नवजात केयर यूनिट में 46 नवजात का उपचार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Nov 2016 5:53 AM

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मधुबनी : सदर अस्पताल स्थित विशेष नवजात केयर यूनिट कार्य करने लगा है और गंभीर बीमारियों से ग्रसित नवजात को इस इकाई में भर्ती कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया जा रहा है. नवजात शिशुओं का विशेष केयर इकाई द्वारा 24 घंटे सेवा मुहैया की जा रही है. लाखों की लागत से इस विशेष नवजात […]

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मधुबनी : सदर अस्पताल स्थित विशेष नवजात केयर यूनिट कार्य करने लगा है और गंभीर बीमारियों से ग्रसित नवजात को इस इकाई में भर्ती कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया जा रहा है. नवजात शिशुओं का विशेष केयर इकाई द्वारा 24 घंटे सेवा मुहैया की जा रही है. लाखों की लागत से इस विशेष नवजात केयर यूनिट की स्थापना की गई है. जहां पिछले तीन माह में अब तक 46 नवजात शिशुओं का उपचार कर उन्हें रोग मुक्त किया गया है.

जून में हुई स्थापना
सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू का निर्माण लगभग 20 लाख रुपये से किया गया. इस इकाई का उद्घाटन 29 जून 2016 को जिलाधिकारी गिरिवर दयाल सिंह ने किया. उद्देश्य था कि नवजात शिशु मृत्यु दर में हो रही वृद्धि को रोकना. एसएनसीयू में एक शिशु रोग विशेषज्ञ सहित 13 ए ग्रेड प्रतिनियुक्त है. जिसमें एक ए ग्रेड स्टाफ नर्स को प्रभारी बनाया गया है. एसएनसीयू सेवा 24 घंटे चालू रखा गया है.
दो प्रकार के है उपकरण
एसएनसीयू में रेडियेंट वारमर व फोटो थैरेपी उपकरण लगाये गये है. 12 रेडियेंट उपकरण से युक्त एसएनसीयु में 6 रेडियेंट वारमर सदर अस्पताल के बीमारी से ग्रसित नवजातों के लिए तथा 6 रेडियेंट वारमर जिले अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से आने वाले गंभीर बीमारी से ग्रसित नवजातों के लिए है. रेडियेंट वारमर के द्वारा निमोनिया कम वजन के नवजात, वर्थ हाइपों, थरमिया व वर्थ एक्सफे क्सिया से ग्रसित नवजात का उपचार किया जाता है. वहीं फोटो थेरेपी से जानडीस से ग्रसित नवजात का उपचार होता है.
74 दिनों में 46 नवजातों का उपचार
एसएनसीयू में सितंबर 16 से 14 नवंबर तक 46 नवजातों का उपचार कर उनके जीवन को नया जीवन प्रदान किया गया.
माह ग्रसित नवजात
सितंबर 6
अक्तूबर 10
नवंबर 30
नवजात को मिलेगा लाभ
एसएनसीयु की प्रभारी दीपमाला बताती है, कि अब तक उपचार के लिए आये सभी 46 नवजातों में निमोनिया व सांस से ग्रसित बच्चे का उपचार किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस यूनिट के खुलने से गंभीर रूप से ग्रसित नवजातों का उपचार संभव हो सका है.
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