मुख्यमंत्री से मुंगेरवासियों को है कई उम्मीदें

Published at :09 Jan 2018 6:33 AM (IST)
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मुख्यमंत्री से मुंगेरवासियों को है कई उम्मीदें

मुंगेर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन पर मुंगेरवासियों को बड़ी उम्मीदें हैं. एक ओर जहां मुंगेर में अभियंत्रण महाविद्यालय व विश्वविद्यालय अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया है. वहीं मुंगेर-खगड़िया के बीच सड़क सेवा शीघ्र चालू होने की उम्मीद लिये लोग बैठे हैं. क्योंकि दो वर्ष पूर्व गंगा रेल सह सड़क पुल तो […]

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मुंगेर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन पर मुंगेरवासियों को बड़ी उम्मीदें हैं. एक ओर जहां मुंगेर में अभियंत्रण महाविद्यालय व विश्वविद्यालय अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया है. वहीं मुंगेर-खगड़िया के बीच सड़क सेवा शीघ्र चालू होने की उम्मीद लिये लोग बैठे हैं. क्योंकि दो वर्ष पूर्व गंगा रेल सह सड़क पुल तो बन कर तैयार हो गया और रेल यातायात भी प्रारंभ हुआ. किंतु सड़क के लिए अभी भी इंतजार है.

एप्रोच पथ का है इंतजार : दशकों के इंतजार के बाद मुंगेर गंगा रेल सह सड़क पुल तो बन गया. लेकिन एप्रोच पथ नहीं होने के कारण सड़क सेवा बहाल नहीं हो पा रही. राष्ट्रीय उच्च पथ 80 एवं राष्ट्रीय उच्च पथ 31 को जोड़ने के लिए जो उच्च पथ का निर्माण होना है वह मामला भूमि अधिग्रहण के पेच में फंसा है. यदि सब कुछ सामान्य रहा तो ढाई से तीन साल में एप्रोच पथ की सड़क बन पायेगी. लेकिन यदि गंगा पुल के दोनों ओर पुल से छोटा लिंक रोड नीचे उतार दिया जाये, तो इस पुल का उपयोग तत्काल प्रारंभ हो सकता है.
इंजीनियरिंग कॉलेज का सपना अब भी अधूरा : 10 मार्च 2007 को अपने विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुंगेर आये थे और पोलो मैदान में महती सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की थी कि मुंगेर में इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेज खुलेगा. मुंगेर के लोग तब से आस लगाये बैठे हैं कि इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेज में उनके बच्चे पढ़ेंगे. लेकिन अब तक महज पॉलिटेक्निक कॉलेज का भवन निर्माण किया गया है. जबकि इंजीनियरिंग कॉलेज का मामला धरातल पर नहीं उतर पाया है. भूमि अधिग्रहण के मामले को लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज इधर-उधर भटक रहा है.
नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल : मुख्यमंत्री ने सात निश्चय के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने की योजना चलायी है. लेकिन गंगा के तट पर रहने वाले मुंगेर शहर के लोग आज भी प्यासे हैं. शहरी जलापूर्ति योजना बीरबल की खिचड़ी बनी है. पिछले पांच वर्षों से यहां के लोग आस लगाये बैठे हैं कि शीघ्र जलापूर्ति योजना चालू होगी और उनके घरों को पानी मिलेगा. लेकिन यह योजना कब पूरी होगी और कब लोगों का प्यास बुझेगी, यह किसी को पता नहीं.
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