नर्सिंग होम में मरीजों का शोषण

Published at :05 Aug 2017 6:08 AM (IST)
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नर्सिंग होम में मरीजों का शोषण

कुव्यवस्था. क्लिनिकल एक्ट का नहीं हो रहा पालन, मरीज हो रहे कंगाल मुंगेर : निजी नर्सिंग होम में चिकित्सा के नाम पर मरीजों का जम कर शोषण किया जाता है़ शहर के अधिकांश नर्सिंग होम में क्लिनिकल एक्ट के नियमों की जहां धज्जियां उड़ रही है़ वहीं चिकित्सकीय मकड़जाल में जकड़ कर मरीज दिनों-दिन कंगाल […]

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कुव्यवस्था. क्लिनिकल एक्ट का नहीं हो रहा पालन, मरीज हो रहे कंगाल

मुंगेर : निजी नर्सिंग होम में चिकित्सा के नाम पर मरीजों का जम कर शोषण किया जाता है़ शहर के अधिकांश नर्सिंग होम में क्लिनिकल एक्ट के नियमों की जहां धज्जियां उड़ रही है़ वहीं चिकित्सकीय मकड़जाल में जकड़ कर मरीज दिनों-दिन कंगाल हो रहे हैं. बीमारी जल्द ठीक नहीं होने के कारण रोगी अलग-अलग चिकित्सकों के शरण में जा रहे हैं.
बावजूद इसके हर जगह मरीजों को एक ही प्रक्रिया से गुजरनी पड़ती है़ प्रत्येक चिकित्सक द्वारा दर्जन भर जांच करवाये जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा़ इतना ही नहीं इलाज के लिए बतायी गयी सारी दवाइयां भी मरीजों को निजी नर्सिंग होम से ही लेनी पड़ती है. प्रभात खबर ने इस मामले को लेकर शहर के अलग-अलग निजी नर्सिंग होम की पड़ताल की़ इसमें कई गड़बड़ियां सामने आयी है़ं
दवा लेने को भी बाध्य करते हैं कर्मी
केस स्टडी-1
शहर के श्रीकृष्णा रोड स्थित केयर मेटरनिटी एंड नियोनटाल सेंटर पर मरीजों के बैठने, पेयजल व शौचालय की बेहतर व्यवस्था पायी गयी़ किंतु यहां पर विभिन्न प्रकार के इलाज को लेकर कोई रेट लिस्ट नहीं लगाया गया था़ मरीजों के लिए न तो कैंटीन की व्यवस्था है और न ही मनोरंजन के कोई साधन उपलब्ध हैं. यहां पर चिकित्सक द्वारा लिखी गयी दवा रिशेप्सन काउंटर के ही दवा काउंटर पर लेनी पड़ती है़ यहां की लिखी दवा बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं है़ इस नर्सिंग होम में बिना अनुज्ञप्ति के ही मेडिकल स्टोर का भी संचालन किया जा रहा है़ इस संबंध में पूछे जाने पर सेंटर संचालक डॉ शशि लता ने बताया कि कैंटीन बनवाया जा रहा है तथा मेडिकल स्टोर के लिए आवेदन दिया जा चुका है़ वैसे भी वह अपने नर्सिंग होम में डेढ़ लाख तक की दवा रख सकती है.
केस स्टडी-2
शहर के घोषीटोला स्थित सहाय नर्सिंग होम में प्रतिदिन दर्जनों मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं. किंतु जिस अनुपात में मरीज यहां पर इलाज के लिए पहुंचते हैं, उस अनुपात में यहां मरीजों तथा उसके परिजनों के बैठने की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. वहीं मुंगेर-जमालपुर मुख्य सड़क के किनारे यह क्लिनिक होने के कारण यहां पर बैठे मरीजों को दिन भर धूल का सामना करना पड़ता है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है़ यहां पर न तो विभिन्न प्रकार के इलाजों को लेकर रेट लिस्ट लगाया गया है और न ही मरीजों के लिए मनोरंजन व कैंटीन की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है़ इस संबंध में पूछे जाने जाने पर डॉ पीएम सहाय ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया़
केस स्टडी-3
शहर के लोहापट्टी स्थित जीवन अवतार अस्पताल में जिस प्रकार चिकित्सकीय जांच की उपलब्धता है, उस प्रकार यहां मरीजों को सुविधा उपलब्ध नहीं करायी जा रही है. यहां पर विभिन्न प्रकार के जांच व इलाज के लिए रेट लिस्ट नहीं लगाया गया है़ कहने को तो यहां पर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, पैथोलॉजिकल जांच के अलावा दवा काउंटर भी बना है़ किंतु मरीजों के बैठने के लिए समुचित व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है़ पेयजल के लिए तो यहां पर वाटर प्यूरीफायर लगाया गया है, किंतु पिछले कुछ दिनों से यह खराब पड़ा हुआ है़ मरीजों को न सिर्फ बाहर से बोतलबंद पानी खरीद कर पीना पड़ता है, बल्कि मरीजों के पथ्य की व्यवस्था भी बाहर से ही करनी पड़ती है़ इस सबंध में पूछे जाने पर अस्पताल संचालक डॉ रंजीत कुमार ने बताया कि दवा काउंटर के लिए वे अनुज्ञप्ति लिये हुए हैं. वाटर प्यूफायर किस कारण से बंद है उसे दिखा लेते हैं. वे हर जांच व इलाज के लिए मरीजों को रसीद उपलब्ध कराते हैं.
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