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Motihari: अंग्रेजों का सबसे बड़ा कोठी पीपराकोठी मोदी शासन में बना कृषि का बड़ा केंद्र : राधामोहन

Updated at : 15 Apr 2025 10:05 PM (IST)
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Motihari: अंग्रेजों का सबसे बड़ा कोठी पीपराकोठी मोदी शासन में बना कृषि का बड़ा केंद्र : राधामोहन

चंपारण सत्याग्रह के 108 वें वर्षगांठ पर सांसद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ चंपारण से बुलंद आवाज देश ही नहीं, दुनिया के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ.

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Motihari: मोतिहारी. चंपारण सत्याग्रह के 108 वें वर्षगांठ पर सांसद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ चंपारण से बुलंद आवाज देश ही नहीं, दुनिया के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ. चंपारण में अंग्रेजों के कोठी का जाल था, जहां सबसे बड़ा पीपराकोठी अब कृषि का बड़ा केंद्र बन गया है. यह उपलब्धि किसानों के लिए बड़ी है, क्योंकि गांधी जी सत्याग्रह, स्वच्छता के साथ किसानों के हित की बात करते थे.

वैश्विक स्तर पर भी मोतिहारी शिक्षा का बड़ा केंद्र बना है, जहां 11 साल पहले स्थापित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय से छात्र देश-विदेशों में रोजगार प्राप्त कर रहे है. इंडियन ऑयल, रिफलीन प्लांट, पीपराकोठी हॉटी कल्चर सहित अन्य संस्थानों से छात्रों को रोजगार के अवसर मिल रहे है. यह एक उपलब्धि मोदी सरकार की देन है. गांधी का सपना था कि गांव, गरीब व किसान जो बिहार में नीतीश कुमार व केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में साकार हो रहा है. किसानों की आय बढ़ी है, तो विकास के कई नये आयाम बने है. चंपारण के मोतिहारी से ही स्वच्छाग्रहियों ने गांव-गांव अलख जगाया, जो आज पूरे देश में मिशाल बना हुआ है और हर जगह स्वच्छता अभियान चल रहा है.

राज्यपाल ने किया स्मारिका का विमोचन

मोतिहारी. चंपारण सत्याग्रह व किसान कार्यक्रम के दौरान महामहिम राज्यपाल, सांसद राधामोहन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री कृष्णनंदन पासवान, पूर्व मंत्री प्रमोद कुमार, महात्मा गांधी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ आशुतोष शरण आदि ने चंपारण सत्याग्रह स्मारिका का विमोचन किया, जिसमें चंपारण के ऐतिहासिक आंदोलन स्थल सहित कई जानकारियां उपलब्ध है. इस दौरान महामहिम को विधायक, मंत्री, केविके पीपराकोठी के वैज्ञानिक व अन्य लोगों ने सम्मानित भी किया.

गांधी स्मारक व चरखा पार्क देखने से ही मिलती है सत्याग्रह आंदोलन की झलक: राज्यपाल

मोतिहारी. बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मोहन दास करमचंद्र गांधी को 14 अप्रैल 1917 की रात्रि मुजफ्फरपुर स्टेशन पर लालटेन की रौशनी में आचार्य कृपलानी ने उतारा था, वे 15 अप्रैल 1917 को मोतिहारी पहुंचकर जिस सत्याग्रह आंदोलन का बीज बोया, वह प्रस्फुटित होकर देश-दुनिया के लिए मजबूत मंत्र बन गया. सत्याग्रह से देशवासियों को संबल के साथ आजादी मिली. कहा कि चरखा पार्क और गांधी स्मारक स्थल, जहां गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ 18 अप्रैल को ऐतिहासिक ब्यान दर्ज कराया था, जिसे देखने मात्र से चंपारण सत्याग्रह आंदोलन की कहानी स्पष्ट हो जाती है. नयी पीढ़ी को गांधी के सत्याग्रह, त्याग व तपस्या से सिख लेनी चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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