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बीडीओ राजीव का शव गांव पहुंचते ही हर किसी के आंख से निकल पड़े आंसू, पत्नी ने कहा...

Updated at : 31 Oct 2019 10:58 PM (IST)
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बीडीओ राजीव का शव गांव पहुंचते ही हर किसी के आंख से निकल पड़े आंसू, पत्नी ने कहा...

मुंगेर :बिहारमें गया जिले के कोंच प्रखंड में पदस्थापित बीडीओ राजीव रंजन का शव पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार की अहले सुबह उनके घर मुंगेर जिले के धरहरा उत्तर टोला स्थित पैतृक आवास पहुंचा. शव पंहुचते ही वृद्ध माता-पिता, बहनों एवं रिश्तेदार व पड़ोसियों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया. वृद्ध माता विमला देवी […]

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मुंगेर :बिहारमें गया जिले के कोंच प्रखंड में पदस्थापित बीडीओ राजीव रंजन का शव पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार की अहले सुबह उनके घर मुंगेर जिले के धरहरा उत्तर टोला स्थित पैतृक आवास पहुंचा. शव पंहुचते ही वृद्ध माता-पिता, बहनों एवं रिश्तेदार व पड़ोसियों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया. वृद्ध माता विमला देवी व पिता सेवानिवृत्त एसआई चंद्रशेखर पासवान के धैर्य का बांध टूट गया. दोनों शव से लिपट कर दहाड़ मारकर रो रहे थे. आंखों से आंसू का सैलाब निकल रहा था. इस हृदय विदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर आंख से आंसू निकल पड़े.

पत्नी ने कहा- वरीय पदाधिकारियों के दबाव से परेशान था राजीव

मृतक की पत्नी सोनम ने बताया कि राजीव रंजन उससे बहुत प्रेम करता था. दीपावली से एक दिन पूर्व उसे सोने की अंगूठी भी भेंट की थी. वे बीडीओ के पद पर वरीय पदाधिकारियों के दबाव व छोटी-छोटी बातों से अपमानित किये जाने से खुद को असहज महसूस कर रहे थे और हमेशा तनाव में रहते थे. वे इस पद को छोड़ कर सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होना चाह रहे थे. लंबे समय से इस प्रकिया में वे लगे हुए थे.

सोनम ने कहा, काम के दौरान वरीय पदाधिकारियों द्वारा उन पर एक हजार का जुर्माना लगाया गया था. इस कारण वे खुद को खासे अपमानित महसूस कर रहे थे. घटना वाले दिन भी वे सहज हो कर ही घर से निकली थी. इस दौरान मृतक के सगे भाई समेत अन्य परिजनों ने राजीव की मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

लाल दरवाजा शमसान घाट पर हुआ दाह-संस्कार
गांव से मृतक राजीव रंजन का शव यात्रा निकला. इस दौरान परिजनों को सांत्वना देने व उसके पार्थिव शरीर को कंधा देने काफी संख्या में लोगों की भीड़ पहुंच गयी. अंतिम विदाई देने पंहुचे आसपास के ग्रामीण एवं मित्रों की आंखें भी छलक पड़ी. सांत्वना देने पंहुचे स्थानीय जनप्रतिनिधि, धरहरा बीडीओ व थानाध्यक्ष शोकाकुल परिवार को दुख की घड़ी में धैर्य रखने की बात कही.

अंतिम यात्रा में ले जाने से पूर्व उसके पार्थिव शरीर को घर से कुछ ही दूरी पर स्थित धरहरा कन्या मध्य विद्यालय के समीप रखा ग्रामीणों के दर्शन के लिए रखा गया. जहां सैकड़ों की संख्या इकट्ठे लोग शव यात्रा में शामिल हो कर मुंगेर लाल दरवाजा शमसान घाट के लिए निकला. मुंबई में सेक्शन इंजीनियर के पद पर कार्यरत बड़े भाई के आने के बाद मुंगेर घाट पर उनका दाह संस्कार किया गया.

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