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बिहार: इंसाफ चाहिए! घायल बच्चे के लिए बंदरों ने सड़क किया जाम, यात्री रहे परेशान

Updated at : 01 May 2025 4:48 PM (IST)
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बंदरों ने सड़क किया जाम

बंदरों ने सड़क किया जाम

बिहार: मधुबनी जिले के बेनीपट्टी मुख्य सड़क पर उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब दोपहर के समय बंदरों के एक झुंड ने सड़क जाम कर दिया. बताया जा रहा है कि दोपहर में एक बाइक सवार ने बंदर के बच्चे को टक्कर मार दिया. इसके बाद बंदर गुस्से में आ गए और सड़क पर धरना शुरू कर दिया.

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बिहार, मधुबनी, नागेंद्र नाथ झा: इंसानों की तरह बंदर भी अब ‘इंसाफ’ की मांग करने लगे हैं! मधुबनी जिले के बेनीपट्टी मुख्य सड़क पर उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब दोपहर के समय बंदरों के एक झुंड ने सड़क पर अचानक ‘धरना प्रदर्शन’ शुरू कर दिया. कारण? एक बाइक सवार ने एक बंदर के बच्चे को टक्कर मार दी, जिससे वह घायल हो गया.

बंदर के बच्चों को बाइक सवार ने मारा था टक्कर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 1 बजे की है जब अचानक कुछ बंदर सड़क पर बैठ गए. कुछ ही मिनटों में उनका पूरा झुंड आ गया और उन्होंने सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया. नतीजा ये हुआ कि दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतार लग गई. कोई भी वाहन चालक हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था कि वह आगे बढ़े, क्योंकि बंदरों की आंखों में साफ गुस्सा दिखाई दे रहा था. स्थानीय लोगों ने बताया कि बंदर घायल बच्चे के पास बैठकर चिल्ला रहे थे और जैसे मानो इंसाफ मांग रहे हों. किसी को भी उनके पास जाने की हिम्मत नहीं हुई. करीब एक घंटे तक यह ‘बंदर आंदोलन’ चलता रहा। इस दौरान राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

“बंदरों का न्याय मार्च” 

हालात तब सामान्य हुए जब कई चार पहिया वाहन एक साथ आगे बढ़े और धीरे-धीरे बंदरों को सड़क छोड़नी पड़ी. हालांकि, बंदर अभी भी पास के पेड़ों पर बैठे रहे और जाते-जाते घूरते रहे, जैसे चेतावनी दे रहे हों कि अगली बार ज्यादा सतर्क रहना. इस अनोखी घटना ने सभी को हैरान कर दिया है. आमतौर पर जानवरों को इंसानों से डरते हुए देखा जाता है, लेकिन यह मामला बिल्कुल उल्टा था. सोशल मीडिया पर भी यह घटना वायरल हो रही है, और लोग इसे “बंदरों का न्याय मार्च” बता रहे हैं. 

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नहीं आई प्रशासन की प्रतिक्रिया 

हालांकि इस मामले में अब तक प्रशासन की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन स्थानीय लोग अब और सतर्क हो गए हैं. बाइक सवार की पहचान नहीं हो सकी है, परंतु इस घटना ने यह साफ कर दिया कि अब इंसाफ सिर्फ इंसानों का अधिकार नहीं रहा. जंगल के नियम अब शहर की सड़कों पर भी लागू हो रहे हैं. 

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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