मधुबनी में न्यायमित्रों ने उठाया बायोमैट्रिक हाजिरी का मुद्दा, डीएम के सामने रखेंगे अपनी आपत्ति

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फोटो : परिचय: बैठक में उपस्थित जिला न्यायमित्र संघ के सदस्य न्यायमित्र | Prabhat Khabar Network

मधुबनी में पंचायत कर्मियों की बायोमीट्रिक उपस्थिति के आदेश के बाद न्यायमित्रों में असमंजस की स्थिति है. वे खुद को सरकारी कर्मचारी मानने से इनकार कर रहे हैं और अपनी नियुक्ति की प्रकृति का हवाला दे रहे हैं. संघ ने डीएम के समक्ष अपनी आपत्तियां रखने का निर्णय लिया है.

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मधुबनी न्यूज: पंचायत कर्मियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति को लेकर जिलाधिकारी आनंद शर्मा के आदेश के बाद न्यायमित्रों के बीच अपनी भूमिका और दायित्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन गयी है. न्यायमित्रों का कहना है कि उन्हें ग्राम कचहरी में सरपंच के सलाहकार के रूप में नियत फीस पर नियुक्त किया गया है, लेकिन अब उन्हें पंचायत कर्मियों की श्रेणी में रखकर नियमित कर्मचारियों की तरह उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है.

निर्धारित दो कार्य दिवसों पर हाजिरी को तैयार

मामले को लेकर जिला न्यायमित्र संघ की बैठक जिलाध्यक्ष ललन कुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई. बैठक में न्यायमित्रों ने ग्राम कचहरी के निर्धारित दो दिवसीय कार्य दिवसों पर बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के निर्णय का समर्थन किया. हालांकि, प्रतिदिन सुबह 10 बजे तक पंचायत कर्मियों की तरह अनिवार्य उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था पर आपत्ति जतायी गयी.

बोले- सरकारी कर्मचारी नहीं हैं न्यायमित्र

बैठक में न्यायमित्रों ने कहा कि ग्राम कचहरी में सर्वोच्च अधिकार सरपंच का होता है. न्यायमित्र की नियुक्ति सरपंच को विधिक सलाह और मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से की गयी है. वे नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और उन्हें वेतन या मानदेय के बजाय नियत फीस का भुगतान किया जाता है. ऐसे में पंचायत सचिव या अन्य कर्मियों की तरह निश्चित समय पर रोजाना उपस्थिति की बाध्यता उचित नहीं है.

जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दिन भी पहुंचते हैं

न्यायमित्रों का कहना है कि जब सरपंच या ग्राम कचहरी को कानूनी सलाह की जरूरत होती है, तो वे निर्धारित दो कार्य दिवसों के अलावा भी वहां पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. इसलिए उनकी कार्य प्रणाली को नियमित पंचायत कर्मियों की श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा.

डीएम के समक्ष रखेंगे आपत्ति और सुझाव

संघ ने निर्णय लिया कि न्यायमित्रों की सभी आपत्तियों और सुझावों को जिला पदाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा. साथ ही उनकी भूमिका और उपस्थिति व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया जाएगा. हालांकि, जब तक इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं होती, न्यायमित्र अपने निर्धारित कार्य दिवसों पर समय से बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराएंगे.

आदेश में न्यायमित्रों का नाम शामिल

मालूम हो कि हाल में डीएम ने सभी पंचायत कर्मियों को प्रतिदिन सुबह 10 बजे तक बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने और 10:10 बजे तक उसकी फोटो व रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. इस आदेश में न्यायमित्रों का नाम भी शामिल है. इसी के बाद संघ की ओर से उनकी सेवा की प्रकृति और उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया गया है.

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