पैथोलॉजिकल जांच के नाम पर शोषण

Published at :24 Jul 2017 3:25 AM (IST)
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पैथोलॉजिकल जांच के नाम पर शोषण

मनमानी. नियमों का पालन नहीं कर रहे निजी क्लिनिक, स्थानीय प्रशासन है लापरवाह निजी अस्पतालों, जांच घरों में बेरोकटोक हो रही लूट-खसोट मुंगेर : शहर के निजी अस्पतालों व जांच घरों में बेरोक-टोक लूट-खसोट का धंधा फल-फूल रहा है़ कोई चिकित्सक मरीज को देखने के लिए 400 रुपये फीस लेते हैं तो कोई 500 रुपये […]

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मनमानी. नियमों का पालन नहीं कर रहे निजी क्लिनिक, स्थानीय प्रशासन है लापरवाह

निजी अस्पतालों, जांच घरों में बेरोकटोक हो रही लूट-खसोट
मुंगेर : शहर के निजी अस्पतालों व जांच घरों में बेरोक-टोक लूट-खसोट का धंधा फल-फूल रहा है़ कोई चिकित्सक मरीज को देखने के लिए 400 रुपये फीस लेते हैं तो कोई 500 रुपये तथा कोई 200 रुपये फीस लेकर मरीजों को चंगा कर देते हैं. इसी तरह जांच के नाम पर भी एक ही तरह की जांच के लिए अलग-अलग जांच घरों में 100 से 200 रुपये तक का अंतर सामने आ जाता है़ जबकि शहर के लगभग जांच घर बिना डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं. जिसका सबसे बड़ा कारण सरकार व स्थानीय प्रशासन की लापरवाही है़ शहर के निजी नर्सिंग होमों व जांच घरों में बिना रेट-लिस्ट लगाये ही मरीजों से रुपये वसूली का कारोबार चल रहा है.
जांच घरों में नहीं लगा है रेट चार्ट: शहर के बड़ी बाजार, भगत सिंह चौक, तोपखाना बाजार, नीलम चौक, पीपलपांती रोड सहित विभिन्न स्थानों पर दर्जनों एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी जांच घर खुले हुए हैं. कई नर्सिंग होमों में आइसीयू व एसएनसीयू की भी व्यवस्था उपलब्ध करायी जा रही है़ किंतु एक भी नर्सिंग होम व जांच घरों में इलाज व जांच का रेट लिस्ट प्रदर्शित नहीं किया गया है़ हाल यह है कि मरीजों से जांच के नाम पर मनमानी राशि वसूली जा रही है.
सूत्रों की मानें तो जांच शुल्क में चिकित्सक का कमीशन भी जुड़ा रहता है़ चिकित्सक व जांच घर के संचालकों में पहले से ही यह तय रहता है कि ऊपर के दो जांच को ठीक से कर देना है तथा बांकी के सभी जांच को नॉर्मल बता देना है. ऐसे में जांच घर के संचालक को भी सिर्फ दो तरह की जांच पर ही केमिकल खर्च करना पड़ता है़ बांकी जांच के रुपये तो उसे मुफ्त मिल जाते हैं. मरीज के जेब पर ही डाका पड़ता है़
क्या है नियम: एमसीआइ, नर्सिंग होम एक्ट के तहत सरकारी एवं निजी अस्पतालों में किसी भी प्रकार की जांच के लिए रेट लिस्ट लगाना आवश्यक है़ साथ ही साथ एक्स-रे, इसीजी, डायलिसिस व ब्लड टेस्ट के लिये जाने वाले शुल्क का भी लिस्ट लगाना जरूरी है़ किंतु निजी अस्पतालों में इस तरह का कोई भी रेट लिस्ट नहीं लगाया जा रहा है़ लोगों ने कहा कि सरकारी स्तर पर भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है़ स्वास्थ्य विभाग एवं राज्य स्वास्थ्य समिति भी इन समस्याओं के प्रति उदासीन बनी हुई है़ नतीजतन प्रतिवर्ष विभिन्न चिकित्सकीय सेवाओं के नाम पर 20-30 प्रतिशत की वृद्धि की जा रही है़
सदर प्रखंड के सीताकुंड डीह निवासी बाल्मीकि प्रसाद ने बताया कि उसे पिछले तीन-चार दिनों से बुखार आ रहा था़ जिसके बाद वह इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सक ने उसे डेंगू का जांच कराने के लिए कह दिया़ सदर अस्पताल के जांच घर में डेंगू का जांच-किट उपलब्ध नहीं रहने पर वह जांच के लिए प्रसून जांच घर पहुंचा जहां उससे 800 रुपये की मांग की गयी़ जिसके बाद वह बड़ी बाजार स्थित डॉ रामप्रवेश प्रसाद के क्लिनिक के नीचे जांच घर में पहुंचा जहां उससे जांच के लिए 700 रुपये मांगा गया़
शहर के कासिम बाजार निवासी रवि कुमार को पीलिया की शिकायत थी़ जिसके लिए वह प्रसून जांच घर पहुंचा, वहां उससे 220 रुपये लिया गया़ दोबारा उन्होंने शांति पैथोलॉजी में जब जांच करवायी, तो वहां पर उससे उसी जांच के लिए मात्र 150 रुपये लिये गये़ एक ही जांच में 70 रुपये का अंतर सामने आया़ हैरत की बात तो यह है कि डाक्टर ने दोनों ही जांच को सही मान्यता दी़
प्रोफेशनल वर्क में लोग अपनी इच्छानुसार जांच की फीस लेते हैं. इसके लिए सरकार ने कोई नियम नहीं बनाया है़ जिस जांचघर में बिना डॉक्टर के ही जांच किया जा रहा है़, उसके विरुद्ध जांच कर रिपोर्ट देने के लिए डीएस को कहा गया है़
डॉ श्रीनाथ, सिविल सर्जन
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