सफाई के प्रति लापरवाह एनजीओ का एकरारनामा रद्द, जलापूर्ति सर्वे शीघ्र

Published at :16 Mar 2018 6:27 AM (IST)
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सफाई के प्रति लापरवाह एनजीओ का एकरारनामा रद्द, जलापूर्ति सर्वे शीघ्र

पेयजलापूर्ति के धीमी गति कार्य पर उठे सवाल मुंगेर : बिहार राज्य जल पर्षद बोर्ड द्वारा निगम क्षेत्र में धीमी गति से चल रहे सर्वे कार्य पर नगर निगम के सशक्त स्थायी समिति ने चिंता व्यक्त की है और कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया. इसके साथ ही शहर में फॉगिंग व नोट्रेडम […]

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पेयजलापूर्ति के धीमी गति कार्य पर उठे सवाल

मुंगेर : बिहार राज्य जल पर्षद बोर्ड द्वारा निगम क्षेत्र में धीमी गति से चल रहे सर्वे कार्य पर नगर निगम के सशक्त स्थायी समिति ने चिंता व्यक्त की है और कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया. इसके साथ ही शहर में फॉगिंग व नोट्रेडम एकेडमी के होल्डिंग टैक्स के मुद्दे पर भी निर्णय लिया गया. सफाई के मुद्दे पर चर्चा के दौरान कार्य में लापरवाही बरतने वाले ग्रुप सी के एनजीओ महिला विकास संस्थान के एकरारनामा को रद्द करने व राशि कटौती करने का प्रस्ताव पारित हुआ.
जिसे बोर्ड की बैठक में पारित किया जायेगा. गुरुवार को नगर निगम में आयोजित सशक्त स्थायी समिति की मैराथन बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और शहरवासियों को मिलने वाले सुविधाओं पर विचार विमर्श किया गया. बैठक की अध्यक्षता महापौर रूमा राज ने की. जबकि उपमहापौर सुनील राय, नगर आयुक्त श्यामल किशोर पाठक एवं बीआरजेपी के कार्यपालक अभियंता राजेश कुमार मुख्य रूप से मौजूद थे.
पेयजलापूर्ति के सर्वे कार्य पर उठे सवाल : शहरी पेयजलापूर्ति योजना को क्रियान्वित करने के लिए बिजार राज्य जल पर्षद द्वारा किये जा रहे सर्वे कार्य पर सवाल उठाया गया. सदस्यों ने कहा कि बीआरजेपी द्वारा जो कार्य किया जा रहा है वह काफी धीमी गति से हो रहा है. नगर आयुक्त ने कहा कि बीआरजीपी को निगम द्वारा 9 करोड़ 48 लाख रुपये पूर्व में ही हस्तांतरित कर दिया गया है
तो फिर कार्य में विलंब क्यों हो रहा है. जिस पर बीआरजेपी के कार्यपालक अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि जिंदल द्वारा जिन वार्डों में पाइप लाइन बिछाया गया है उसमें मात्र एक वार्ड में सर्वे का कार्य पूर्ण किया जा सका है. जबकि शेष वार्डों में सर्वे कार्य चल रहा है. जिसके बाद डीपीआर तैयार कर डोर टू डोर पेयजलापूर्ति के लिए कनेक्शन आवंटित किया जायेगा.
हाउस होल्डर का दें डाटा : कार्यपालक अभियंता ने कहा कि शहरी क्षेत्र में जितने भी हाउस होल्ड है उसका डाटा दिया जाये. हालांकि हाउस होल्ड का डाटा पुराना है और हाल के दिनों में बहुत ऐसे नये घर बन गये हैं जिनका डाटा अपडेट नहीं हो पाया है. जिसे अपटूडेट कर कनेक्शन का डीपीआर तैयार करने की बात कही गयी. कार्यपालक अभियंता ने बताया कि जिन घरों में पानी के लिए बोरिंग किया गया है वैसे घरों के पानी के क्वालिटी की जांच की जायेगी और पानी पीने योग्य नहीं होगा तो वैसे घरों में भी कनेक्शन दिया जायेगा. वार्ड पार्षद प्रसून कुमार ने कहा कि पेयजलापूर्ति के लिए वार्ड में जो सर्वे कराया जा रहा है उसमें वार्ड पार्षदों से वार्ड से मूल्यांकन कर ही डीपीआर तैयार किया जाये.
महिला विकास संस्थान का एकरारनामा होगा रद्द
बैठक में निर्णय लिया गया कि नयी सफाई व्यवस्था के तहत ग्रुप सी यानी 31-45 वार्ड में कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्था महिला विकास संस्थान द्वारा सफाई कार्य ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है और स्पष्टीकरण पूछने पर संतोषप्रद जवाब नहीं दिया गया. इस संस्था के कार्य करने में अक्षम बताते हुए कार्य करने से इनकार कर दिया. जबकि नगर आयुक्त ने बताया कि बोर्ड के बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया था कि अगले आदेश तक के लिए सफाई कार्य करना होगा. लेकिन संस्था नहीं ऐसा नहीं किया.
जिस पर सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने इसके एकरारनामा को रद्द करने का प्रस्ताव लिया और आगामी बोर्ड की बैठक में इसे पारित कराने की बात कही गयी. बैठक में सशक्त स्थायी समिति के सदस्य राजेश ठाकुर, नीलू सिंह, किरण देवी, सिटी मैनेजर एहतेशाम हुसैन, नाजिर धीरज कुमार, प्रधान लिपिक अशोक यादव, टैक्स दारोगा पवन सिंह, सफाई प्रभारी राहुल कुमार मौजूद थे.
नेट्रोडम को करना होगा होल्डिंग टैक्स का भुगतान
नगर विकास एवं आवास विभाग ने एमजेसी नंबर 3623/14 के आलोक में नेट्रोडम एकेडमी के होल्डिंग टैक्स पर विचार करने का प्रस्ताव दिया गया. जिस पर सहमति बनी कि नेट्रोडम एकेडमी को नगरपालिका अधिनियम 2007 के पूर्व होल्डिंग टैक्स लगभग 2 लाख रुपये बकाया है उसे माफ किया जाये. वर्ष 2007 के बाद से होल्डिंग टैक्स की वसूली किया जाये. जिस पर सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने सहमति प्रदान की. साथ ही शहर में बढ़ते मच्छर के प्रकोप को देखते हुए फॉगिंग पर भी चर्चा हुई.
जिसमें कहा गया कि निगम के पास जो फॉगिंग मशीन है उससे मच्छर भगाने या मारने में सक्षम नहीं है. क्योंकि उसमें जो केमिकल यूज किया जाता है वह कारगर नहीं है. जिस पर एक कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि ब्यूट्रेन गैस ऑपरेशन मशीन के माध्यम से फॉगिंग करायी जाये. जिसका मशीन अलग तरह का है और बायो केमिकल स्प्रे होता है. उसके एक वार्ड में फॉगिंग करने पर एक लाख रुपये खर्च आ गया. जिसे ट्रायल के रूप में एक वार्ड में फॉगिंग कराने का निर्देश दिया गया.
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