बिना पैथोलॉजिस्ट चल रहा जांच घर

Published at :21 Nov 2017 6:30 AM (IST)
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बिना पैथोलॉजिस्ट चल रहा जांच घर

सदर अस्पताल. 24 घंटे सुविधा की बात बेमानी, रात आठ बजे हो जाता है बंद रिपोर्ट की सत्यता पर उठते रहे हैं सवाल जांच घर में कर्मियों की वजह से होती है परेशानी सीबीसी जांच के लिए जाना पड़ता है बाहर मुंगेर : वैसे तो सदर अस्पताल का कोई भी विभाग कुव्यवस्था से वंचित नहीं […]

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सदर अस्पताल. 24 घंटे सुविधा की बात बेमानी, रात आठ बजे हो जाता है बंद

रिपोर्ट की सत्यता पर उठते रहे हैं सवाल
जांच घर में कर्मियों की वजह से होती है परेशानी
सीबीसी जांच के लिए जाना पड़ता है बाहर
मुंगेर : वैसे तो सदर अस्पताल का कोई भी विभाग कुव्यवस्था से वंचित नहीं है़ किंतु उन सबमें सबसे अधिक खराब स्थिति इन दिनों जांच घर की है़ इतना ही नहीं यहां वर्षों से कर्मियों का अभाव रहा है़ इससे जांच कार्य काफी प्रभावित होता है़ हद तो यह है कि यहां बिना पैथोलॉजिस्ट के ही जांच रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है़ जिसके आधार पर ही मरीजों के आगे का इलाज किया जाता है़ वहीं जिस कक्ष में विभिन्न प्रकार के जांच किये जाते हैं, वह वातानुकूलित भी नहीं है़
साथ ही पैथलॉजी कक्ष पूर्ण रूप से संक्रमण मुक्त भी नहीं कहा जा सकता.
बिना पैथोलॉजिस्ट चल रहा जांच घर: सरकारी हो या निजी, हर पैथोलॉजी में एक पैथोलॉजिस्ट का होना अत्यंत अनिवार्य है़ बिना पैथोलॉजिस्ट के जांच रिपोर्ट को सही नहीं माना जाता है़ किसी निजी पैथोलॉजी में अगर बिना पैथोलॉजिस्ट के जांच रिपोर्ट तैयार किये जाने का मामला पाया जाता है, तो उस पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई किये जाने का प्रावधान है़ ऐसे में जब सरकारी जांच घर ही बिना पैथोलॉजिस्ट का संचालित हो रहा तो फिर यहां के जांच रिपोर्ट को किस तरह से सही मानते हुए चिकित्सक मरीजों का इलाज करते जा रहे हैं.
मैन पावर की है कमी: कागज पर तो जांच घर 24 घंटे सातों दिन संचालित होता है़ किंतु वास्तविकता यही है कि यह जांच घर सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक दो शिफ्ट में चलता है़ शाम 8 बजे से सुबह 8 बजे तक यदि कोई गंभीर मामला आ जाये तो लैब टैक्निशियन को ऑन कॉल बुलाया जाता है़ इस दो शिफ्ट के लिए वर्तमान समय में सिर्फ पांच लैब टैक्निसियन यहां पर उपलब्ध हैं. जबकि यहां पर पैथोलॉजिस्ट का पद रिक्त पड़ा हुआ है़ इतना ही नहीं जांच घर में न तो कोई चतुर्थवर्गीय कर्मचारी पदस्थापित हैं और न ही सुरक्षा गार्ड ही यहां पर तैनात रहते हैं. इस कारण जांच में प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों को धोने का काम तथा जांच के लिए पहुंचने वाले लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने का काम भी यहां के लैब टैक्निशियन को ही करना पड़ता है़
जांच रिपोर्ट में होते रहती है गड़बड़ी
जानकारों की मानें तो जांच घर के जिस कक्ष में प्रयोगशाला स्थापित होता है, वह पूरी तरह से वातानुकूलित होना चाहिए़ जिससे जांच प्रक्रिया के लिए उपयोग में लाये जाने वाले मशीन को अत्यधिक तापमान का असर न हो तथा धूल-गंदगी का वहां पर जरा भी प्रभाव न हो़ किंतु सदर अस्पताल स्थित जांच घर के प्रयोगशाला में एयरकंडीशन मशीन लगा हुआ ही नहीं है. रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए लोग सीधे प्रयोगशाला में ही प्रवेश कर जाते हैं, जिससे प्रयोगशाला में काफी मात्रा में धूलकण व गंदगी भी पहुंच जाती है़ अत्यधिक तापमान व धूलकणों का मशीन से संपर्क होने के कारण जांच रिपोर्ट में प्राय: गड़बड़ी हो जाती है़
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि सिर्फ सदर अस्पताल ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में कहीं पर भी जांच घर में पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं. सरकार जब पैथोलॉजिस्ट की उपलब्ध करायेगी, तब व्यवस्था रहेगी़ सरकार को इसके बारे में कई बार लिखा जा चुका है़ हम सिर्फ निजी पैथोलॉजी पर कार्रवाई कर सकते हैं, सरकारी पर नहीं.
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