कक्षपाल पर गोलीबारी के बाद जागा प्रशासन, कुख्यात कैदी होंगे जिला बदर

Published at :10 Apr 2018 6:42 AM (IST)
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कक्षपाल पर गोलीबारी के बाद जागा प्रशासन, कुख्यात कैदी होंगे जिला बदर

जिलाधिकारी ने जेल अधीक्षक व उपाधीक्षक से ली मामले की जानकारी मुंगेर : जेल गश्ती के दौरान कक्षपाल को गोली मारकर घायल करने के बाद प्रशासन की नींद खुली और मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए एक ओर जहां जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह एवं […]

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जिलाधिकारी ने जेल अधीक्षक व उपाधीक्षक से ली मामले की जानकारी

मुंगेर : जेल गश्ती के दौरान कक्षपाल को गोली मारकर घायल करने के बाद प्रशासन की नींद खुली और मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए एक ओर जहां जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने जेल में बंद 12 कुख्यात अपराधियों के जेल ट्रांसफर को लेकर मुख्यालय को रिपोर्ट भेजा है. वहीं दो दर्जन से अधिक अपराधियों पर सीसीए की कार्रवाई का अनुशंसा की गयी है. जिला प्रशासन अब पूरी तौर पर यह मान चुकी है कि जेल में बंद कुख्यात अपराधी जेल से ही अपराध का सत्ता चला रहा है और शहर को अशांत कर रहा है.
जिलाधिकारी ने की घटना की समीक्षा : गोलीबारी की घटना को जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया है. उन्होंने सोमवार को अपने कार्यालय कक्ष में जेल अधीक्षक सियाराम सिंह एवं जेल उपाधीक्षक निर्मल कुमार प्रभात को बुलाकर पुरी घटना की जानकारी ली. जिसमें बताया गया कि कुख्यात अपराधी पवन मंडल ने जेलर के कक्ष में आकर कक्षपाल को धमकी दिया था कि मेरी मर्जी नहीं चलेगी तो अंजाम बुरा होगा. लेकिन जिस कक्षपाल को धमकी दिया गया उस पर हमला नहीं हुआ.
बल्कि बाहरी सुरक्षा में तैनात दूसरे कक्षपाल पर हमला किया गया. डीएम ने कहा कि मामला छोटी नहीं है इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. डीएम ने कहा कि जिस समय हमला हुआ उस समय जेल वॉच टावर पर जवान तैनात थे. जिसके द्वारा कार्रवाई नहीं किया जाना चिंता का विषय है. डीएम ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि जेल के चारों तरफ लाइटिंग की व्यवस्था सुदृढ़ किया जाये. शीघ्र ही मास्क लाइट लगाया जाये. साथ ही जेल नियमों के अनुसार जेल के बाहरी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सीसीटीवी लगाने की व्यवस्था की जाये.
अतिसुरक्षित एरिया की अपराधियों ने खोली पोल
किला परिसर मुंगेर का सबसे सुरक्षित एरिया माना जाता है. प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक का कार्यालय एवं आवास इसी किला परिसर में सिमटा हुआ है. न्यायालय एवं न्यायिक पदाधिकारियों का आवास भी है. जिसे लेकर हमेशा यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहता है. लेकिन जिस तरह से जेल के बाहरी सुरक्षा में तैनात कारा पुलिस पर गश्ती के दौरान मोटर साइकिल सवार दो अपराधियों ने गोलीबारी कर घायल किया. उससे किला परिसर के सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी. जबकि इस घटना के बाद टाउन पुलिस की भी पोल खुल गयी है. क्योंकि जिस जगह घटना को अंजाम दिया गया वहां जिलाधिकारी के आवास, जेल सुरक्षा में हमेशा जवान तैनात रहते हैं. जबकि कुछ ही दूरी पर जिले को सुरक्षा प्रदान करने वाले पुलिस कप्तान का भी आवास है. जहां हमेशा जवान सुरक्षा में मोर्चा संभाले रहता है. बावजूद अपराधी घटना को अंजाम देकर भाग निकला.
घायल के बयान पर कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज
अपराधियों की गोली से घायल जवान अजीत कुमार के बयान पर कोतवाली थाना में कांड संख्या 127/18 दर्ज किया गया. जिसमें जेल में बंद कुख्यात अपराधी पवन मंडल सहित दो को नामजद किया गया है. जबकि दो अन्य अज्ञात को अभियुक्त बनाया गया है.
कारा जवानों ने जेल अधिकारियों पर लगाये गंभीर आरोप
घटना की सूचना मिलते ही कारा सुरक्षा में तैनात जवान अस्पताल में जमकर हंगामा किया. खास कर कारा जवानों में काफी आक्रोश व्याप्त था. अस्पताल में कारा जवानों ने जहां जेल उपाधीक्षक की जमकर फजीहत कर दी. जिसके बाद जवानों ने अपराधियों पर कार्रवाई एवं जेल में बंद कुख्यात अपराधियों को जेल ट्रांसफर की मांग को रविवार की रात में ही जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक आवास का घेराव किया. जबकि कारा जवानों ने जेल अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाया.
जवानों ने कहा कि अधिकारियों के कारण ही जेल में बंद कुख्यात अपराधियों का मनोबल काफी बढ़ गया है. जब हमलोग कार्रवाई करना चाहते हैं तो रोक दिया जाता है. इतना ही नहीं जेल में कुख्यातों के साथ अधिकारियों का व्यवहार नियमानुसार नहीं है. जेल से भागने की योजना तीन अपराधी बना रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों का भी समर्थन है. पवन मंडल ने जेल अधिकारियों के सामने जवानों को जान से मारने की धमकी दिया.
जवाबी कार्रवाई नहीं होना सवालों के घेरे में
मोटर साइकिल सवार अपराधियों ने जेल के 2 एवं 3 नंबर वॉच टावर के बीच जेल के बाहरी सुरक्षा को लेकर गश्ती कर रहे जवान को गोली मार कर घायल कर दिया. इस दौरान उसके साथ रहा जवान भी जवाबी कार्रवाई करने के बजाय भाग खड़ा हुआ. जबकि वॉच टावर पर तैनात जवानों ने भी अपराधियों पर कार्रवाई नहीं की. जबकि जवान के पास हथियार के साथ ही 50 कारतूस हमेशा रहता है. कहा जाता है कि वॉच टावर पर जो जवान तैनात था वह होमगार्ड का जवान है. जो मूकदर्शक बना रहा. आखिर किस परिस्थिति में जबावी कार्रवाई नहीं की गयी. यह सवालों के घेरे में है.
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