नोटबंदी के बाद रविवार को पहली बार बैंक बंद रहे. बैकों के बंद
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Nov 2016 4:37 AM
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होने के कारण एटीएम के सामने लंबी लाइन देखी गयी. मधुबनी : नोट बंदी के कारण लोगों पर इसका काफी असर पड़ा है ग्रामीण क्षेत्रों में संभ्रांत परिवार से लेकर आर्थिक रुप से कमजोर परिवार पर भी इसका खासा असर पड़ा है बाजारों में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने के कारण लोग […]
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होने के कारण एटीएम के सामने लंबी लाइन देखी गयी.
मधुबनी : नोट बंदी के कारण लोगों पर इसका काफी असर पड़ा है ग्रामीण क्षेत्रों में संभ्रांत परिवार से लेकर आर्थिक रुप से कमजोर परिवार पर भी इसका खासा असर पड़ा है बाजारों में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने के कारण लोग प्रतिदिन उपयोग में आने वाली चीजों के लिए तरस गए हैं. नोट बंदी को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका काफी प्रभाव पड़ा है.गंडक पार का यह क्षेत्र पूर्ण रूप से खेती पर निर्भर है. इससे किसानो को खेती समय पर नहीं हो पाने का भय सता रहा है.पैसे के लिए किसान दीन भर बैंकों में लाइन लगा रहे हैं.
मजदूर, किसान, दुकानदार, शिक्षक एवं संपन्न परिवारों में गिने जाने वाले सभी लोग नोटबंदी से परेशान हैं.मजदूर अकलू तुरहा की माने तो लोगों के पास पैसे का अभाव है. जिससे हम जैसे मजदूर तबके के लोगों को मजदूरी का काम बहुत ही कम मिल रहा है. अगर मजदूरी लगती भी है तो लोग कहते हैं जिससे हमें परिवार चलाने में परेशानी हो रही है. किसान रामअवध सिंह ने बताया कि नोट बंद होने के कारण खेती-बाड़ी पर काफी प्रभाव पड़ा है.
दुकानदार सुरेश प्रसाद ने बताया कि नोट बंदी के कारण दुकान कभी हालत खास्ता है सुबह से लेकर शाम तक बैठने पर 500 से लेकर हजार रुपए का व्यवसाय भी नहीं हो पा रहा है. वहीं मुखिया रामाधार सिंह जो संपन्न है ने बताया कि वर्तमान में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इसका परिणाम दूरगामी होगा जिससे हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी अब जाकर धीरे धीरे अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है. वहीं आर्थिक रुप से कमजोर परिवार के मुखिया व्यास ने बताया कि नोट बंदी के कारण हमें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस समय गेहूं गन्ने की बुवाई की जा रही है.घर में जो पैसा था जमा करा दिया.बैंक से पैसा मिल नहीं रहा.
भितहा. प्रखंड क्षेत्र में नोटबंदी का असर दुकानदारों किसानों और मजदूरों पर दिखने लगा है. प्रखंड मुख्यालय के मुख्य दरवाजे के पास दुकानदार दीपक कुमार मिठाई की दुकान चलाते हैं.उनका कहना है कि नोट बंदी के बाद दुकान पर बिक्री घटी है.
पहले वे जहां हजार पंद्रह सौ की बिक्री रोज कर लेते थे.वहीं अब पांच सौ रुपये की बिक्री भी नहीं होती. उनका मानना है कि लोगों के पास पैसा नहीं होने के कारण ऐसा हुआ है.वही मुराडीह बाजार में मिठाई दुकानदार जोगेंद्र शाह का भी यही कहना है कि नोट बंदी के बाद बिक्री घटी है परंतु यह नोट बंदी बहुत जरूरी था. इससे कालाधन बाहर आयेगा.
वहीं किराना व्यवसाई पप्पू गुप्ता सीताराम साह आदि भी नोटबंदी से परेशान हैं. प्रखंड के किसान शिवनाथ कुशवाहा, मैनेजर महतो, जाकिर हुसैन, अजय राय राजदेव यादव आदि लोगों का कहना है कि नोट बंदी से इस समय खेती करने में काफी परेशानी आ रही है.खाद बीज खरीदने से लेकर मजदूरी देने तक में काफी दिक्कत हो रही है. परंतु नोट बंदी का फैसला सराहनीय है जिससे देश का काला धन बाहर आएगा. वहीं प्रखंड के मजदूर रामलाल राम महंत बीन गोबरी पडित हरदेव कोहार काशी बैठा ,जंगली राम आदि लोगों का कहना है कि नोट बंदी से हम लोगों को काम नहीं मिल रहा है.एक सप्ताह से बेकार बैठे हैं.
स्टेट बैंक चौराहा पर ग्राहक के इंतजार में बैठे दुकानदार .
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