करैली नरसंहार के दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा

Published at :25 Jan 2018 6:21 AM (IST)
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करैली नरसंहार के दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा

मुंगेर : मुंगेर जिले के बहुचर्चित करैली नरसंहार के दो आरोपित रवींद्र यादव व मुसहरू यादव को कांड में दोषी पाते हुए बुधवार को मुंगेर के अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय पुरुषोत्तम मिश्रा ने आजीवन कारावास की सजा सुनायी. 2 जून 2011 को नक्सलियों ने करैली में छह लोगों की हत्या कर दी थी. इसी मामले […]

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मुंगेर : मुंगेर जिले के बहुचर्चित करैली नरसंहार के दो आरोपित रवींद्र यादव व मुसहरू यादव को कांड में दोषी पाते हुए बुधवार को मुंगेर के अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय पुरुषोत्तम मिश्रा ने आजीवन कारावास की सजा सुनायी. 2 जून 2011 को नक्सलियों ने करैली में छह लोगों की हत्या कर दी थी. इसी मामले में इन्हें 18 जनवरी को दोषी पाया गया था. सत्रवाद संख्या 681/11 में सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर दोनों आरोपित को भादवि की धारा 302/34 में दोषी पाया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक योगेंद्र मंडल एवं पीयूष कुमार ने बहस में भाग लिया.

सत्रवाद संख्या 681/11 में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर विगत 18 जनवरी को रवींद्र यादव एवं मुसहरू यादव को हत्याकांड में दोषी पाया था. ये दोनों आरोपी धरहरा थाना क्षेत्र के बंगलवा कैथमा का रहने वाला है. जबकि इसी मामले में धीरेंद्र कुमार, राकेश कुमार व राजाराम यादव को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया था. बताया जाता है कि 2 जुलाई 2011 को तड़के धरहरा थाना क्षेत्र के करैली गांव में माओवादियों ने पुलिस वेश में गांव पहुंचा था और छह लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. जिन लोगों की हत्या की गयी थी उसमें सुनील राय, शिवन राय, नरेश राय, रामदेव राय, नारायण कोड़ा व कांग्रेस कोड़ा शामिल था. घटना के दौरान माओवादियों के दौरान कुल 11 लोगों को अगवा कर लिया था. जिसे बाद में पुलिस के द्वारा मुक्त कराया गया था.

मृतक के परिजन नहीं भूल पा रहे वह खौफनाक सुबह
किसी को बच्चे की परवरिश तो किसी को पेट भरने की चिंता
क रैली नरसंहार में मारे गये नरेश राय की विधवा कदमी देवी किसी प्रकार अपने दो पुत्रों रंजीत व मनोज की परवरिस कर रही. वे बताती है कि पति के मारे जाने के बाद हमलोगों की माली हालत काफी खराब हो गयी. उस समय प्रशासन ने इंदिरा आवास के साथ ही मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन वह नहीं मिला. आज भी हमलोग फूस के घर में रहते हैं और मजदूरी कर किसी प्रकार पेट भरते हैं. जबकि इस घटना के शिकार शिवन राय की पत्नी तनिक देवी प्राथमिक विद्यालय करैली में रसोइया का काम करती है. वह बताती है कि उसे तीन पुत्र व एक पुत्री है. छोटे-छोटे बच्चों के सर से नक्सलियों ने उसके पिता का साया खत्म कर दिया.
इस परिस्थिति में वह किसी प्रकार अबतक जीवित है, यह अत्यंत दुखदायी है. तीन छोटे-छोटे बेटे सुभाष, सुमन व आशीष तथा बेटी सावित्री को पाल रही है. सरकार ने कुछ नहीं दिया. आज भी मिट्टी के दीवार पर फूस डाल कर सर छिपाते हैं. नक्सलियों के हाथों मारे गये सुनील राय की पत्नी रेशमी देवी की पत्नी की भी कहानी कुछ इसी तरह की है. उसके दो पुत्र संजय राय, चंद्रशेखर कुमार व पुत्री सुनीता व सुनैना को बड़े ही विपरीत परिस्थिति से पाल रही. उपर से वृद्ध ससुर की भी जिम्मेदारी है.
दूसरे के घर मजदूरी कर व खेतीबारी कर एक बेटी का विवाह भी किया. विपत्ति का हाल यह है कि जिस समय नक्सलियों ने सुनील राय की हत्या की थी उस समय रेशमी गर्भवती थी. उपर वाले किसी प्रकार जीवन की नैया चला रहे. घटना में मारे गये मृतक नारायण कोड़ा को तीन पुत्र श्रवण कोड़ा, भीम कोड़ा व पवन कोड़ा है.
जबकि पत्नी की मौत हो चुकी है. माओवादी वारदात में मारे गये रामदेव राय व कांग्रेस कोड़ा के परिवार की भी स्थिति अत्यंत ही बदहाल है. घटना के बाद जब प्रशासनिक महकमा पहुंचा था तो आश्वासन दिया गया था कि उनलोगों को इंदिरा आवास के साथ ही चार-चार लाख रुपये नक्सली वारदात के तौर पर मुआवाज दिया जायेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. आज भी नक्सलियों के हाथों के मारे गये लोगों के परिजन दाने-दाने को मुहताज हैं और सरकार एवं प्रशासन की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं.
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