हर कर्म को यज्ञ के रूप में देखा जा सकता है
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Sep 2019 7:33 AM
मुंगेर : परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि यज्ञ का तात्पर्य उत्पादन, वितरण और ग्रहण की क्रियाओं से है. जीवन के हर कर्म को यज्ञ के रूप में देखा जा सकता है. स्वामी सत्यानंद ने सभी के सुख और समृद्धि के लिए रिखियापीठ में राजसूय महायज्ञ की परंपरा प्रारंभ किया था. जिसका शतचंडी महायज्ञ […]
मुंगेर : परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि यज्ञ का तात्पर्य उत्पादन, वितरण और ग्रहण की क्रियाओं से है. जीवन के हर कर्म को यज्ञ के रूप में देखा जा सकता है. स्वामी सत्यानंद ने सभी के सुख और समृद्धि के लिए रिखियापीठ में राजसूय महायज्ञ की परंपरा प्रारंभ किया था. जिसका शतचंडी महायज्ञ अभिन्न अंग रहा. वे मंगलवार को पादुका दर्शन आश्रम में चल रहे श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ये बातें कही.
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