सब्सिडी वाले सिलिंडर पर बनता है मरीजों का खाना

Published at :14 Feb 2018 6:06 AM (IST)
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सब्सिडी वाले सिलिंडर पर बनता है मरीजों का खाना

स्वयंसेवी संस्था लगा रही है सरकार को चूना मुंगेर : सदर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को भोजन-नाश्ता की आपूर्ति करने वाली संस्था सरकार को लाखों रुपये का चूना लगा रही है़ स्वास्थ्य विभाग से संस्था अपने काम का पूरा पैसा लेती है, पर सरकार के साथ धोखाधड़ी कर रही है़ संस्था द्वारा अपने […]

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स्वयंसेवी संस्था लगा रही है सरकार को चूना

मुंगेर : सदर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को भोजन-नाश्ता की आपूर्ति करने वाली संस्था सरकार को लाखों रुपये का चूना लगा रही है़ स्वास्थ्य विभाग से संस्था अपने काम का पूरा पैसा लेती है, पर सरकार के साथ धोखाधड़ी कर रही है़ संस्था द्वारा अपने व्यावसायिक कार्य के लिए सब्सिडी वाले सिलिंडर का इस्तेमाल किया जाता है जो गैर कानूनी है़ हैरत की बात तो यह है कि अबतक इस गैर कानूनी काम करने वाली संस्था के हकीकत को अस्पताल प्रबंधन द्वारा भी छिपाकर रखा गया है़
घरेलू सिलिंडर का हो रहा व्यावसायिक उपयोग : सदर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को भोजन-नाश्ता की आपूर्ति करने के लिए अंग फाउंडेशन ने टेंडर लिया है़ जिसे हर हाल में व्यावसायिक गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करना है़ इसके बावजूद जब से संस्था ने सदर अस्पताल में अपना काम आरंभ किया है, तब से वह सब्सिडी वाले सिलिंडर का ही प्रयोग कर रही है़
अस्पताल के विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को जब प्रभात खबर की टीम अस्पताल के कैंटीन हाउस में पहुंची तो वहां पर व्यावसायिक सिलिंडर के बदले सब्सिडी वाले सिलिंडर पर भोजन तैयार किया जा रहा था तथा पास में ही एक और सब्सिडी वाला सिलिंडर रखा हुआ था़
सरकार को लग रहा चूना: संस्था द्वारा अपने व्यवसाय में सब्सिडी वाले सिलिंडर का इस्तेमाल करने से सरकार को लाखों का चूना लगाया जा रहा है़ मालूम हो कि व्यावसायिक सिलिंडर की वर्तमान दर लगभग 76 रुपये प्रति किलोग्राम पड़ती है़ जबकि सब्सिडी वाले सिलिंडर का दाम 35 रुपये प्रति किलोग्राम पड़ता है़ अब समझा जा सकता है कि संस्था को भोजन व नाश्ता तैयार करने में इंधन के लिए आधे से भी कम राशि खर्च करनी पड़ती है़ रुपये सरकारी खजाने में जाना चाहिए था, वह रुपया अवैध तरीके से संस्था के जेब में जा रहा है़
अस्पताल प्रबंधन ने मामले को नहीं किया उजागर: अस्पताल परिसर में यदि कुछ भी गलत हो रहा है तो यहां के प्रबंधन को उस संबंध में अविलंब आवश्यक कदम उठाना चाहिए़ नियमों के तहत अस्पताल प्रबंधन द्वारा कार्य आरंभ के पूर्व तथा बीच-बीच में संस्था के रसोई घर का निरीक्षण किये जाने का प्रावधान है, ताकि संस्था द्वारा पकाये जाने वाले भोजन की गुणवत्ता तथा रसोई घर की साफ-सफाई की विशेष निगरानी हो सके, लेकिन अस्पताल प्रबंधन को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक: अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्हें इस बात का पता नहीं है कि संस्था द्वारा भोजन-नाश्ता तैयार करने में किस सिलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है़ वे इसकी जांच करेंगे़
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