नोटबंदी नहीं बिक रहा धान, ऋण चुकता करने में बढ़ी परेशानी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Nov 2016 5:54 AM

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सभी बैकों में नहीं हो रहा नोट एक्सचेंज अब अधिकतर बैंक में नहीं हैं रुपये कहीं नोट की कमी, तो कहीं स्याही नहीं मधुबनी : नोटबंदी ने किसानों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न कर दी है. एक ओर जहां किसान अपनी खेती के लिये खाद बीज की खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं. वहीं कॉपरेटिव […]

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सभी बैकों में नहीं हो रहा नोट एक्सचेंज

अब अधिकतर बैंक में नहीं हैं रुपये
कहीं नोट की कमी, तो कहीं स्याही नहीं
मधुबनी : नोटबंदी ने किसानों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न कर दी है. एक ओर जहां किसान अपनी खेती के लिये खाद बीज की खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं. वहीं कॉपरेटिव बैंक से लिया गया ऋण का चुकता भी वे नहीं कर पा रहे है. इसके साथ ही पैक्स द्वारा धान खरीद योजना भी इससे प्रभावित हो रहा है.
इधर, रुपये के लिये लोग पहले से अधिक हलकान दिख रहे हैं. बैंकों में नोट एक्सचेंज हो नहीं रहे हैं. एटीएम में पैसा है नहीं. एक आध एटीएम में यदि पैसे डाले भी जाते हैं तो महज एक से दो घंटे में ही वह रकम समाप्त हो जा रहा है. लोग एक दूसरे से उधार व कर्ज लेकर काम चला रहे है. बाजारों में कारोबार में लगातार गिरावट हो रही है. दुकानदार दिन भर ग्राहक की प्रतीक्षा में बैठे रहते हैं.
साख हो रही है खराब
कॉपरेटिव बैंक में 1000 व 500 के नोट के नहीं लेने के आदेश को कॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष नवेदु झा ने गलत ठहराया है. कहा है कि जब सरकार अन्य बैंकों की तरह इस बैंक से काम ले रही है तो रुपये के लेन देन में इस प्रकार की दोहरी नीति ठीक नहीं है. इससे बैंक की साख खराब हो रही है. हमारा हर ग्राहक किसान है. किसानों को अभी खेती के लिये रुपये चाहिए जो वे राशि बदल कर ले सकते थे. पर यहां उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पा रही है. सरकार को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए .
नहीं बदले जा रहे नोट
अब जिले के अधिकांश बैंकों में नोट एक्सचेंज का काम नहीं हो पा रहा है.
शहर के एक दो बैंक ही ऐसे हैं. जहां पर नोट बदले जा रहे है. गुरुवार को एसडीएफसी, सेंट्रल बैंक, एक्सिस बैंक, काॅरपोरेशन बैंक सहित अन्य कई बैंकों में नोट एक्सचेंज नहीं हो पा रहा है. जिससे लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम घूमते नजर आये.
एटीएम में पैसे के लिए लगी लंबी कतार
1. 90 लाख किसान हैं कॉपरेटिव के ऋणधारक
कॉपरेटिव बैंक से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले के एक लाख 90 हजार किसान ऐसे हैं जो कॉपरेटिव से ऋण लिये हुए हैं. इन किसानों को ऋण चुकता भी इसी एक दो माह में करना होता है. इन किसानों को हर साल खरीफ में धान बेचकर रबी में पुराना ऋण चुकता कर पुन: नया ऋण दिया जाता है. पर इस साल किसानों का ना तो धान बिक रहा है और ना ही किसान समय पर अपना ऋण चुकता कर पा रहे हैं. ऐसे में किसानों को सूद की मार भी झेलनी होगी. जानकारी के अनुसार कॉपरेटिव बैंक में जिले के 16 लाख 50 हजार किसान सदस्य हैं. जिसमें से दो लाख 50 हजार किसान खाताधारक हैं. इसमें से एक लाख 90 हजार किसान ऋण धारक हैं.
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