बच्चों को किताबें नहीं, एचएम ने कबाड़ में बेच दी

Published at :22 Nov 2017 5:26 AM (IST)
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बच्चों को किताबें नहीं, एचएम ने कबाड़ में बेच दी

बेची गयी पुस्तकें शैक्षिक सत्र 2016-17 की हवेली खड़गपुर : सरकार गरीब परिवार के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकारी विद्यालयों में मुफ्त किताब, ड्रेस, छात्रवृत्ति व बैग बांट रही है. ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके. लेकिन शिक्षा विभाग के कर्मियों का हाल यह है कि वे चंद रुपयों के लिए […]

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बेची गयी पुस्तकें शैक्षिक सत्र 2016-17 की

हवेली खड़गपुर : सरकार गरीब परिवार के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकारी विद्यालयों में मुफ्त किताब, ड्रेस, छात्रवृत्ति व बैग बांट रही है. ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके. लेकिन शिक्षा विभाग के कर्मियों का हाल यह है कि वे चंद रुपयों के लिए बच्चों को दिये जाने वाले पुस्तक कबाड़ी में बेच रहे हैं. प्रखंड के खैरा गांव स्थित राजकीय बुनियादी बेसिक स्कूल के प्रबंधक एवं शिक्षकों ने मिलकर विभिन्न विषयों की पुस्तकें कबाड़ में किलों के भाव में बेच दिया.
मामले का खुलासा तब हुआ, जब कबाड़खाने वाला व्यक्ति स्कूल से किताबें खरीद कर ठेला पर लादकर गांव से निकल रहा था. कुछ ग्रामीण ठेले पर लदे बिहार सरकार द्वारा मुद्रित सरकारी विद्यालयों में बच्चों को नि:शुल्क वितरण होने वाली सरकारी किताबें को देखकर आग बबूला हो गए और कबाड़खाने वाले को मौके पर ही धर दबोचा. उसके बाद ग्रामीण हंगामा करने लगे.
ग्रामीण संजीव कुमार सिंह, उमाशंकर, बबीता देवी, कारी देवी, सत्यनारायण ठाकुर, उपेंद्र मंडल ने बताया कि हमलोग जब अपने बच्चों के लिए निशुल्क मिलने वाली किताबों की मांग प्रधानाचार्य और शिक्षक से करते हैं तो शिक्षकों का एक ही राग रहता है कि अभी तक विभाग से नि:शुल्क वितरण के लिए किताबें उपलब्ध नहीं करायी गयी हैं. ऐसी परिस्थिति में पूरा सत्र बीत गया और बच्चों ने बिना पढ़ाई के परीक्षा में भाग लिया. ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी पुस्तकों को बेचने के खेल में सिर्फ विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षक ही नहीं बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं. बेची गयी पुस्तकें शैक्षिक सत्र 2016-17 की बतायी जा रही है.
मामले पर परदा डालने का प्रयास : बच्चों को नि:शुल्क मिलने वाली पुस्तक को कबाड़ी खाने में बेचने के मामले को शिक्षा विभाग के अधिकारी परदा डालने में लगे हैं. विभागीय अधिकारी का कहना है कि विद्यालय के रद्दी कॉपियों को बेची गयी थी. जिसमें कुछ किताबें भी चली गयी थी. जबकि ग्रामीणों द्वारा जो पुस्तकें कबाड़ी वाले से बरामद की गयी, वह चार बोरियों में भरी हुई सैकड़ों पुस्तकें थी.
कहती हैं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी : प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कुमारी कंचनलता ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है. समन्वयक द्वारा किताबों की जांच करायी गयी है. प्रधानाध्यापक द्वारा बताया गया कि विद्यालय में पड़ी रद्दी कॉपियां बेची गयी थी. जिसमें कुछ नि:शुल्क वितरण होने वाली किताबें भी चली गयी थीं.
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