, नूतन देवी उपस्थित थे.
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