Madhubani News : तपोभूमि में ''''अंधेरा'''' : बिस्फी के विद्यालय में जर्जर भवन व अभावों के बीच सिमटा बच्चों का भविष्य
Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 22 Jan 2026 10:36 PM
बिहार सरकार ''पढ़ेगा बिहार, बढ़ेगा बिहार'' का नारा तो बुलंद करती है, लेकिन हकीकत इसका उलटा है.
Madhubani News : बिस्फी (मधुबनी). बिहार सरकार ””पढ़ेगा बिहार, बढ़ेगा बिहार”” का नारा तो बुलंद करती है, लेकिन हकीकत इसका उलटा है. बिस्फी प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय याज्ञवल्क्य स्थान जगवन की स्थिति आज शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का जीवंत प्रमाण बन चुकी है. यहां नामांकित बच्चे न केवल बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, बल्कि जर्जर भवन के साये में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं.
एक कमरे में सिमटी पूरी पाठशाला
विद्यालय में कुल 54 बच्चे नामांकित हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए चार शिक्षक नियुक्त हैं, हालांकि स्कूल के नाम पर यहां केवल दो जर्जर कमरे उपलब्ध हैं, जहां हादसे की आशंका है. भवन की स्थिति इतनी भयावह है कि पठन-पाठन के लिए याज्ञवल्क्य ऋषि तपोभूमि से निर्मित एक छोटे से कमरे का सहारा लेना पड़ रहा है. इसी एक कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठने को विवश हैं.
सुविधाओं के नाम पर ””शून्य””
आधुनिक दौर में जहां स्कूलों को स्मार्ट बनाने की बात हो रही है. वहीं, इस विद्यालय में बुनियादी जरूरतें भी मयस्सर नहीं हैं.पेयजल और स्वच्छता:
विद्यालय में न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही चापाकल की.खुले में रसोई : भवन की कमी के कारण शिक्षकों के बैठने, बच्चों की क्लास और मिड-डे मील का खाना बनाने का काम बाहर खुले में होता है.
मौसम की मार:
कड़ी धूप हो या मूसलाधार बारिश, खुले में बैठने के कारण बच्चों और शिक्षकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.अधिकारियों की उदासीनता से आक्रोश
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनुराधा कुमारी ने अपना दर्द साझा कर बताया कि उन्होंने जर्जर भवन द सुविधाओं की कमी को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक कई बार लिखित आवेदन दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश, अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में इस स्थिति के कारण आक्रोश है. पंचायत समिति सदस्य घूरन कुमार पासवान, शिवम यादव, लाल बच्चन यादव, राम किशोर यादव व छोटे साह ने कहा कि इस विद्यालय में अधिकांश बच्चे पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा और अनुसूचित जाति से आते हैं. शिक्षा के प्रति सरकार की ऐसी अनदेखी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या गरीब बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है.जब तक बुनियादी ढांचा दुरुस्त नहीं होता, तब तक इन नौनिहालों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा. अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस खबर के बाद नींद से जागता है या बच्चे यूं ही बदहाली में पढ़ने को मजबूर रहेंगे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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