केंद्र के 20 बेड आज तक कभी नहीं भरे

Published at :12 Apr 2018 6:26 AM (IST)
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केंद्र के 20 बेड आज तक कभी नहीं भरे

मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र जिले के कुपोषित बच्चों का कुपोषण दूर करने में पूरी तरह फेल रहा है. 20 बेडों वाले इस पोषण पुनर्वास केंद्र में एक साल में एक भी दिन ऐसा नहीं आया, जिस दिन यहां के सभी बेड पर […]

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मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र जिले के कुपोषित बच्चों का कुपोषण दूर करने में पूरी तरह फेल रहा है. 20 बेडों वाले इस पोषण पुनर्वास केंद्र में एक साल में एक भी दिन ऐसा नहीं आया, जिस दिन यहां के सभी बेड पर बच्चे हों. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस जिले में पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चों की संख्या 8500 है. जबकि अबतक यहां मात्र 232 कुपोषित बच्चों का इलाज किया गया है. फलत: पोषण पुनर्वास केंद्र अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल नहीं हो रहा.

एक साल में 232 बच्चों को किया गया भर्ती: वित्तीय वर्ष 2017-18 में कुल 232 कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में भरती किया गया. जिनमें से कुल 5 बच्चे की स्थिति काफी गंभीर हो जाने पर उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया था. यहां पर भरती होने वाले कुपोषित बच्चों को 7 दिन से 14 दिन तक रखा जाता है तथा स्थिति में सुधार पाये जाने पर उसे छुट्टी दे दी जाती है. इस अनुसार यदि देखा जाये तो यहां प्रत्येक महीने 80-100 बच्चे भरती होने चाहिए. किंतु बीते वित्तीय वर्ष में एक भी महीना ऐसा नहीं रहा जहां बच्चों की संख्या 33 से अधिक हो पायी हो.
जिले में 8500 बच्चे हैं कुपोषित: स्वास्थ्य विभाग के तय मानकों के अनुसार गणना करने पर जिले में लगभग 8500 कुपोषित बच्चे हैं. विभागीय उदासीनता के कारण यह संख्या हर साल बढ़ती ही जा रही है. मालूम हो कि विभिन्न प्रखंडों में पाये जाने वाले कुपोषित बच्चों को सदर अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाने के लिए पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, एएनएम, आंगनबाड़ी केंद्र तथा आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. बावजूद कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र नहीं पहुंच पा रहे हैं. जिससे समझा जा सकता है कि कहीं न कहीं जिले के स्वास्थ्य अधिकारी इसके प्रति गंभीर नहीं हैं.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक: अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले वर्ष के वनिस्पत पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों की संख्या बढ़ी है. अब एनआरसी को कहीं और स्थानांतरित करने की जरूरत नहीं है, एनआरसी की मरम्मत हो गयी है.
जागरूकता का है अभाव
पोषण पुनर्वास केंद्र पर कुपोषित बच्चों की संख्या नदारद रहने का एक कारण यह भी है कि आम लोगों में इस योजना के बारे में जागरूकता की काफी कमी है. जिसके कारण लोग अपने कुपोषित बच्चों का इलाज करवाने यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं. हालांकि पिछले साल सितंबर महीने में राज्य कार्यक्रम प्रबंधक शिशु स्वास्थ्य डॉ सुरेंद्र कुमार निरीक्षण के लिए सदर अस्पताल पहुंचे थे. उसी क्रम में उन्होंने जब पोषण पुनर्वास केंद्र का मुआयना किया तो उन्होंने उसी क्षण अस्पताल उपाधीक्षक को निर्देश दिया था कि इसे स्थानांतरित कर ऐसे जगह पर संचालित करें, जहां पर यह सभी अधिकारियों व चिकित्सकों के नजर पर हो तथा आम जनों का भी वहां पर ध्यान केंद्रित हो. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल उपाधीक्षक आवास का चयन किया और उस पर लाखों रुपये खर्च भी हुए. लेकिन अब पुन: निर्णय लिया गया कि उस भवन में इसे स्थानांतरित नहीं किया जायेगा.
पिछले वित्तीय वर्ष में भर्ती बच्चे
महीना बच्चों की संख्या
अप्रैल 24
मई 18
जून 31
जुलाई 33
अगस्त 26
सितंबर 19
अक्तूबर 15
नवंबर 17
दिसंबर 13
जनवरी 6
फरवरी 14
मार्च 16
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