एक ही सूई से दर्जनों को टांका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Jul 2017 1:17 PM (IST)
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मुंगेर : सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इन दिनों इलाज हुआ, तो संक्रमण की मुकम्मल व्यवस्था हो चुकी है़ जहां इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को विभिन्न प्रकार के बीमारियों से संक्रमित होना पड़ सकता है़ हाल यह है कि यहां एक ही सूई से बिना उसे उपचारित किये ही दर्जनों घायल मरीजों […]
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मुंगेर : सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इन दिनों इलाज हुआ, तो संक्रमण की मुकम्मल व्यवस्था हो चुकी है़ जहां इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को विभिन्न प्रकार के बीमारियों से संक्रमित होना पड़ सकता है़ हाल यह है कि यहां एक ही सूई से बिना उसे उपचारित किये ही दर्जनों घायल मरीजों को टांके लगाये जाते हैं, वहीं ड्रेसिंग, इसीजी तथा जांच की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में इमरजेंसी सेवा लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है़ बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन उदासीन है़
मानकों का नहीं रखा जा रहा ख्याल: इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सकीय मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है़ इस कारण यहां हमेशा किसी संक्रामक रोग होने का खतरा बना रहता है़ इमरजेंसी वार्ड में प्राय: घायल मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. कभी-कभी तो एक साथ 8-10 घायल मरीज भी यहां पहुंच जाते हैं. ऐसी स्थिति में एक ही सूई से बारी-बारी सभी घायलों के जख्मों पर लगा कर टांका लगा दिया जाता है़ चिकित्सकीय मानकों के अनुसार, किसी घायल को टांका लगाने के उपरांत बिना उपचारित किये उस सूई का प्रयोग दूसरे घायलों पर नहीं किया जा सकता़ किंतु यहां के ड्रेसरों को शायद मरीजों के जान की परवाह नहीं है़ ड्रेसरों की यह गलती मरीजों को संक्रामक रोगों का शिकार बना सकती है़
24 घंटे ड्रेसिंग व जांच की सुविधा नहीं: इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे ड्रेसिंग, इसीजी व अन्य जांच की मुकम्मल व्यवस्था होनी चाहिए़ किंतु सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे सेवा के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है़
मालूम हो कि यहां पर इसीजी तथा ड्रेसिंग कक्ष को सिर्फ आउटडोर सेवा के दौरान ही खोली जाती है़ वहीं जांच घर सिर्फ दिन में ही कार्यरत रहता है़ ऐसे में यदि गंभीर अवस्था में कोई हर्ट का मरीज या कोई डायबिटिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं तो यहां का बदहाल सिस्टम मरीजों की जान ले लेती है़ वहीं ड्रेसिंग कक्ष बंद रहने के कारण घायल मरीजों का ड्रेसिंग उसके बेडों पर ही कर दिया जाता है़ इस क्रम में घायल के जख्म से खून बह कर बेड पर फैल जाता है, जो दूसरे मरीजों के लिए संक्रमण का कारण बन सकता है़
कहते हैं सिविल सर्जन: सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि इमरजेंसी सेवा को दुरुस्त करने के लिए लगातार अस्पताल उपाधीक्षक से पत्राचार किया जा रहा है़
24 घंटे ड्रेसिंग, इसीजी व जांच की सुविधा नहीं
केस स्टडी-1
शहर के बेटवन बाजार निवासी मो शादाब अख्तर की मां को गुरुवार को दिल का दौरा पड़ा तथा वह पूर्व से अस्थमा की भी मरीज हैं. शादाब ने अपनी मां को गंभीर हालत में इलाज के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया़ इ सके बाद चिकित्सक ने उनका इसीजी कराने को कहा़ किंतु आउटडोर सेवा बंद होते ही इसीजी कक्ष में भी ताला लगा दिया गया था़ इस कारण उसे शाम के ओपीडी आरंभ होने तक इसीजी के लिए इंतजार करना पड़ा़
केस स्टडी-2
महुली पंचायत की घौताल महतो टोला निवासी सावित्री देवी की हालत गुरुवार की सुबह काफी बिगड़ गयी, वे डायबिटिक मरीज है़ परिजनों ने सावित्री देवी को इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड में भरती कराया़ किंतु सुबह के 7 बजे अस्पताल का जांच घर बंद था़ इस कारण उन्हें जांच के लिए निजी क्लिनिक का सहारा लेना पड़ा़
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण इसीजी व जांच सेवा 24 घंटे उपलब्ध नहीं करायी जा रही है़ ड्रेसिंग को लेकर वे ड्रेसरों से बात करेंगे़
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