जमुई के इस गांव ने रचा इतिहास, ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से बंद की मृत्यु भोज की परंपरा

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 30 May 2026 2:29 PM

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मृत्यु भोज पर रोक लगाने के ऐतिहासिक निर्णय के दौरान बैठक में उपस्थित ग्रामीण.

Jamui News: जमुई में युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर लिया बड़ा फैसला, कहा- शोक में नहीं होगी फिजूलखर्ची

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झाझा से ऋताम्बर सिंह की रिपोर्ट.

Jamui News: जमुई जिले के झाझा प्रखंड अंतर्गत बाराजोर पंचायत के बाराजोर पछयारी टोला में ग्रामीणों ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है. रविवार को आयोजित ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मृत्यु भोज की कुप्रथा पर पूर्ण रोक लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया. गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने एकजुट होकर सामाजिक बदलाव की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया.

बैठक में गूंजा बदलाव का संकल्प

बाराजोर पश्चिमी टोला में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. चर्चा के दौरान सभी लोगों ने माना कि मृत्यु भोज जैसी परंपरा शोकाकुल परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है. लंबे विचार-विमर्श के बाद गांव के लोगों ने निर्णय लिया कि अब किसी भी परिवार पर मृत्यु भोज आयोजित करने का सामाजिक दबाव नहीं बनाया जाएगा.

गरीब परिवारों पर पड़ता था भारी बोझ

ग्रामीणों ने बताया कि किसी परिजन की मृत्यु के बाद परिवार पहले से ही मानसिक और भावनात्मक संकट से गुजरता है. ऐसे समय में मृत्यु भोज की परंपरा निभाने के लिए कई परिवारों को कर्ज तक लेना पड़ता है. इससे आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है. बैठक में मौजूद युवाओं ने कहा कि समाज को ऐसी परंपराओं से बाहर निकलना होगा जो जरूरत से ज्यादा खर्च को बढ़ावा देती हैं.

सादगी से होगी शोक सभा

गांव के लोगों ने तय किया कि भविष्य में किसी की मृत्यु होने पर शोक सभा पूरी सादगी के साथ आयोजित की जाएगी. श्रद्धांजलि और संवेदना व्यक्त करने की परंपरा जारी रहेगी, लेकिन भोज और अनावश्यक खर्च से बचा जाएगा. ग्रामीणों का मानना है कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलेगी.

अन्य गांवों के लिए बन सकता है उदाहरण

बैठक में विनोद यादव, नरेश यादव, कालेश्वर यादव, अर्जुन यादव, बोड़न यादव, चंद्रशेखर यादव, राजेश यादव, अजीत यादव, नंदलाल यादव, मनोहर यादव, सरोज यादव और राजीव यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे. सभी ने इस निर्णय का समर्थन किया.

ग्रामीणों को उम्मीद है कि बाराजोर पछयारी टोला की यह पहल आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और समाज में फैली अन्य कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में नई सोच विकसित करेगी.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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