डॉक्टर साहब नहीं देते फीस की रसीद

Published at :26 Jul 2017 6:12 AM (IST)
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डॉक्टर साहब नहीं देते फीस की रसीद

मुंगेर : एक ओर जहां सरकार टैक्स की चोरी करने वालों पर नकेल कसने के लिए जीएसटी जैसे कानून को लागू कर चुकी है़ वहीं अब भी कुछ ऐसे पेशे वाले शहर में मौजूद हैं, जो खुलेआम टैक्स की चोरी कर रहे हैं. जिसमें निजी चिकित्सा सेवा भी शामिल है़ वैसे तो शहर में दर्जनों […]

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मुंगेर : एक ओर जहां सरकार टैक्स की चोरी करने वालों पर नकेल कसने के लिए जीएसटी जैसे कानून को लागू कर चुकी है़ वहीं अब भी कुछ ऐसे पेशे वाले शहर में मौजूद हैं, जो खुलेआम टैक्स की चोरी कर रहे हैं. जिसमें निजी चिकित्सा सेवा भी शामिल है़ वैसे तो शहर में दर्जनों निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम हैं, जिनमें अधिकांश ऐसे हैं

जो मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी फीस तो लेते हैं, किंतु मरीजों को उसकी रसीद नहीं देते. इस कारण मरीज अपने खर्च को प्रमाणित नहीं कर पाते हैं. साथ ही निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम द्वारा टैक्स की भी जम कर चोरी हो रही है़ इससे सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है़

मरीजों से ली जा रही मनमानी फीस
वैसे तो जिले भी में 250 से भी अधिक निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम हैं. जहां प्रतिदिन हजारों मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं. एक ही प्रकार के इलाज के नाम पर मरीजों से कहीं 100 रुपये तो कहीं 500-1000 रुपये तक फीस की वसूली की जाती है़ यदि मरीज निर्धारित समय से पहले या निर्धारित समय के बाद इलाज के लिए पहुंच जायें तो उससे मनमाने फीस की भी मांग की जाती है़ किंतु फीस भरने के बाद जब मरीज चिकित्सक से रसीद की मांग करते हैं, तो उसे साफ तौर पर यह चेतावनी दे दी जाती है कि ‘इलाज कराना है तो कराओ, यहां पर फीस की कोई रसीद नहीं दी जाती’. और यदि कोई अधिक जिद कर बैठता है तो उसे फर्जी रसीद थमा दी जाती है़ हाल यह है कि निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम जहां टैक्स की भरपूर चोरी कर रहे हैं, वहीं आम मरीज ऐसे मनमानी से खासे परेशान हैं.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने बताया कि चिकित्सक अपने हिसाब से फीस तय करने के लिए स्वतंत्र है़ं इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अलग से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है़
निजी नर्सिंग होम में ली जा रही मनमानी फीस
केस स्टडी-1
शहर के पूरबसराय निवासी गोविंद प्रसाद ने बताया कि पिछले महीने वह इलाज कराने के लिए बड़ी बाजार स्थित डॉ रामप्रवेश प्रसाद के यहां गया़ जहां उनसे 400 के बदले 500 रुपये फीस ली गयी. जब उन्होंने रसीद देने की मांग की तो उसे बताया गया कि फीस की रसीद नहीं मिलती है़ दवा की रसीद लेनी हो तो भले ही मिल जायेगी.
केस स्टडी-2
संदलपुर निवासी रंजीत कुमार ने बताया कि उसकी पांच साल की पुत्री का पैर टूट गया, जिसे इलाज के लिए बड़ी बाजार स्थित रक्षादीप क्लिनिक में भरती कराया़ इलाज के बाद जब काउंटर पर बिल मांगा गया तो बिल में चिकित्सक का फीस नहीं जोड़ा गया था़ इस संबंध में जब पूछा गया तो कंपाउंडर ने बताया कि डॉक्टर का फीस बिल में नहीं जुटता है़
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