ऋषिकुंड में नहीं मिली इंजीनियरिंग कॉलेज को जमीन, बेवजह लोग कर रहे राजनीति
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Dec 2017 8:00 AM (IST)
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स्थल बदलने को लेकर सेंक रहे राजनीतिक रोटी मामले में बयानबाजी का चल रहा दौर मुंगेर : मुंगेर में इन दिनों इंजीनियरिंग कॉलेज के स्थल को लेकर राजनीति गरमा गयी है. ऋषिकुंड क्षेत्र के लोग जहां कॉलेज का स्थल बदलने को राजनीतिक साजिश बता रहे. वहीं कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेकने में लगे हैं. […]
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स्थल बदलने को लेकर सेंक रहे राजनीतिक रोटी
मामले में बयानबाजी का चल रहा दौर
मुंगेर : मुंगेर में इन दिनों इंजीनियरिंग कॉलेज के स्थल को लेकर राजनीति गरमा गयी है. ऋषिकुंड क्षेत्र के लोग जहां कॉलेज का स्थल बदलने को राजनीतिक साजिश बता रहे. वहीं कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेकने में लगे हैं.
जबकि इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए ऋषिकुंड क्षेत्र के जिस स्थल का चयन कर प्रशासनिक स्तर पर सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था उस स्थल के भू-स्वामियों ने बाद में जमीन देने से ही इनकार कर दिया. फलत: सेकेंड ऑप्शन के रूप में चयनित धरहरा प्रखंड के दशरथपुर बंगलवा पथ के सुमरी पथरी स्थित भूमि पर ही अब इंजीनियरिंग कॉलेज बनने की संभावना है. इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्यारंभ कर दिया गया है और शीघ्र ही भूमि अधिग्रहण किया जायेगा.
दस वर्षों से लटका है इंजीनियरिंग कॉलेज : राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने विकास यात्रा के दौरान मार्च 2007 में मुंगेर में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की घोषणा की थी. घोषणा के दस वर्ष हो गये. किंतु अबतक इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए स्थल चयन व भूमि अधिग्रहण का मामला सरकारी फाइलों में ही दौर लगा रहा है. अबतक आधे दर्जन स्थानों को प्रशासनिक स्तर पर चयन किया गया और फिर कोई न कोई कारणों से भूमि अधिग्रहण नहीं हो पाया. फलत: इंजीनियरिंग कॉलेज का सपना मुंगेरवासियों का साकार नहीं हो पा रहा और यह मामला राजनीतिक दलों के लिए एक मुद्दा बनकर रह गया है.
भू-स्वामियों ने नहीं दी जमीन : इंजीनियरिंग कॉलेज स्थल चयन के लिए राज्य सरकार की ओर से एक कमिटी बनी है. जिसके नोडल पदाधिकारी भागलपुर अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य हैं.
उनके नेतृत्व में प्रशासनिक स्तर पर जिन स्थलों का चयन किया गया उसमें पहला स्थल पाटम ऋषिकुंड के समीप था. जबकि दूसरा दशरथपुर से बंगलवा पथ में स्थित है. कमिटी द्वारा स्थल चयन का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेज दिया गया है और जब भू अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान का मामला आया तो भू-स्वामियों ने जमीन देने से ही इनकार कर दिया. जिस भूमि का चयन किया गया था उस भूमि के दर्जनभर हिस्सेदार हैं और उनमें से कुछ हिस्सेदारों ने अपना जमीन इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए सरकारी मापदंड के अनुसार देने को तैयार नहीं हुए. फलत: ऋषिकुंड में इंजीनियरिंग कॉलेज का मामला फंस गया.
कहां फंसा मामला : प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ऋषिकुंड का चयनित भूमि ग्रेड-2 स्तर पर अधिसूचित है और इसके लिए सरकार द्वारा 4300 रुपये प्रति डिसमिल एमवीआर का दर तय है.
नियमानुकूल भू-स्वामियों को निर्धारित दर के चार गुणा अर्थात 17,200 रुपये प्रति डिसमिल मुआवजा दिया जा रहा था. लेकिन कुछ भू-स्वामियों ने इस भूमि को ग्रेड-1 के लिए निर्धारित एमवीआर 4800 रुपये प्रति डिसमिल के दर से राशि भुगतान की की जाने लगी. साथ ही मुख्य सड़क से जुड़े हिस्सेदारों ने अपने अनुसार भूमि देने पर अड़ गये. जिसके कारण इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रवेश द्वार सहित कई प्रकार की परेशानी उत्पन्न होने लगी और कुछ हिससेदारों ने तो अपने हिस्से का जमीन देने से साफ इनकार कर दिया. फलत: मामला फंस गया.
कहते हैं विधायक
मुंगेर के राजद विधायक विजय कुमार विजय का कहना है कि राजनीतिक कारणों से ऋषिकुंड से इंजीनियरिंग कॉलेज का स्थल बदला गया है और किसी भी कीमत पर स्थल नहीं बदलने दिया जायेगा.
कहते हैं नोडल पदाधिकारी
मुंगेर अभियंत्रण महाविद्यालय भूमि चयन के नोडल पदाधिकारी सह भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य निर्मल कुमार ने कहा कि दशरथपुर-बंगलवा पथ में इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए स्थल चयन कर लिया गया है और राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. स्वीकृति मिलते ही भू-अधिग्रहण का कार्य जिला प्रशासन द्वारा किया जाना है.
कहते हैं डीएम
जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह ने कहा कि ऋषिकुंड के समीप जो भूमि का चयन इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए किया गया था उसके भू-स्वामियों ने कई ऐसे प्रस्ताव रखे. जिसे पूरा किया जाना संभव नहीं था. स्थल चयन में जिला प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है. इस कार्य के लिए भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य नोडल पदाधिकारी हैं.
कहते हैं मंत्री
राज्य के ग्रामीण कार्य मंत्री सह जमालपुर के विधायक शैलेश कुमार ने कहा कि वे सदैव इसके पक्षधर रहे कि इंजीनियरिंग कॉलेज मुंगेर में बने. वह कहां बने यह मायने नहीं रखता. मुंगेर जिले में बनना चाहिए और इसके लिए सरकारी स्तर पर निर्धारित कमेटी स्थल चयन कर सरकार को प्रस्ताव भेजा है. कुछ लोग राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए अनावश्यक बयानबाजी कर रहे हैं.
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