काम पर लौट रहे प्रवासियों का छलका दर्द, बोले- बिहार में रोजगार नहीं, इसलिए दिल्ली जाना मजबूरी

Published by :Prashant Tiwari
Published at :11 Nov 2024 3:02 PM (IST)
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काम पर लौट रहे प्रवासियों का छलका दर्द, बोले- बिहार में रोजगार नहीं, इसलिए दिल्ली जाना मजबूरी

Bihar: दिल्ली के लिए रवाना होते हुए प्रवासियों ने कहा कि बिहार में मिलने वाली दिहाड़ी इतनी कम होती है कि परिवार का गुजारा नहीं चल पाता है.

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छठ पूजा मनाने के बाद बिहार से प्रवासी और मजदूर अपने काम पर लौटने लगे हैं. वैशाली से दिल्ली की ट्रेनों में सफर कर रहे कुछ यात्रियों से जब मीडिया वालों को देखा तो उनका दर्द छलक उठा. पत्रकारों से बात करते हुए यात्रियों ने बिहार छोड़कर दिल्ली जाने की अपनी मजबूरी बताई. कुछ यात्री हरियाणा, बंगाल, कोलकाता, रायपुर, लुधियाना, पंजाब जाने के लिए निकले थे. रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ भी देखने को मिली है. हालांकि, रेलवे की ओर से यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्था भी की गई है. 

बिहार में नहीं मिलती दिहाड़ी

दिल्ली के लिए रवाना होते हुए प्रवासी अरुण महतो ने कहा कि दिल्ली कमाने के लिए जा रहे हैं. बिहार में रोजगार नहीं है और रोजगार मिलता भी है तो दिहाड़ी इतनी कम होती है कि परिवार का गुजारा नहीं चल पाता है. दिल्ली में मिस्त्री के साथ काम करके 800 रुपये रोजाना कमाते हैं, जिससे परिवार का गुजर बसर हो जाता है. कुछ ऐसा ही जवाब बुधन कुमार ने दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली कमाने के लिए जा रहे हैं क्योंकि वहां पर महीने के 17-18 हजार रुपये कमा लेते हैं जिससे परिवार का खर्चा चल जाता है. 

दिल्ली में कमाकर बचा लेते हैं पैसा

दिलीप कुमार ने बताया कि छठ पूजा मनाने के लिए बिहार आए थे. अब रोजगार के लिए दिल्ली जा रहे हैं क्योंकि बिहार में दिल्ली जितना पैसा नहीं मिलता है और परिवार का खर्चा भी पूरा नहीं पड़ता है. दिल्ली में 800 रुपये प्रतिदिन कमा लेते हैं. परिवार अच्छे से चलता है और कुछ पैसे भी बचा लेते हैं. 

दिल्ली जाना मजबूरी… 

विपिन कुमार ने बताया कि बिहार सरकार को रोजगार के लिए कुछ करना चाहिए. दिल्ली जाना मजबूरी है क्योंकि बिहार में काम के लिए बहुत कम पैसे मिलते हैं जिससे गुजारा नहीं हो पाता है. दिल्ली में मिस्त्री का काम करते हैं और रोजाना एक हजार रुपये कमाते हैं. इन पैसों से “मेरा और मेरे परिवार का गुजारा अच्छे से हो जाता है.”

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लेखक के बारे में

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प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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