शराबबंदी ने संवारी दारा की जिंदगी, घर में आयी खुशहाली

Published at :20 Dec 2017 3:26 AM (IST)
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शराबबंदी ने संवारी दारा की जिंदगी, घर में आयी खुशहाली

संग्रामपुर : शराबबंदी ने कई लोगों की जहां जिंदगी संवार दी, वहीं घर में सुख-शांति के साथ ही समृद्धि की सौगात भी दी. इसी में एक है प्रखंड के झिकुली पंचायत अन्तर्गत रतनपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय दारा मंडल का घर. शराबबंदी के बाद आज उसके घर वह सबकुछ है, जिसके लिए उसके घरवाले तरसते […]

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संग्रामपुर : शराबबंदी ने कई लोगों की जहां जिंदगी संवार दी, वहीं घर में सुख-शांति के साथ ही समृद्धि की सौगात भी दी. इसी में एक है प्रखंड के झिकुली पंचायत अन्तर्गत रतनपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय दारा मंडल का घर. शराबबंदी के बाद आज उसके घर वह सबकुछ है, जिसके लिए उसके घरवाले तरसते रहते थे. शराब के कारण उसके तीन बच्चे पढ़ नहीं पाये. अब उसका छोटा बेटा और बेटी गांव में ही विद्यालय में कक्षा दो व तीन में पढ़ाई कर रहा है.

दारा मंडल ने बताया 1990 में उसकी मां की मौत हो गयी. पिता की इच्छा के अनुसार कादरगंज हवेली खड़गपुर में उसकी शादी रेखा देवी के साथ कर दी गयी. 1998 में पिता की मृत्यु के बाद गांव में शराबियों की संगत हो गयी. परिवार का बोझ बढ़ता गया. कभी गांव में ही घर पर दुकान खोली तो कभी घूम-घूम कर झाल मूढ़ी का धंधा किया. पर शराब की लत के कारण हर बार पूंजी डूब जाती थी. सौभाग्य से पत्नी रेखा ने कभी झगड़ा नहीं किया.
उसको व बच्चों को देख कर आत्मग्लानि होती थी, लेकिन शराब की लत से मुक्ति नहीं मिली. हर मंगलवार मां तेलडीहा के मंदिर में जाकर याचना भी की, पर शराब की लत नहीं छूटी. अब मुझे लगता है कि तेलडीहा मैया के दरबार में माथा टेकने के कारण ही बिहार के मुखिया को यह सद्बुद्धि आयी और पूर्ण शराबबंदी कानून लागू हुआ. बस मानो मुझे मां का दिया वरदान ही मिल गया. कानून के भय से शराबी दोस्तों की संगति और शराब दोनों छूट गया. 1 अप्रैल 2016 के बाद से कभी शराब का सेवन नहीं किया. शराब बंदी के बाद मैंने एक सेकेंड हैंड ऑटो खरीदा और उसी को चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा हूं.
छोड़ी शराब, तो घर में लौटी रौनक
दारा ने कहा कि शराब की लत छूटते ही घर का संस्कार ही बदल गया. पत्नी के चेहरे पर उदासी की जगह खुशी नजर आने लगी. बेटा तीसरी तथा बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ रही है. घर में गाय पालने व शुद्ध दूध के सेवन से सबके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है. स्थिति यह है कि पहले घर के संतोष रेडियो में बैट्री बदलने के पैसे नहीं होते थे और अब सपरिवार घर में बैठ कर एलसीडी टीवी पर फिल्म देखते हैं.
दहेज उन्मूलन के लिए करेंगे प्रचार-प्रसार
दारा ने कहा कि नीतीश कुमार के दहेज प्रथा व बाल विवाह जैसे सामाजिक कुरीतियों पर चलाये गये अभियान का मैं दूत बनूंगा. लोगों को जागरूक कर इस अभियान को बल दूंगा. क्योंकि यह समाज की एक बहुत बड़ी समस्या है. इसे बंद होना ही चाहिए. मेरे दो बेटे शादी के लायक है. मैंने संकल्प लिया है कि दोनों ही बेटों की शादी में एक पैसों का भी तिलक दहेज नहीं लूंगा. दारा का कहना है कि शराब बंदी के बाद दहेज प्रथा व बाल विवाह उन्मूलन से बिहार में नया सवेरा आयेगा.
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